POLITICS

बॉलीवुड की मुश्किल… क्या बनाए, कैसे बनाए

  1. Hindi News
  2. मनोरंजन
  3. बॉलीवुड की मुश्किल… क्या बनाए, कैसे बनाए

इन दिनों बॉलीवुड के सामने सवाल खड़ा है कि वह क्या बनाए और कैसे बनाए। वह जो भी बनाने जाता है उससे किसी न किसी का दिल दुखता है।

साजिद नाडियाडवाला

इन दिनों बॉलीवुड के सामने सवाल खड़ा है कि वह क्या बनाए और कैसे बनाए। वह जो भी बनाने जाता है उससे किसी न किसी का दिल दुखता है, किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचती है। तो इन दिनों बॉलीवुड भावनाओं को ठेस पहुंचाने के धंधे में लगा है। ताजा उदाहरण है साजिद नाडियाडवाला की फिल्म ‘सत्यनारायण की कथा’। इसके शीर्षक पर ही बवाल हो गया और बात थाना-कचहरी तक आ गई। साजिद नाडियाडवाला 30 सालों से फिल्में बना रहे हैं। जाहिर है उनके सामने फिल्म का नाम बदलने की स्थिति है।

‘जुल्म की हुकूमत’, ‘जुड़वां’, ‘कमबख्त इश्क’, ‘हे बेबी’, ‘हीरोपंती’, ‘कलंक’, ‘ढिशूम’, ‘मुझसे शादी करोगी’ जैसी फिल्में बनाने वाला कोई निर्माता अचानक एक लव स्टोरी फिल्म बनाने की तैयारी करता है और उसका नाम ‘सत्यनारायण की कथा’ रख देता है। किसी प्रेम कहानी का इस शीर्षक से कितना लेना-देना होगा, यह तो तीस सालों से फिल्में बना रहे निर्माता साजिद नाडियाडवाला ही जानते हैं। हालांकि बॉलीवुड के निर्माताओं का कोई भरोसा नहीं। वे प्रेम कहानियों को टायलट तक पहुंचा चुके हैं और ‘टायलट : एक प्रेम कथा’ बना चुके हैं। साजिद ने जैसे ही ‘सत्यनारायण की कथा’ की घोषणा की तो मध्य प्रदेश के गृह मंत्री ने कहा कि हम जांच करवाएंगे इस धार्मिक शीर्षक की। तो अब होना यही है कि साजिद कहेंगे कि भई इस प्रेम कहानी के शीर्षक को लेकर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है, इसलिए हम इसका शीर्षक बदल देते हैं।

बकौल गालिब ‘सुबह को पी ली शब को तौबा कर ली, रिंद के रिंद रहे हाथ से जन्नत न गई…’ इसका नुकसान तो कुछ हुआ नहीं फायदा यह कि अगर साजिद अपनी फिल्म की घोषणा का विज्ञापन अखबारों में देते तो ‘पर इंच पर कॉलम’ के हिसाब से लाखों रुपए फुंक जाते, सिर्फ यह बताने में की उनकी कंपनी नाडियाडवाला ग्रैंडसन कौनसी फिल्म बना रही है। सत्यनारायण भगवान की मेहरबानी से प्रचार का यह काम मुफ्त में हो गया।

इन्हीं साजिद नाडियाडवाला ने एक और फिल्म की घोषणा कर रखी है। अभी तक उसकी शूटिंग भी शुरू नहीं की और उसका शीर्षक घोषणा के बाद खुद ही बदल दिया है। यह शीर्षक था ‘कभी ईद कभी दीवाली’। इस फिल्म में उनके परम मित्र, परम हीरो सलमान खान काम करने वाले हैं। अब इस शुरू भी नहीं हुई फिल्म का शीर्षक है ‘भाईजान’।

लेकिन यह मामला सिर्फ साजिद नाडियाडवाला तक सीमित नहीं है। बीते कुछ समय से फिल्मों के शीर्षकों को लेकर विरोध के सुर खूब बढ़ रहे हैं। ‘राम-लीला’ का विरोध होता है और वह ‘गोलियों की रास लीला : राम-लीला’ बन जाती है। गोलियां और रास लीला जुड़ते ही विरोध थम जाता है।


‘पद््मावती’ शीर्षक को लेकर विरोध शुरू होता है और वह ‘पद्मावत’ बन जाती है। ‘पद््मावत’ के लेखक मलिक मुहम्मद जायसी रहे नहीं इसलिए ‘पद््मावत’ नाम का विरोध नहीं होता है। ‘लक्ष्मी बम’ नाम से सालों से दीपावली पर पटाखे खूब बिकते हैं मगर फिल्म नहीं बिक पाती। उसके नाम में से बम निकाल कर कोने में रखना पड़ता है। फिल्म ‘बिल्लू बार्बर’ नाम से शुरू होती है और रिलीज होते होते ‘बिल्लू’ रह जाती है।

Read More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
%d bloggers like this: