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फोन टैपिंग रेज में, एफआईआर दिल्ली में: केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत ने सीएम वेल्लोत के ओएसडी सहित पुलिस अफसरों पर केस दर्ज किया; दिल्ली क्राइम ब्रांच करेगी जांच

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रेज का फोन टैपिंग विवाद अब दिल्ली पहुंच गया है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज की है। इसमें जनप्रतिनिधियों के फोन टैप करने और उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया गया है। शेखावत ने एफआईआर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा सहित अज्ञात पुलिस अफसरों को आरोपी बनाया है। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने सतीश मलिक को जांच अधिकारी बनाया है। गेहलोत के मंत्री के बयान को आधार बनाया गया धारीवाल के बयान को बनाया गया है। धारीवाल ने कहा था कि ऑड मुख्यमंत्री के ओएसडी ने वायरल किए थे। गजेंद्र सिंह ने वायरल ऑड से अपनी रिटर्न को नुकसान पहुंचने और मानसिक शांति भंग करने के आरोप लगाए हैं। एफआईआर में लिखा गया है कि 17 जुलाई 2020 को देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूहों ने संजय जैन और कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा के बीच फोन पर हुई बातचीत के ऑड को प्रसारित किया। यह फोन टैपिंग बिना गृह विभाग की अनुमति के की गई। गृह विभाग के तत्कालीन एसीएस ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने फोन टैपिंग की अनुमति नहीं दी थी। इसका साफ अर्थ है कि गैर कानूनी तरीके से फोन टैप किए गए। ऑड में शेखावत की आवाज होने का दावा था सहित कांग्रेस के 19 विधायकों की बगावत के समय से ही फोन टैपिंग का विवाद चल रहा है। पायलट की बगावत और फिर उन्हें हटाने के बाद 15 जुलाई को तीन ऑड टैप गेहलोत खेमे की तरफ से जारी किए गए थे। उनमें गजेंद्र सिंह शेखावत और कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा के बीच विधायक खरीद फरोख्त की बातचीत का दावा था। एक टैप में विश्वेंद्र सिंह की बातचीत का दावा था। ये ऑड टैप की सत्यता और स्रोत को लेकर ही विवाद है। शेखावत ऑड टैप में खुद की आवाज होने से इनकार करते रहे हैं। उधर, कांग्रेस नेता शेखावत से वॉयस सैंपल देने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने विधानसभा में फोन टैपिंग की बात मनी थी पिछले दिनों विधानसभा में एक सवाल के जवाब में सरकार ने माना था कि वह राज्य स्तरीय मंजूरी थी। फोन टैप किए गए थे। इस मुद्दे पर विधानासा में भाजपा ने भारी हंगामा किया था। बाद में सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने विधानसभा में कहा था कि किसी भी मंत्री, विधायक या जनप्रतिनिधि का फोन टैप नहीं किया गया था। बंदूकें और विस्फोटकों की सूचना पर गृह सचिव की अनुमति लेने के बाद दो लोगों के फोन सर्विसेजलांस पर लिए गए थे। दो लोगों के फोन सर्विसेजलांस पर लेने पर ये सरकार गिराने, पैसे का लेन-देन करके विधायकों की खरीद-फरोख्त करने की बातें कर रहे थे।

धारीवाल ने कहा- मुख्यमंत्री के ओएसडी ने वायरल किया सम्मान
विधानसभा में सरकार की तरफ से फोन टैपिंग मामले में जवाब देते हुए मंत्री शांति धारीवाल ने यह माना था कि विधायक खरीद फरोख्त के अड़े मुख्यमंत्री के ओएसडी ने वायरल किए थे। धारीवाल ने कहा था- मुख्यमंत्री के ओएसडी के पास वॉट्सएप पर ऑड आए और उन्होंने उन्हें किसी वॉट्सएप ग्रुप पर भेज दिया, तो क्या गुनाह कर दिया? वह क्यों नहीं वायरल करेगा? ऑड का स्रोत फोन टैपिंग ही हो सकता है, इस पर ही विवाद आए दावे वाले ऑड कहां से आए? उनका स्रोत क्या था, यह शुरू से विवाद रहा है। इसी आधार पर सरकार पर फोन टैपिंग के आरोप लग रहे हैं। विधानसभा के बाहर और भीतर भाजपा ने कहा था कि सरकार ऑड के स्रोत बताएगी, बिना फोन टैपिंग के ऑड कहां से आए?

लोकसभा और राज्यसभा में भी उठा था मामला फोन टैपिंग का मुद्दा लोकसभा और राज्यसभा में भी उठा था। लोकसभा में चित्तौड़गढ़ के सांसद सीपी जोशी ने मूल्यांकन में जनप्रतिनियों के फोन टैप करने का मामला उठाया था। उस समय संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने लोकसभा में पूरे मामले को गृह मंत्रालय के पास प्रेषित किया और इसे अंजाम तक पहुंचाने का आश्वासन दिया था।

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