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नताशा सूरी ने कराई एग फ्रीजिंग:मिस वर्ल्ड डायना हेडन बनीं 2 बार मां; 40-50% बढ़ी एग-स्पर्म फ्रीजिंग, FB-गूगल कर रहीं प्रमोट

नई दिल्लीएक घंटा पहलेलेखक: ऐश्वर्या शर्मा

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बच्चा यानी खुशी। हमारी सोसायटी में औलाद का सुख सबसे ऊपर है। नन्हे कोमल मुलायम हाथों का स्पर्श मम्मी-पापा की आंखों में खुशी की चमक भर देता है। घर में गूंजती बच्चे की किलकारियां माहौल को खुशनुमा बनाए रखती हैं।

लेकिन कपल्स में इनफर्टिलिटी की दिक्कत बढ़ी है, यह भी एक बड़ा सच है। भारत में 3 करोड़ से अधिक कपल्स इनफर्टिलिटी से जूझ रहे हैं। इनमें 65% की उम्र 35 साल से भी कम है। डॉक्टर्स का मानना है कि 30 की उम्र से पहले ही महिला को मां बन जाना चाहिए। लेकिन पढ़ाई और करियर के चलते लड़कियों का शादी को टालना अब आम बात हो गई है।

मम्मी या पापा बनने की खुशी छिन न जाए, ऐसे में अनमैरिड लड़कियां अपने एग, लड़के अपने स्पर्म और कपल्स एम्ब्रोयो फ्रीज करा रहे हैं। दुनिया भर में पिछले तीन साल में यह चलन 40 से 50% तक बढ़ा है।

इस तकनीक ने शादी और पेरेंट बनने की जल्दबाजी से कई युवाओं और युवा जोड़ों को मुक्ति दी है। एक्टर, सुपरमॉडल और मिस वर्ल्ड इंडिया रह चुकीं नताशा सूरी ने हाल ही में अपने एग्स की फ्रीजिंग का खुलासा किया।

भारत में एग फ्रीजिंग के मामलों में 25% की बढ़त

भारतीय समाज में जल्द शादी और बच्चे का प्रेशर हमेशा से बनाया जाता है। लड़की शादी न करे तो उसके किरदार पर सवाल उठ जाते हैं। भले ही वह करियर में आगे बढ़ने की चाहत रखती हो या पढ़ना चाहती हो। ऐसे में एग फ्रीजिंग का चलन लड़कियों में बढ़ा है।

2021 में भारत के फर्टिलिटी क्लिनिक्स के सर्वे में पाया गया कि साल 2020 में एग फ्रीजिंग के मामलों में 25% की बढ़त हुई है। दिल्ली के एक IVF सेंटर के अनुसार कोविड से पहले महीने में औसतन 2 महिलाएं एग फ्रीजिंग के लिए आती थीं। अब 7-8 आ जाती हैं। बेंगलुरु में आईटी प्रोफेशन से जुड़ी कई लड़कियां ऐसा करवा रही हैं। पिछले 5 साल में एग फ्रीजिंग की जानकारी लेने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है। साल में 15-20 महिलाएं एग फ्रीजिंग करवा रही हैं।

इटली के पादरी ने देखा था स्पर्म पर बर्फ का असर

अगर आपको लगता है कि IVF की तकनीक के बारे में 21वीं सदी में ये सब सोचा जा रहा है तो आप गलत हैं। इस दिशा में सोचने की शुरुआत आज से 345 साल पहले ही हो चुकी थी।

इटली के पादरी लाजारो स्पैलनजानी ने 1776 में पहली बार स्पर्म का बर्फ से कनेक्शन जाना। पादरी लाजारो जीव वैज्ञानिक भी थे। उनको अपनी रिसर्च में पता चला कि कम तापमान की वजह से स्पर्म की मूवमेंट रुक जाती है। तापमान के बढ़ने और गर्म होने पर उसमें हरकत होने लगती है। यह स्पर्म फ्रीजिंग की तरफ बढ़ने का विज्ञान का पहला कदम था।

450 साल पहले माइक्रोस्कोप के जरिए देखी गई थी मूवमेंट

इटली के पादरी से भी करीब 100 साल पहले 1677 में वैन लीउवेनहोएक नाम के एक डच वैज्ञानिक ने स्पर्म के सेल को माइक्रोस्कोप के जरिए देखा था। 1938-1945 के बीच कई वैज्ञानिकों ने इस विषय पर रिसर्च की और पाया कि स्पर्म फ्रीज होने के बावजूद जीवित रह सकते हैं।

शुरुआत में जानवरों पर खूब एक्सपेरिमेंट हुए लेकिन पहली बार 1953 में फ्रीज किए गए स्पर्म से और 1986 में फ्रीज किए गए एग से प्रेग्नेंसी प्लान की गई। यहां से जिंदगी में उदासी की वजह बनने वाली इनफर्टिलिटी की समस्या पर जीत हासिल करने की कोशिश शुरू हुई।

