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पीएम मोदी बनाम नीतीश की राह पर बिहार

नई दिल्ली:

अमरीका की एक कंपनी है टेस्ला, इसके संस्थापक इलॉन मस्क ने आज अपना शेयर बेच कर 34 हज़ार करोड़ कमा लिए। दुनिया के लिए ये बड़ी ख़बरों में से एक है लेकिन इलॉन मस्क अगर बिहार आ जाएं तो शेयर क्या पूरी कंपनी ही बेच देंगे और किसी दल में शामिल होकर राजनीति करने लग जाएंगे। बिजली से चलने वाली कार का धंधा छोड़ कर लालटेन बेचने लग जाएंगे। उन्हें समझ नहीं आएगा कि पॉलिटिक्स में ऐसा क्या है जो पैसे में नहीं है। इलॉन मस्क को समझना पड़ेगा कि ऐसे समय में जब ऐलान हो गया हो कि विपक्ष खत्म हो गया है तभी सत्ता पक्ष से कोई निकल कर विपक्ष में आ जाता है और ऐलान कर देता है कि अब हम भी आ गए हैं विपक्ष में हैं, विपक्ष को मज़बूत करेंगे। नीतीश कुमार ने शपथ ग्रहण के बाद यह बयान दिया है।

“कुछ लोगों को लगता है कि विपक्ष ख़त्म हो गया है। अब हम भी आ गए हैं विपक्ष में। पुरज़ोर तरीक़े से विपक्ष के मज़बूती के लिए काम करेंगे”पुरज़ोर तरीके से विपक्ष के लिए काम करेंगे, इसका मतलब यह नहीं कि नीतीश प्रधानमंत्री पद की दावेदारी की बात कर रहे हैं,बल्कि साफ साफ कह रहे हैं कि 2014 वाले  2024 के आगे का अपना हिसाब खुद देख लें। बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। 



सवाल: सर 2024 में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार रहेंगे आप?


जवाब: हम किसी चीज के कोई उम्मीदवार की दावेदारी नहीं कर रहे। लेकिन इतना तो जरूर कर दीजिए कि 2014 में जो आए वह 2024 के आगे रह पाएंगे या नहीं रह पाएंगे? वह अपना समझें।



चैलेंज शुरू हो गया है। नीतीश जिन्हें रोकने की बात कर रहे हैं, प्रधानमंत्री मोदी ने अभी तक कोई बयान नहीं दिया है। शायद मोदी अपने बोलने के लिए समय का इंतज़ार कर रहे हैं।बिहार में राजनीतिक घमासान का मैदान तो अब तैयार हुआ है। जांच एजेंसियों के ख़तरे के नीचे बिहार के नेता हुंकार भरने लगे हैं और चुनौती देने लगे हैं। चिराग पासवान ने नीतीश कुमार को बधाई नहीं दी है मगर तेजस्वी यादव को बधाई दी है और कहा कि आपके नए सहयोगी यानी नीतीश कुमार से बिहार को निराशा ही प्राप्त हुई है। चिराग की पार्टी के सांसद लोजपा लेकर लेकर एनडीए में चले गए हैं। क्या चिराग की वापसी NDA में होगी और उनकी पार्टी वापस मिल जाएगी? बिहार में कुछ भी हो सकता है जब 288 सीटों वाले महाराष्ट्र में 36 विधायकों के गुट को मुख्यमंत्री पद मिल सकता है तो 243 सीटों वाले बिहार में कुछ भी हो सकता है। 


बिहार के राज्यपाल फागू चौहान ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के तौर पर आठवीं बार शपथ ली। तेजस्वी यादव ने दूसरी बार उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है।तेजस्वी ने नीतीश का चरण स्पर्श कर बीजेपी को जवाब दिया कि वे नीतीश का सम्मान करते हैं, इसके बाद दोनों कैबिनेट की बैठक में शामिल हुए और विधानसभा की तैयारियों पर चर्चा हुई। राजद को नया स्पीकर मिलने जा रहा है ताकि किसी के लिए राजद को तोड़ना आसान न हो। शपथ ग्रहण के बाद जिस तरह से नीतीश कुमार ने जवाब दिया है उससे यही लगता है कि नीतीश ने लड़ाई का मन बना लिया है, जांच एजेंसियों को लेकर सवाल हो रहे हैं कि जब उनका कहर टूटेगा तब नीतीश और तेजस्वी कैसे सामना करेंगे? 


