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बढ़ते कोरोना के बीच बड़ा दावा: लैंसेट जर्नल ने कहा

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बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच दुनिया के हेल्थ रिसर्च जर्नल लैंसेट ने बड़ा दावा किया है। जर्नल का कहना है कि कोरोनावायरस हवा के माध्यम से तेजी से फैलता है। एक रिसर्च स्टडी में इस बात के पुख्ता सबूत जर्नल को मिले हैं।

हवा से वायरस संचरण के लिए सबूत मिलने के बाद जर्नल ने कहा है कि विश्व स्वास्थ्य ऑर्गनाइजेशन और दूसरी स्वास्थ्य जांच वायरस प्रसारणमिशन की परिभाषा में तुरंत बदलाव करते हैं ताकि इसके फैलाव को रोका जा सके।

4 पॉइंट के आधार पर एक्सपर्ट ने दावा किया

१। सुपर स्प्रेडर इवेंट में मिले केस ) अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के 6 रिसर्चर्स ने कोरोना ट्रांसमिशन पर हुई रिसर्च की स्टडी की। स्टडी के बाद वायरस के हवा में संचरण के सबूत पाए गए। इन सबसे पहले एक सुपर स्प्रेडर इवेंट्स का जिक्र है। रिसर्चर्स ने कागिट चोयर इवेंट के बारे में बताया। एक ही सूत्र से 53 लोगों में वायरस फैल गया है। स्डडी में पता चला कि ये लोग एक-दूसरे के करीब नहीं गए और न मिले। एक ही सतह को बार-बार छुआ भी नहीं। यानी हवा से ही इन लोगों में वायरस फैला। २। इनडोर में अधिक स्थानांतरण रिसर्च में बताया गया है कि खुली जगहों की बजाय बंद स्थानों में संक्रमण ज्यादा तेजी से फैलता है। बंद स्थानों को हिसार बनाकर संक्रमण के फैलाव को तेजी से कम किया जा सकता है।

३। साइलेंट ट्रांसमिशन से सबसे अधिक वायरस

वायरस का साइलेंट ट्रांसमिशन उन लोगों से ज्यादा होता है, जिनमें सर्दी, खांसी के लक्षण नहीं पाए जाते हैं। 40% संचरण इसी तरह से हुआ। यही साइलेंट ट्रांसमिशन पूरी दुनिया में वायरस के फैलने की मुख्य वजह रही है। इस आधार पर ही वायरस के वायु से फैलने की थ्योरी साबित होती है।

४। ड्रॉपलेट्स से फैलाव के सबूत कम एक्सपर्ट ने कहा कि ड्रॉपलेट्स के जरिए वायरस के तेजी से फैलाव के बेहद कम सबूत मिले हैं। बड़े ड्रॉपलेट्स हवा में नहीं रहते हैं और ये गिरकर सतह को निष्क्रिय करते हैं। इससे हवा में वायरस के फैलाव के मजबूत सबूत मिले हैं।

नए दावे के मायने क्या हैं?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि हाथ धोना और सतह को साफ करना अभी भी बहुत जरूरी हैं, लेकिन सारा फोकस इसी पर नहीं होना चाहिए। जरूरत है कि हवा के जरिए वायरस ट्रांसमिशन के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाए जाएं। इसके अंडर वायरस को सांस में जाने से रोकने और इसे हवा में ही खत्म करने पर ध्यान देना चाहिए।

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