चलिए, अब टाइम मशीन की लैब से निकलकर ग्लैमर की दुनिया में कदम बढ़ाते हैं और अतीत में हुए प्रयोगों की सफलता को वर्तमान के आइने में देखते हैं।

नताशा ने कहा- अब मैं जब चाहूं, मां बन सकती हूं

एक्टर नताशा सूरी ने कहा है कि वर्किंग महिलाओं के लिए यह सुविधा बहुत राहत देने वाली है। वह एग फ्रीजिंग के जरिए अपनी सुविधा और समयानुसार भविष्य में कभी भी मां बनने का सोच सकती हैं।

नताशा की तरह ही बॉलीवुड से जुड़ीं कई हस्तियां ऐसा कर चुकी हैं। आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्‌ढा’ में दिखीं एक्ट्रेस मोना सिंह, राखी सावंत और एकता कपूर भी अपने एग फ्रीज करा चुकी हैं।

केवल महिलाएं ही नहीं पुरुष भी अपने स्पर्म फ्रीज कराते हैं। आजकल यह ट्रेंड जोर पकड़ रहा है। खासतौर पर सेना और विदेश में जॉब करने वाले पुरुषों के बीच इसका चलन बढ़ा है।

एग फ्रीजिंग की मदद से मिस वर्ल्ड डायना हेडन 2 बार बनीं मां

1997 में मिस वर्ल्ड बनीं डायना हेडन 2 बार मां बनीं। साल 2016 में इन्हें बेटी हुई और 2018 में उन्होंने जुड़वा बच्चों- एक लड़के और एक लड़की को जन्म दिया। यह खुशी उन्हें अपने ही फ्रीज किए हुए एग से मिली। इस बारे में उन्होंने एक इंटव्यू में कहा था कि इस सुविधा ने उन्हें उम्र की दीवारों को तोड़ते हुए मां बनने की आजादी दी।

टीवी एक्ट्रेस किश्वर मर्चेंट भी इस तकनीक की मदद से 40 साल की उम्र में प्रेग्नेंट हुईं। 2021 में उन्होंने बेटे को जन्म दिया। दरअसल उन्होंने काफी पहले ही एग फ्रीज करा लिए थे। ऐसा उन्होंने अपनी मां की सलाह पर किया था।

आइए, अब आपको बताते हैं कि कैसे एग और स्पर्म को फ्रीज करके कोई अपने मन चाहे समय पर पेरेंट बन सकता है।

महिलाओं को IVF प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है

नोएडा स्थित जीवा क्लिनिक में आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉक्टर श्वेता गोस्वामी ने बताया कि स्पर्म और एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया में बहुत फर्क होता है। एग फ्रीजिंग को मैच्योर ऑकिटे क्रायोप्रिजर्वेशन (mature oocyte cryopreservation) भी कहा जाता है। महिलाओं को एग फ्रीजिंग के लिए IVF की ही प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

एग फ्रीजिंग के लिए लेने पड़ते हैं 12 से 13 इंजेक्शन

असल में, ओवरी के अंदर छोटे-छोटे अविकसित एग होते हैं। उन्हें इंजेक्शन देकर विकसित किया जाता है। एग फ्रीजिंग के लिए 12-13 इंजेक्शन दिए जाते हैं। जब एग पूरी तरह विकसित हो जाएं तो महिला के एग सर्जरी से निकाले जाते हैं। इसका खर्चा 2 लाख रुपए तक होता है।

यह भी बताते चलें कि हर महिला की ओवरीज एक सीमा तक ही एग बनाती हैं। उनके शरीर में 2 ओवरी होती हैं और दोनों में 15-15 एग स्टोर होते हैं जो अविकसित होते हैं। पीरियड्स के बाद 1 एग मैच्योर होता है और वही रिलीज होता है।

हर सेकेंड 1500 शुक्राणु बनते हैं, चुने जाते हैं सबसे हेल्दी स्पर्म

क्या आपने फिल्म ‘विक्की डोनर’ देखी है? अगर आपने यह फिल्म देखी है तो आपने हीरो के बच्चों की भीड़ भी देखी होगी। अक्षय कुमार की फिल्म ‘गुड न्यूज’ का सब्जेक्ट भी मिलता जुलता-सा है।

भविष्य में ‘गुड न्यूज’ पाने की चाह में पुरुष अपने सीमन का सैंपल दे देते हैं। इससे उनके स्पर्म आसानी से फ्रीज हो जाते हैं। एक हेल्दी पुरुष के शरीर में हर सेकंड में 1500 शुक्राणु यानी स्पर्म बनते हैं। एक इजैक्यूलेशन में अनुमानित 280 मिलियन शुक्राणु निकलते हैं। जब इनकी संख्या 10 मिलियन से कम हो तो पुरुषों की रिप्रोडक्टिव हेल्थ कमजोर मानी जाती है।

अगर स्पर्म की संख्या 40 मिलियन से 300 मिलियन के बीच हो तो पुरुषों को सामान्य कैटिगरी में रखा जाता है। स्पर्म फ्रीज कराने से पहले कुछ ब्लड टेस्ट कराए जाते हैं। इसके बाद ही स्पर्म काउंट किया जाता है।

