POLITICS

बस्तर के बेटे का शौर्य: नक्सली चारों ओर से गोलियां बरसा रहे थे, SIak सहयोगियों को बचाने में लगे हुए थे; केवल ब्लास्ट हुआ और वे शहीद हो गए

विज्ञापन से परेशान है? विज्ञापन के बिना खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

जांजगीर / बीजापुर ९ घंटे पहले

  • कॉपी नंबर
  • _

    यह फोटो बीजापुर की है। - Dainik Bhaskar

    यह फोटो बीजापुर की है।

    • बीजापुर के तर्रे में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच शनिवार को हुई मुठभेड़
    • 24 जवानों के शहीद होने की खबर, इनमें से एक SI और CRPF के इंस्पेक्टर भी शामिल

    बस्तर के बीजापुर में शनिवार को नक्सलियों ने CRPF और पुलिस के 700 जवानों को घेरकर हमला कर दिया। दिया हुआ। इनमें छत्तीसगढ़ पुलिस के सब इंस्पेक्टर दीपक और उनकी टीम भी शामिल थी। दीपक खुद की नाकाम अपने सहयोगियों के बिना फायरिंग से सुरक्षित निकालने में जुट गए। इसी दौरान उनके लगभग एक ब्लास्ट हुआ और वह शहीद हो गए।

    नक्सलियों के बड़े हमले की यह कहानी वहां मौजूद एक जवान ने दैनिक भास्कर को सुनाई । बताई है। उन्होंने बताया कि हम लोगों पर नक्सलियों ने अचानक हैवी फायरिंग शुरू कर दी। हमारे कुछ साथी घायल हो गए। हमने घायलों को बीच में रखा था और बाहर घेरा बनाकर नक्सलियों को गेंदों से जवाब देने लगे थे। दीपक साहब लगातार हैवी फायरिंग से हम सभी को हटा रहे थे। 4 से 5 जवानों की जान बचाते हुए वो आईईडी ब्लास्ट की चपेट में आ गए। इससे उनकी जान चली गई।

    सर्चिंग के दौरान कहीं भी फायरिंग और ब्लास्ट का खतरा रहता था, लेकिन दीपक साथियों के साथ मुस्कुराते दिखते थे।

    सर्चिंग के दौरान कहीं भी फायरिंग और ब्लास्ट का खतरा रहता था, लेकिन दीपक सहयोगियों के साथ मुस्कुराते दिखते थे।

    (

    ) 2013 में पुलिस में भर्ती हुईं थीं () हैवी फायरिंग और नक्सलियों से घिरे होने के बाद भी छत्तीसगढ़ पुलिस के सब इंस्पेक्टर दीपक का साहस उनके साथ रहा। वे गौरी से लड़ते हुए जवानों की मदद करते रहे। दीपक जांजगीर जिले के पिहरीद के रहने वाले थे। वह पहले भी नक्सलियों की मांद में घुसकर उनके खिलाफ कई ऑपरेशन कर चुके थे।

    6 सितंबर 1990 को जन्मेक ने 16 सितंबर 2013 को पुलिस फोर्स जौइन की थी। उनकी तैनाती बीजापुर में थी। वह नक्सलियों के जमावड़े के इनपुट पर तर्रेम के सकारात्मक इलाके में तलाश पर साथी जवानों के साथ निकले थे।

    दीपक जंगल के तौर-तरीकों में खुद को ढाल चुके थे। अपने साथियों को भी वह अक्सर मुश्किल हालात में पॉजिटिव रहने की सीख देते थे।

    दीपक जंगल के तौर-तरीकों में खुद को ढाल लिया गया है थे। अपने सहयोगियों को भी वह अक्सर मुश्किल हालात में पॉजिटिव रहने की सीख देते थे।

    पिता पुत्र को ढूंढते रहे, दूर गाँव में मिला शव कर रहे थे। फायरिंग के बाद युवा लौटे तो पता चला कि दीपक सहित कुछ साथी लापता हैं। दीपक के होमवालों को भी यह जानकारी दी गई। उनके पिता राधेलाल भारद्वाज और मां परमेश्वरी तुरंत बीजापुर के लिए रवाना हो गए। दोपहर तक दीपक का कुछ पता नहीं चला। बैकअप टीप तरम थाना क्षेत्र के जीवनागुड़ा इलाके में पहुंची तो दूर एक पेड़ के पास दीपक का शव मिला।

    होली से पहले फोन किया था, कहा था- अभी बहुत बिजी हूँ । आँखों से बहते आंसू एक पल के लिए भी नहीं थमे। मुठभेड़ में शामिल जवान उन्हें हौसला देते रहे, लेकिन वे भी जानते थे कि पिता का दर्द उनके दिलासे के आगे कुछ नहीं। काफी देर बाद दीपक के पिता राधेलाल ने जांजगीर के पुलिस अधिकारियों से बात की।

    उन्होंने फोन पर कहा कि होली के पहले बात हुई थी बेटे से। बोला था बहुत बिजी है अभी, इसलिए बात नहीं कर रहा है। मेरा बेटा बहुत अच्छा था सर, मैं तो बर्बाद हो गया। मेरा बेटा नहीं रहा। नक्सलियों ने उसे मार दिया। मुझे तो कुछ समझ नहीं रहा सर .. एकदम अंधेरा-अंधेरा लग रहा है, नहीं बात कर पाऊंगा सर ज्यादा आपको

    दीपक की शादी 2019 है। था। वह बास्केटबॉल बॉल के भी अच्छे खिलाड़ी थे।

      पढ़ाई में होशियार थे, मैदान में सबसे आगे

    दीपक के साथ मोर्चे पर तैनात जवानों ने बताया जंगल के मुश्किल हालात में रहने के बाद। भी हमने हमेशा दीपक को हंसते-मुस्कुराते देखा। कई बार सर्चिंग के दौरान मीलों पैदल चलने के दौरान दीपक गाने गाकर माहौल को हल्का कर देते थे।

    स्कूल के समय में वह होशियार स्टूडेंट है। रहा है। उन्होंने छठवीं से 12 वीं तक की पढ़ाई नवोदय विद्यालय मल्हार से की थी। उनके साथ पढ़े राहुल भारद्वाज ने बताया कि दीपक का फोकस खेल और सिंगिंग पर भी था। वह बास्केटबॉल बॉल के अच्छे खिलाड़ी थे। उन्होंने स्कूल स्तर पर नेशनल लेवल की प्रतियोगिता खेली थी। 2019 में दीपक की शादी हुई थी।

Back to top button
%d bloggers like this: