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भास्कर इंटरव्यू: स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा

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    • हरिद्वार कुंभ मेला २०२१ समाचार; उत्तराखंड कोरोनावायरस के मामले | महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि दैनिक भास्कर

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    नई दिल्ली 34 मिनट पहले लेखक: संध्या द्विवेदी

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    कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि से फोन पर बात कर कुंभ मेले को प्रतीकात्मक तौर पर ही जारी रखने की अपील की। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। स्वामी अवधेशानंद गिरी ने इस बारे में दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि वे स्वयं तीसरे शाही स्नान में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होंगे। वे अपनी उपस्थिति भेजेंगे।

    अवधेशानंद गिरि ने यह भी कहा कि विनम्र व्यवहारिक रूप से खत्म हो गया है, लेकिन इसके तय समय तक प्रतीकात्मक रूप से धार्मिक आयोजन होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड से ज्यादा मामले कई अन्य राज्यों में आ रहे हैं। कुंभ को कोरोना के प्रसार के लिए दोषी मानना ​​उचित नहीं है। पेश कर रहे हैं बातचीत के मुख्य अंश – सवाल: , तो क्या गूंगा अब प्रतीकात्मक कर दिया जाएगा? एक बात सबसे पहले मैं स्पष्ट कर दूं कि कुंभ खत्म नहीं किया जा रहा है। वह अपने तय समय में ही खत्म होगा। मीडिया में कुछ भ्रामक समाचारें चल रहे हैं कि कुंभ समाप्त किया जा रहा है। प्रधानमंत्री जी ने सभी संतों का हाल पूछने के बाद कुंभ को प्रतीकात्मक रूप से चालू रखने की प्रार्थना की है। मैंने भी सभी अखाड़ों से और आम जनता से आह्वान किया है कि वे लोग कुंभ को प्रतीकात्मक रूप से ही जारी रखें।

    सवाल: क्या आपकी कुछ अखाड़ों से बातचीत शुरू हुई है? – उत्तर: हमारी आपस में बात होती रहती है। वैसे भी दो बड़े शाही स्नान हो चुके हैं। अंतिम शाही स्नान बैरागी अखाड़ों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए मैंने अपील की है कि बैरागी अखाड़ों के साधु स्नान करें। वे भी प्रतीकात्मक तौर पर कुछ प्रतिनिधियों को भेजते हुए यह शाही स्नान संपन्न करते हैं तो अच्छा होगा, लेकिन बाकी सभी अखाड़ों से मैंने प्रार्थना की है कि वे सख्ती के साथ अपने प्रतिनिधियों को ही स्नान के लिए भेज दें।

    जब तक सभी अखाड़े कुंभ को प्रतीकात्मक रूप से जारी रखने की घोषणा करेंगे। कर सकते हैं? देखिए, कुंभ मेले से ज्यादातर साधु सन्यासी जा चुके हैं। कुछ ही बचे हैं। इसलिए वैसे ही अब गूं में साधु-सन्यासियों की वजह से भीड़ नहीं है। मैंने आम लोगों से भी अपील की है कि गर्भवती महिलाओं, अस्वस्थ और बुजुर्गों से दूरी बनाएं। मैंने ऊपर भी कहा है कि कुंभ के पहले के दो स्नान ही साधु-संतों के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। यह अंतिम शाही स्नान बैरागी अखाड़ों के लिए महत्वपूर्ण होता है।

    शाही स्नान के दौरान साधु-संतों सहित लाखों लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई।] इसी दौरान दो हजार से ज्यादा लोग कोरोना से सावधान हो गए थे।

    सवाल: आप कह रहे हैं कि ज्यादातर साधु-सन्यासी मेले से जा चुके हैं। आपको ऐसा नहीं लगता कि प्रधानमंत्री जी को यह अपील पहले ही करनी चाहिए थी? ) उत्तर: दूसरे शाही स्नान के बाद से ही कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ा, आंकड़े बदल गए हैं। पहली बात उत्तराखंड से ज्यादा मामला महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, छत्तीसगढ़ और अन्य कई राज्यों में आ रहे हैं। इसलिए यह कहना कि कुंभ की वजह से कोरोना हुआ, गलत है। कोरोना का संक्रमण पूरे देश में है। विनयपूर्वक कह ​​रहा हूं कि उत्तराखंड में अभी स्थिति नियंत्रण में है, जबकि कई राज्यों में स्थिति बेहद खराब है। यहाँ प्रशासन और स्वयं साधु-संतों ने सभी जासूस उपाए अपनाए। प्रधानमंत्री जी साधु-सन्यासियों की बातें करते हैं। वे धार्मिक भावनाओं का भी भावनाओं करते हैं, लेकिन जब उन्होंने उस स्थिति को बहुत खराब कर दिया है तो उन्होंने बात की।

    सवाल: कई अखाड़ों ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि वे अभी तक खत्म नहीं होंगे, वे अंतिम शाही स्नान भी धूमधाम से करेंगे? शाही स्नान के दौरान साधु-संतों समेत लाखों लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई। इसी दौरान दो हजार से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हो गए थे। उत्तर:

    देखिए मैं सबका सम्मान करता हूं। धर्म महत्वपूर्ण है, आस्था भी महत्वपूर्ण है। लेकिन उससे भी ज्यादा मानव जाति की रक्षा महत्वपूर्ण है। मैं हाथ जोड़कर सबसे अपील कर रहा हूं। मुझे लगता है कि सभी साधु-संत इस बात को समझेंगे।

    क्या आप 27 अप्रैल को होने वाले अंतिम स्नान में जाएंगे? जवाब: नहीं, हमारी कुछ प्रतिनिधि जाएंगे। वे स्नान करेंगे। मैं व्यक्तिगत तौर पर स्नान के लिए नहीं जाऊंगा। प्रश्न:
    कुछ साधु-संतों का आरोप है कि चुनावी रैलियां चल रही हैं, तो फिर कुंभ पर लगाम क्यों? आपका चुनावी रैलियों को लेकर क्या कहना है? )
    पूरा देश महामारी की गिरफ्त में है। एक साल से ज्यादा समय हो गया है। पूर्ण लॉकडाउन भी हमारे यहाँ सबसे पहले और देर तक लगाया गया है। चुनावी रैलियों भी सीमित की जा सकती थीं। उसके बारे में राजनीतिक समूह कुछ सोच ही रहे होंगे। इस मामले में मेरा बोलना उचित नहीं।

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