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पेरिस से जागी तोक्यो की उम्मीदेंं

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दीपिका कुमारी ने हाल ही में पेरिस में आयोजित तीरंदाजी विश्व कप के तीसरे चरण में तीन स्वर्ण पदक जीत कर देश का मान बढ़ाया है।

दीपिका कुमारी। फाइल फोटो।

मनीष कुमार जोशी

दीपिका कुमारी ने हाल ही में पेरिस में आयोजित तीरंदाजी विश्व कप के तीसरे चरण में तीन स्वर्ण पदक जीत कर देश का मान बढ़ाया है। उनकी इस कामयाबी पर पूरा देश झूम उठा। सभी लोगों ने उन्हें दिल खोलकर बधाइयां दी। प्रधानमंत्री से लेकर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने उन्हें इस कामयाबी पर बधाई दी। एक तीरंदाज की सफलता पर इतना उत्साह पहली बार देखा गया। दीपिका ने विश्व तीरंदाजी में व्यक्तिगत, टीम और मिश्रित स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीते। इस कामयाबी के साथ वे दुनिया की नंबर एक तीरंदाज बन गई है। साथ ही उनसे ओलंपिक पदक की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।

दीपिका इस सफलता के साथ उम्मीदों की रथ पर सवार हो गई हैं। तोक्यो ओलंपिक में अब भारतीय दीपिका से पदक की उम्मीद कर रहे हैं। पेरिस में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन पर दबाव भी बढ़ गया है। उन्होंने महिला व्यक्तिगत और मिश्रित स्पर्धा के लिए क्वालिफाई किया है। तीरंदाजी जैसे स्पर्धा में उम्मीदों के दबाव को संभालना उनकी प्राथमिकता होगी। इससे पहले वो जब 17 साल की थीं तो उसने लंदन ओलंपिक के लिए भी क्वालिफाई किया था। उस समय भी वो नंबर एक थीं। हालांकि दीपिका दबाव नहीं झेल पार्इं और पहले ही चरण में बाहर हो गर्इं। टीम स्पर्धा में भी अंतिम चार में ही स्थान बना पार्इं। इस बार उन्होंने दो स्पर्धाओं के लिए योग्यता हासिल की है।

महिला व्यक्तिगत में दीपिका के पेरिस के प्रदर्शन के बाद हौसले बुलंद हैं। मिश्रित में पति के साथ उनकी जोड़ी अच्छी है। पेरिस में भी पति अतनु दास के साथ मिलकर उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। ओलंपिक में सबसे बड़ा काम दीपिका के लिए करोड़ों उम्मीदों के बोझ को नियंत्रित करना होगा। ज्यादातर यह होता है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ी दबाव के कारण ही पदक जीत नहीं पाते। दीपिका लंदन के बाद रियो में भी पदक नही जीत पाई थीं। रियो ओलंपिक में वो क्वार्टर फाइनल में ही बाहर हो गर्इं जबकि ओलंपिक से पूर्व उनका प्रदर्शन बेहतरीन रहता है।

इस बार भी उनका प्रदर्शन बेहतरीन है और ओलंपिक के लिए उम्मीदें भी इसी कारण से है। हालांकि पिछले ओलंपिक से इस बार परिस्थितियां अलग हैं। दीपिका ने अपने खेल में सुधार किया है। उन्होंने हवा और ठंडे मौसम में तालमेल बैैठाने का हुनर सिखा है। पहले उनका औसत स्कोर नौ के आसपास रहता था जो अब 9.29 हो गया है। अब वो काफी परिपक्व नजर आती हैं।अब दबाव को वे समझने लगी हैं। वे जानती हैं कि दबाव को कैसे नियंत्रित करना है।

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