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नेपाल में संसद और प्रांतीय विधानसभाओं के चुनाव में 61 फीसदी मतदान

नेपाल में संसद और प्रांतीय विधानसभाओं के चुनाव में 61 फीसदी मतदान

नेपाल की संसद (प्रतीकात्मक फोटो).

काठमांडू:

नेपाल में रविवार को नई संसद और प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों के चुनाव में लगभग 61 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. चुनाव संबंधी घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. सूत्रों ने बताया कि कई मतदान केंद्रों पर छिटपुट हिंसा और झड़पों के कारण मतदान प्रक्रिया बाधित हुई जबकि एक घटना में 24 वर्षीय युवक की मौत हो गई. देशभर में 22,000 से अधिक मतदान केंद्रों पर स्थानीय समयानुसार सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ, जो शाम पांच बजे संपन्न हुआ.

मुख्य चुनाव आयुक्त दिनेश कुमार थपलियाल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘देशभर में करीब 61 फीसदी मतदान हुआ है. यह आंकड़ा थोड़ा बढ़ने की संभावना है क्योंकि हमें देश भर के जिलों से विवरण प्राप्त होना जारी है.” उन्होंने कहा, ‘‘यह निश्चित रूप से हमारी अपेक्षा से कम है.” थपलियाल ने कहा कि काठमांडू घाटी के तीन जिलों में आज रात से ही मतगणना शुरू हो जाएगी और एक सप्ताह के भीतर मतगणना समाप्त हो जाएगी.

नेपाल में संघीय संसद की 275 सीटों और सात प्रांतीय विधानसभाओं की 550 सीटों के लिए चुनाव हुए. संघीय संसद के कुल 275 सदस्यों में से 165 का चयन प्रत्यक्ष मतदान के जरिए होगा, जबकि बाकी 110 को ‘आनुपातिक चुनाव प्रणाली’ के माध्यम से चुना जाएगा. इसी तरह, प्रांतीय विधानसभाओं के कुल 550 सदस्यों में से 330 का चयन प्रत्यक्ष, जबकि 220 का चयन आनुपातिक प्रणाली से होगा.

हिंसा की छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा. अधिकारियों ने बताया कि बजौरा के त्रिबेनी नगर पालिका के नटेश्वरी विद्यालय में बने मतदान केंद्र पर एक व्यक्ति की मौत हो गई. उन्होंने बताया कि मतदान खत्म होने के बाद हुए विवाद में 24 वर्षीय युवक को पुलिस की गोली लगी, जिससे उसकी मौत हो गई.

नेपाल में मतदाता उस राजनीतिक अस्थिरता को समाप्त करने की उम्मीद में मतदान कर रहे हैं, जो एक दशक से अधिक समय से देश के लिए चिंता का कारण बनी हुई है और जिसने विकास को बाधित किया है.

अधिकारियों ने बताया कि कैलाली जिले के धनगढ़ी उप-महानगरीय शहर में शारदा माध्यमिक विद्यालय मतदान केंद्र के पास एक मामूली विस्फोट हुआ. इस दौरान कोई हताहत नहीं हुआ. उन्होंने बताया कि विस्फोट के कारण मतदान केंद्र में आधे घंटे के व्यवधान के बाद मतदान फिर शुरू हो गया. धनगढ़ी, गोरखा और दोलखा जिलों के 11 इलाकों से विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक होने की कुछ घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन इनका मतदान पर कोई असर नहीं पड़ा.

इस बीच, देश के प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा ने अपने गृह जिले दादेलधुरा में मतदान किया. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्ससिस्ट लेनिनिस्ट) के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने काठमांडू के पास भक्तपुर जिले की सूर्यबिनायक नगर पालिका स्थित मतदान केंद्र पर वोट डाला. सीपीएन-माओइस्ट सेंटर के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने चितवन जिले की भरतपुर नगर पालिका स्थित मतदान केंद्र पर वोट डाला.

इस बीच, 113 वर्षीय गोपी माया पोखरेल अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर देश में मतदान करने वाली सबसे उम्रदराज व्यक्ति बन गईं. पोखरेल ने काठमांडू से 220 किलोमीटर पश्चिम में स्थित तनहुं जिले में मतदान किया. अधिकारियों ने बताया कि पोखरेल के नागरिकता प्रमाण पत्र के अनुसार उनकी जन्मतिथि 22 जून, 1909 है. उन्होंने तनहुं जिले में भानु नगरपालिका के सेपाबगैचा स्थित महादेबता प्राथमिक विद्यालय स्थित मतदान केंद्र में अपना वोट डाला. इसी तरह, 107 वर्षीय जसमणि कामी ने मयागढ़ी जिले के राष्ट्रीय माध्यमिक विद्यालय के एक मतदान केंद्र पर वोट डाला.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश कुमार थपलियाल ने बताया कि मतगणना कड़ी सुरक्षा के बीच रविवार रात से शुरू होगी. थपलियाल ने भक्तपुर में एक मतदान केंद्र पर मतदान करने के बाद कहा कि मतदान संपन्न होने के बाद सभी मत पेटियां शाम सात बजे तक मतगणना केंद्रों पर एकत्र की जाएंगी. नेपाली मीडिया ने उनके हवाले से कहा, ‘‘इसके बाद हम करीब एक घंटे तक सभी दलों के साथ बैठक करेंगे और हमें रात में मतगणना शुरू होने की उम्मीद है.”

थपलियाल ने कहा कि आयोग अगले आठ दिन में चुनाव के सभी नतीजों की घोषणा कर देगा, जबकि आनुपातिक प्रतिनिधित्व चुनाव प्रणाली के नतीजों की घोषणा आठ दिसंबर तक होगी.

चुनावों पर करीबी नजर रखने वाले राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने त्रिशंकु संसद और एक ऐसी सरकार के गठन का अनुमान जताया है, जो नेपाल में आवश्यक राजनीतिक स्थिरता प्रदान नहीं कर पाएगी. नेपाल में करीब एक दशक तक रहे माओवादी उग्रवाद की समाप्ति के बाद से संसद में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है और 2006 में गृह युद्ध के खत्म होने के बाद से कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है.

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