2014 में जो आए वह 2024 के आगे रह पाएंगे या नहीं रह पाएंगे। हेडलाइन के लिए ठीक है मगर राजनीति हेडलाइन से नहीं होती है।नीतीश कुमार ने 2014 में भी नरेंद्र मोदी का विरोध किया था मगर तब तो नरेंद्र मोदी ने अपना समझ लिया था और उन्हें आने से कोई नहीं रोक सका। क्या इस बार की तैयारी कुछ अलग है कि 2024 की चुनौती दी जा रही है? बिहार की राजनीति 2024 के लिए नए सिरे से तैयार होने में जुट गई है। इस बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने वो कह दिया जिसे आरोप की शक्ल में कहा जा रहा था। उद्धव ठाकरे कह रहे थे कि शिवसेना को तोड़ने में बीजेपी का हाथ है। बीजेपी के नेता चंद्रकांत पाटिल कहा करते थे कि शिवसेना के संकट में उनका कोई रोल नहीं है लेकिन सुशील मोदी ने कह दिया कि शिवसेना को बीजेपी ने ही तोड़ा है।


हमने 9 अगस्त के प्राइम टाइम में कहा था कि क्या बीजेपी ने जदयू को तोड़ने का प्रयास किया है, इस सवाल का जवाब मिलेगा तो महाराष्ट्र से लेकर झारखंड तक का जवाब मिल जाएगा। मगर बिहार का जवाब आने से पहले ही सुशील मोदी ने महाराष्ट्र के प्रश्न का उत्तर दे दिया कि बीजेपी ने ही शिवसेना तोड़ी है। बिहार की राजनीति का यही असर है, यहां का झूठ कहीं और के सच में बदल जाता है।  

अब जब सुशील मोदी कह रहे हैं कि बीजेपी ने शिवसेना तोड़ी हैं तब यह भी बता दें कि चार्टर्ड प्लेन से मुंबई से सूरत, सूरत से गुवाहाटी और गुवाहाटी से गोवा ले जाने का इंतज़ाम किसने किया था? क्या विपक्ष का आरोप सही है कि ED और अन्य जांच एजेंसियों का डर दिखा कर शिवसेना के विधायकों को तोड़ा गया है? सुशील मोदी बता सकते हैं यह सब सही है या नहीं, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शिंदे के साथ कुछ ऐसे लोग भी गए जिनके बारे में कहा जाता है कि ED की उन पर नज़र थी। सुशील मोदी के इस बयान को फिर से सुन लीजिए। 

ऐसा लग रहा है कि बीजेपी जदयु को अब भी चैलेंज कर रही है, धोखे की बात उठाकर याद दिला रही है कि उसे धोखा देने वाली शिवसेना को कैसे तोड़ दिया। अगर नीतीश 2024 में बीजेपी को बाहर करने की चुनौती दे रहे हैं तो क्या बीजेपी उससे पहले इस सरकार को किसी और तरीके से गिरा देगी, बीजेपी अभी से ही तेजस्वी के जेल जाने की बात करने लगी है। 


“अब तो सीबीआई ने चार्जशीट फाइल कर दिया है तो आप के मंत्री मंडल में जो डिप्टी सीएम बनने जा रहे हैं वह चार्जशीटेड हैं भ्रष्टाचार के मामले में चार्जशीट ऐड है वह बेल पर है कल कोर्ट अगर कहे तो उनकी  बेल को खारिज कर सकती है। उनको दोबारा जेल भेज सकता है तो तेजस्वी यादव यह जो भ्रष्टाचार से जुड़े आईआरसीटीसी घोटाले मामले में यह चार्जशीटेड है यह बेलपन है उनका ट्रायल शुरू हो गया है और इतने पुख्ता सबूत है कि इस पायल का परिणाम उनकी सजा के रूप में भी हो सकता है” “हम ED और CBI से नहीं डरते हैं। 



9 अगस्त को जब नीतीश कुमार ने बीजेपी को सरकार से बाहर किया तब बीजेपी उतनी आक्रामक नज़र नहीं आई जितनी आज नज़र आ रही है। सुशील मोदी नीतीश पर हमला भी कर रहे हैं मगर उनके सम्मान की चिन्ता भी कर रहे हैं। राजद को भ्रष्ट भी बता रहे हैं और राजद को नीतीश से सावधान भी कर रहे हैं कि तेजस्वी के जेल जाने पर राजद को तोड़ कर नीतीश राज करेंगे। सुशील मोदी विपक्ष के तौर पर हमला कर रहे हैं या नीतीश औऱ तेजस्वी के सलाहकार के तौर पर, आप तभी जान पाएंगे जब बिहार बीजेपी की राजनीति और सुशील मोदी की स्थिति को जानते हों। सुशील मोदी कह रहे हैं कि राजद ने नीतीश को दो बार मुख्यमंत्री बनाया तो बीजेपी ने पांच बार बनाया. ऐसा लग रहा है कि बीजेपी इसी को लेकर कंपटीशन कर रही है कि उसने नीतीश कुमार को ज़्यादा बार मुख्यमंत्री बनाया। 



नीतीश कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री ही नहीं बनना चाहते थे बीजेपी कह रही है कि पांचवी बार बनाया। सवाल है कि जब 2020 में NDA को वोट नरेंद्र मोदी के नाम पर मिला था तब बीजेपी ने नीतीश कुमार को क्यों बनवाया? क्या बीजेपी नीतीश को सम्मान करने का गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाना चाहती थी? या कुछ और वास्तविकता थी? क्या बीजेपी को वोट केवल बीजेपी का मिला,उसमें नीतीश का एक भी वोट नहीं है? एक तरफ सुशील मोदी शिवसेना को तोड़ने का श्रेय ले रहे हैं तो दूसरी तरफ इससे इंकार कर रहे हैं कि बीजेपी सहयोगी दलों को तोड़ती है। ललन सिंह कह रहे हैं कि सुशील मोदी का दावा गलत है, अरुणाचल प्रदेश में जदयु के विधायक को तोड़ा गया। बीजेपी ने JDU के खिलाफ षडयंत्र रचा। 


इससे तो यही निकल कर आता है कि बीजेपी विरोधी दलों को तोड़ती है। सहयोगी दलों को नहीं तोड़ती है और अगर किसी नेता को अपनी पार्टी टूटने से बचाना है तो वह तुरंत विरोधी से बीजेपी की सहयोगी हो जाए। ग़ज़ब की थ्योरी निकल कर आ रही है। 



क्या लोक जनशक्ति पार्टी अपने आप टूट गई? खुद को मोदी का हनुमान बताने वाले चिराग अपने आप सड़क पर आ गए? और उनके पिता की बनाई पार्टी तोड़कर उनके चाचा पशुपति पारस मोदी सरकार में मंत्री अपने आप बन गए? 2020 में चिराग का अकेले लड़ना और नीतीश की सीटों का कम होना भी इस झगड़े के मूल में है। माना जाता है कि नीतीश के दबाव में चिराग NDA से बाहर किए गए और अब नीतीश ने बिहार से BJP को बाहर कर दिया। ललन सिंह का बयान बता रहा है कि हिसाब बराबर हुआ है।  केवल शिवसेना ही ऐसी निकली जिसे सुशील मोदी को तोड़ना पड़ा? इसे तोड़ने में किस किस ने मदद की, सुशील मोदी शायद अगली प्रेस कांफ्रेंस में बताएंगे। 



