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बॉलीवुड में रुक नहीं रही भाई-भतीजावाद की बहस

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उभरते अभिनेता कार्तिक आर्यन को करण जौहर ने अपनी फिल्म ‘दोस्ताना 2’ से गैरव्यावसायिक होने का आरोप लगाकर बाहर निकाला। जौहर के बाद कार्तिक शाहरुख खान की फिल्म ‘फ्रेडी’ से भी बाहर हो गए। इसके बाद फिल्मों में गुटबाजी और भाई-भतीजावाद को लेकर चली उस बहस ने फिर सिर उठा लिया, जो सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद शुरू हुई थी। हालांकि नए हों या पुराने, बॉलीवुड के हों या बाहर के समय-समय पर गुटबाजी का हर्जाना सभी कलाकारों को भरना पड़ा है।

फिल्म इंडस्ट्री में भाई-भतीजावाद के आरोप हमेशा से लगते रहे हैं।

आरती सक्सेना


कभी बॉलीवुड में संगीतकार और गायकों का दबदबा हुआ करता था। एक मशहूर गायिका पर तो आरोप लगाया जाता रहा कि उन्होंने नई गायिकाओं को आगे नहीं बढ़ने दिया। राज कपूर, दिलीप कुमार से लेकर अमिताभ बच्चन तक के लिए कौन गायक गाएगा यह तक तय होता था, जिसमें जल्दी कोई बदलाव स्वीकार नहीं था।

सुशांत का संघर्ष


प्रतिभाशाली कलाकारों का संघर्ष गुटबाजी से बढ़ जाता है। 2020 में तेजी से उभर रहे अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या कर ली, जिसकी वजह अभी तक सामने नहीं आई है। राजपूत की मौत के बाद फिल्म इंडस्ट्री में चलने वाले भाई-भतीजावाद को लेकर लंबे समय तक चर्चा चली। कहा गया कि एक के बाद एक फिल्म से बाहर होने के बाद राजपूत ने यह कदम उठाया। अब राजपूत की जगह नया नाम कार्तिक आर्यन का आ गया है। जिन्हें करण जौहर की ‘दोस्ताना 2’ के बाद शाहरुख खान की ‘फ्रेडी’ से बाहर निकलना पड़ा है। उन्हें अनप्रोफेशनल बताया जा रहा है। अनप्रोफेशनल कह कर कपिल शर्मा को भी यशराज फिल्मस की एक फिल्म से बाहर निकाल दिया गया था।

खूब चलती है गुटबाजी


फिल्म इंडस्ट्री के हर दौर में गुटबाजी चलती रही है। अचानक एक कलाकार को फिल्म से निकाल कर दूसरे कलाकार को ले लिया जाता है। तारीखों की समस्या इसका कारण बता दी जाती है। हो सकता है कि कभी यह कारण सच भी रहा हो। मगर कलाकार रातोरात बदलते रहे हैं। मसलन, राकेश शर्मा पर बनने वाली फिल्म में पहले आमिर खान काम कर रहे थे। बाद में उसमें शाहरुख खान आ गए। इसी तरह ‘भूत पुलिस’ में पहले सैफ अली खान के साथ अली फजल और फातिमा शेख थे जिनको हटा कर अब सैफ के साथ यामी गौतमी और अर्जुन कपूर को ले लिया गया। ‘सदमा’ की रीमेक में करीना कपूर की जगह आलिया भट्ट आ जाती हैं। आनंद एल राय अपनी नई फिल्म और राकेश ओमप्रकश मेहरा की ‘कबड्डी’ से ऋत्विक रोशन को हटा कर दोनों में शाहिद कपूर को साइन कर लिया जाता है।

कोई भी नहीं बचा गुटबाजी से


आज के लोकप्रिय और चोटी के कलाकार भी अपने शुरूआती दौर में गुटबाजी से नहीं बच पाए। अक्षय कुमार को भी शुरुआती दौर में इस दर्द से खूब गुजरना पड़ा। ‘इश्क विश्क’ के बाद जब शाहिद कपूर की तीन चार फिल्में नहीं चलीं तो अचानक उनके हाथ से 10-12 फिल्में एक झटके में निकल गर्इं थीं। सूरज बड़जात्या और विशाल भारद्वाज ने उन पर भरोसा जताया जिसके बाद शाहिद का कैरियर संभला था। कंगना रनौत भी इंडस्ट्री में भाई-भतीजावाद का शिकार हुई और इसके खिलाफ उन्होंने आवाज भी उठाई। कैटरीना कैफ को हिंदी बोलने में परेशानी के चलते ‘साया’ से निकलना पड़ा था। पंकज त्रिपाठी को ऋत्विक रोशन की ‘लक्ष्य’ में सिपाही की छोटी-सी भूमिका मिली थी और ऋत्विक के साथ उन्होंने लद्दाख में फिल्म की शूटिंग भी की थी। इसके बाद त्रिपाठी के गांव में उनकी खूब चर्चा हुई थी। जब त्रिपाठी अपने परिवार के साथ फिल्म देखने गए तो पता चला कि उनका पूरा रोल ही काट दिया गया है।

असुरक्षा की भावना


सितारों की लोकप्रियता को लेकर उनकी पत्नियों में असुरक्षा की भावना पैदा होना सामान्य बात होती है क्योंकि उनके पतियों को खूबसूरत हीरोइनों के साथ रोजाना काम करना पड़ता है। शाहरुख की पत्नी गौरी और अक्षय कुमार की पत्नी ट्विंकल की सहज असुरक्षा की भावना के कारण प्रियंका चोपड़ा चोपड़ा को इन सितारों की कई फिल्मों से बाहर होना पड़ा। बॉलीवुड में करिअर बिगड़ने लगा तो प्रियंका ने हॉलीवुड का रास्ता पकड़ा। रामगोपाल वर्मा की फिल्मों में उर्मिला मातोंडकर की खास जगह थी। एक पार्टी में रामू की पत्नी से झगड़ा होने के बाद उर्मिला को रामगोपाल वर्मा की फिल्मों से निकलना पड़ा।

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