अब मैं बार बार डांस वाला वीडियो दिखा रहा हूं तो आप दर्शक प्राइम टाइम छोड़कर डिस्को मत चले जाइयेगा। शिव सेना को तोड़ने का दावा करने वाले सुशील मोदी कहते हैं कि बिहार में सरकार बनाने के लिए बीजेपी को 46 विधायक चाहिए,जदयू तोड़ कर भी मकसद पूरा नहीं होता, बशर्ते सारी पार्टी न मिल जाए। लेकिन महाराष्ट्र में तो बीजेपी ने शिवसेना के 36 विधायक तोड़ लिए। फिर उनके साथ 9 निर्दलीय विधायक भी आ गए। कुल संख्या 45 हो गई जब आप 45 तोड़ सकते हैं तो 46 भी तोड़ सकते थे। कहीं ऐसा तो नहीं कि तोड़ने से पहले ही नीतीश ने प्लान पकड़ लिया वर्ना नीतीश भी आज पटना में बैठे होते और उनके विधायक गोवा में नागीन डांस करते नज़र आते।मैं तेरी दुश्मन, दुश्मन तू मेरा, मैं नागीन, तू सपेरा, गा रहे होते।“बीजेपी के लोग अपनी गिरेंबां में झांके नीतीश नहीं बीजेपी विश्वासघाती है, अरुणालच में हमारे विधायक को तोड़ा, 2020 में BJP ने JDU के खिलाफ षडयंत्र रचा।”



बिहार में जब नीतीश ने बीजेपी को बाहर कर दिया तब गोदी मीडिया ने प्रोपेगैंडा चलाया कि अमित शाह ने किसी से बात नहीं की। अचानक से ऐसा प्रोपेगैंडा कैसे चलने लगता है, क्या यह दिखाने के लिए कि अमित शाह का कोई राजनीतिक प्रयास असफल नहीं होता है? अब ऐसी खबरें चलाने वाले क्या कहेंगे जब सुशील मोदी शिवसेना के तोड़ने की बात भी कबूल रहे हैं और अमित शाह के फोन की बात भी कबूल रहे हैं।मनीष कुमार ने बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद  से बात की है,मनीष पहले दिन से अड़े थे कि यह खबर सही है कि अमित शाह ने नीतीश से बात की थी।


राजनीति का कमाल देखिए। सुशील मोदी कहते हैं कि शिवसेना ने धोखा दिया तो शिवसेना तोड़ दी। लेकिन नीतीश पर धोखा देने का आरोप लगाकर बीजेपी बिहार में धरना प्रदर्शन क्यों कर रही है, तोड़ ही देती?



आज पटना में बीजेपी मुख्यालय में नीतीश के साथ दो दिन पहले तक मंत्री रहे तमाम विधायकों ने धरना दिया। नीतीश के खिलाफ नारे लगाते रहे। इस धरना प्रदर्शन में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, सांसद रामकृपाल यादव भी शामिल हुए। संजय जायसवाल ने कहा कि उन्होंने हमेशा सच बोलकर नीतीश कुमार को जानकारी  दी लेकिन नीतीश कुमार को सच सुनना पसंद नहीं। संजय जायसवाल ने कहा कि बिहार सरकार के घोटालों की जांच हो रही है। यह धरना प्रदर्शन इसलिए हुआ था क्योंकि बीजेपी मानती है कि नीतीश कुमार ने जनादेश का अपमान किया है। 


इसी तरह 30 जून से पहले शिवसेना अपनी पार्टी को बिखरता देख बीजेपी के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थी।बीजेपी ने देखते ही देखते लंबे समय तक सहयोगी रही बाला साहब ठाकरे की पार्टी को ध्वस्त कर दिया। उद्धव ठाकरे सरकार और पार्टी दोनों से बाहर हो गए। फिर उसी के हिस्से को समर्थन देकर सरकार बनवा दिया। धोखा देने का कमाल का बदला है कि जो पार्टी धोखा दे उस पार्टी को तोड़ कर उसके विधायक को मुख्यमंत्री बना दें, और 105 विधायक होते हुए पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस को उप मुख्यमंत्री बना दे, बदला लेना कोई बीजेपी से सीखे। 



राजनीति में नई नैतिकताओं के निर्माण का मौका मिला था लेकिन बीजेपी ने गंवा दिया। जब ज़रूरत नहीं थी तब भी विरोधी दलों की सरकारें तोड़ी गईं। गलत तरीकों का सहारा लिया गया।उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में इस तरह से राष्ट्रपति शासन लगाया गया कि अदालत को फैसला पलटना पड़ा और कहना पड़ा कि गलत हुआ है। राष्ट्रपति राजा नहीं होता है।


दुनिया कोरोना से जूझने की तैयारी कर रही थी, मध्यप्रदेश में कमलनाथ की कांग्रेस सरकार तोड़ी जा रही थी। क्या इन जगहों पर जनादेश का अपमान नहीं हुआ, मास्टर स्ट्रोक था? सिक्किम में पवन कुमार चामलिंग 25 साल से मुख्यमंत्री थे। उन्हें छोड़ कर पूरी पार्टी ही बीजेपी और SKM में चली गई। क्या ये सब आटोमेटिक रूप से हो जाता है? अपने आप स्कूटर पर बैठकर SDF के 13 में से 10  विधायक बीजेपी में चले जाते हैं, जहां चुनाव में बीजेपी को एक सीट नहीं मिली थी? बीजेपी दूसरे दल को तोड़ कर सरकार ही नहीं बनाती है बल्कि जहां वोट नहीं मिलता है वहां विपक्ष भी बन जाती है। 

बीजेपी के पास राजनीति की अलग किताब है। जिसके अनुसार नीतीश कुमार राजद को साथ छोड़ कर बीजेपी के साथ आ जाएं तो वह धोखा नहीं है, नीतीश जब बीजेपी को छोड़ कर राजद के पास चले जाएं तो वह धोखा है। सोशल मीडिया में मीम के ज़रिए मज़ाक उड़ रहा है कि नीतीश बीजेपी से अलग हो गए हैं तो ED,CBI IT के अधिकारी पटना धावा बोलेंगे और छापे का दौर शुरू होगा।आलोक पांडे ने इन आशंकाओं को लेकर राजनीतिक कार्यकर्ताओं से बात की कि वे इस मज़ाक को कितनी गंभरीता से लेते हैं

हमने शुरूआत बिजली कार बनाने वाली कंपनी के इलॉन मस्क से की थी कि मस्क बिहार आएंगे तो चकरा जाएंगे। इसी बात को थोड़ा और बढ़ाते हैं। यह समझने की बात तो है कि जो राज्य उद्योग में पिछड़ा है, जिसकी शिक्षा पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है,जिसकी राजधानी गंदे शहरों में शुमार होती है, उस राज्य में राजनीति को लेकर इतना नशा क्यों है? बिहार की जनता और नेताओं में कुछ नया और बड़ा करने का जज़्बा क्यों नहीं आता है जैसा राजनीति में दिखाई देता है। बिहार के नेताओं को आप बांध कर नहीं रख सकते, इलाके में उनका मज़ाक उड़ने लगता है। मैं अन्य जगहों से तुलना नहीं कर रहा लेकिन वहां नेता को टाइट दिखना ज़रूरी होता है और उसे कोई टाइट करेगा तो वह फाइट करने लग जाता है।


ऐसा नहीं है कि दूसरे राज्यों में राजनीति को लेकर ऐसा जुनून नहीं है,वहां भी गाड़ी, घोड़ा, पैसा चश्मा और कुर्ता चमकाने वाले कम नहीं मिलेंगे,इसके बाद भी बिहार की राजनीति का मिज़ाज हर बार सबसे अलग कतार में खड़ा नज़र आ जाता है।इसे ऐसे समझ सकते हैं कि बिहार का राजनीतिक कार्यकर्ता राजनीति के सैन्यीकरण के खिलाफ है। सैन्यीकरण का मतलब यह हुआ कि नेता और कार्यकर्ता को अनुशासन के नाम पर एक यूनिफार्म और एक कतार में खड़ा कर दें। जब सीटी बजी तो सावधान, जब सीटी बजी तो विश्राम। सामने नहीं तो पीठ पीछे अपने नेता को लेकर भी दो चार बातें बोल देना, नेता होने की पहचान हैआपको ध्यान होगा कि 2018-19 के आर्थिक सर्वे में 28 पन्नों में NUDGE थ्योरी की बात की गई थी।

अमरीका और पूरी दुनिया में यह थ्योरी पढ़ाई जाती है जिसका ऊपरी मतलब तो होता है कि हल्का हल्का धक्का देकर लोगों के व्यवहार को बदलना लेकिन अंदरूनी मतलब होता है कि नमक चटाकर थाली छीन लेना। सकारात्मक बदलाव की यह थ्योरी ज़ोर शोर से लागू की जा रही है ताकि सरकारों के हुक्म पर जनता भेड़ चाल चलने ललगे। और उन्हें जैसा हांका जाए, उस तरफ मुड़ जाएं। बिहार की राजनीति में ये NUDGE theory नहीं चल पाती है।आप किसी भी नेता को ज़्यादा धक्का देंग तो आपको धक्का दे देगा। यह आदत बीजेपी से लेकर हर दल के कार्यकर्तां और नेता में देखी जा सकती है। एक दल, एक नेता, एक बात, एक आदेश की राजनीति का फार्मूला सफल भी रहा है लेकिन बिहार में बार-बार बीजेपी का यह फार्मूला क्यों फेल हो जाता है? यहां के लोग जब देखते हैं कि सामने वाला नेता और कार्यकर्ता अपने बड़े नेता की फोटोकॉपी बनकर घूम रहा है तो उसका मज़ाक उड़ाने लग जाते हैं। मजबूर कर देते हैं कि वह बैठक छोड़ कर चला जाए या झगड़ा कर ले।



यह केवल राजनीति में नहीं हो रहा, आपके चारों तरफ हर दिन हो रहा है।आप देखिए कि बात-बात में देशभक्ति के नाम पर लोगों के व्यवहार को कैसे नियंत्रित किया जा रहा है। कभी गंगा की सफाई को देशभक्ति से जोड़ कर शपथ दिलाई जाएगी तो कभी तिरंगा फहराने के नाम पर देशभक्ति का इम्तहान लिया जाएगा। हरियाणा में सरकार ने गरीब लोगों के लिए आदेश क्यों निकाला है कि जो भी राशन लेने आएगा उसे झंडा खरीदना होगा तभी राशन मिलेगा? 


इस देश में अनगिनत जगहों पर लोग तिरंगा फहराते हैं लेकिन किसी को पहले झंडा खरीदो तब मुफ्त अनाज मिलेगा, इसकी कोई ज़रूरत नहीं थी।भीमाकोरेगांव केस से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज वरवरा राव को स्थायी तौर पर मेडिकल बेल दे दी है। कोर्ट ने कहा है, वरवरा राव 82 साल के हैं और ढाई साल तक हिरासत में रहे हैं। स्टेन स्वामी की भी हालत बहुत खराब थी,उन्हें ज़मानत नहीं मिली और जेल में ही मर गए। NIA 82 साल के वरवरा राव की ज़मानत का विरोध कर रही थी। 

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