स्पर्म को मेडिकल सॉल्यूशन के साथ मिक्स किया जाता और 10 मिनट के बाद 3 हिस्सों में बांटकर संरक्षित कर दिया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि अगर एक सैंपल फेल हो जाए तो बाकी 2 सैंपल ऑप्शन के तौर पर मौजूद रहें यानी ‘फ्यूचर डैडी का सेफ्टी सॉल्यूशन’।

25 साल तक सुरक्षित रहते हैं एग और स्पर्म

एग और स्पर्म को लिक्विड नाइट्रोजन में स्टोर किया जाता है। सैंपल को -196 डिग्री तापमान पर रखा जाता है। इस टेंपरेचर में एग और स्पर्म उसी तरह रहते हैं जिस तरह से शरीर में रहते हैं।

वैसे तो यह 25 साल तक सलामत रह सकते हैं लेकिन सरकारी नियमों के अनुसार इन्हें 10 साल तक फ्रीज किया जा सकता है।

आइए अब ये भी जान लेते हैं कि वैज्ञानिकों और डॉक्टरों को क्यों सूझी एग फ्रीजिंग की बात…

कैंसर पीड़िताओं के लिए शुरू हुई थी एग फ्रीजिंग की सुविधा

  • 1949 में ब्रिटेन के सर एलन स्टर्लिंग पार्केस ने पहली बार सीमन को चोट से बचाने के लिए उसे फ्रीज किया। यह सीमन उन्होंने ग्लिसरीन में सुरक्षित रखा था।
  • अमेरिका के प्रोफेसर जेरोम कलमन शर्मन को ‘फादर ऑफ स्पर्म बैंकिक’ कहा जाता है।
  • 1953 में जेरोम ने स्पर्म फ्रीजिंग की प्रक्रिया को और डेवलप किया। इसी साल पहली बार फ्रीज किए गए स्पर्म से एक महिला गर्भवती हुई।
  • 1986 में पहली बार कोई महिला अपने फ्रीज किए हुए एग प्रेग्नेंट हुई। इसका श्रेय सिंगापुर के डॉक्टर क्रिस्टोफर चेन को जाता है।
  • एग फ्रीजिंग प्रक्रिया शुरू करने का मकसद कैंसर पीड़ित महिलाओं की मदद करना था।
  • ऐसी महिलाएं इलाज से पहले एग फ्रीजिंग करा सकती थीं ताकि बाद में उनका मां बनने का सपना पूरा हो सके।

गंभीर बीमारी में स्पर्म फ्रीज कराते हैं अधिकतर पुरुष

अधिकतर पुरुष स्पर्म फ्रीज तभी कराते हैं जब उन्हें कोई गंभीर बीमारी होती है। जैसे कैंसर या किडनी की दिक्कत। कुछ बीमारियों के इलाज के दौरान स्पर्म की क्वॉलिटी खराब होने का डर बना रहता है।

ऐसा ही एक मामला साल 2021 में सामने आया। कनाडा में रहने वाली महिला ने गुजरात हाईकोर्ट से पति के स्पर्म इकट्‌ठा करने की गुहार लगाई थी। इसके लिए अदालत ने उन्हें मंजूरी दी। दरअसल महिला के ससुर को हार्ट अटैक आया था। वह पति के साथ भारत आ गईं। उनके 32 साल के पति को कोरोना हुआ और उनकी हालत नाजुक हो गई। ऐसे में महिला ने पति का स्पर्म कलेक्ट करने की याचिका दायर की थी ताकि वह भविष्य में मां बन सके।

अब अनमैरिड लड़कियां भी करवा रहीं एग फ्रीजिंग

अक्सर एक लड़की पर शादी और उसके बाद मां बनने का प्रेशर बनाया जाता है। उम्र 30 के पार हो जाए तो लोग कई तरह की बातें बनाने लगते हैं। सबको लगता है उम्र निकल गई तो न शादी हो पाएगी और न ही बच्चा। डॉ. श्वेता गोस्वामी के अनुसार आज की पढ़ी-लिखी अनमैरिड लड़कियां करियर में आगे बढ़ने की चाहत में ऐसा करा रही हैं।

वे नहीं चाहतीं कि इस बीच वह शादी के बंधन में बंधे। इसलिए सिंगल लड़कियां बड़ी तादाद में IVF सेंटर में एग फ्रीजिंग करा रही हैं ताकि देर से शादी करने पर भी मां बनने की टेंशन नहीं रहे। इसके अलावा किसी गंभीर बीमारी या सर्जरी की वजह से भी महिलाएं ऐसा कदम उठा रही हैं।

ऐसा नहीं है कि ये चलन हमारे देश में ही देखने को मिल रहा है। हाल ही में अमेरिका में एक विज्ञापन खूब वायरल हुआ…

अमेरिका में एग फ्रीजिंग का विज्ञापन हुआ वायरल

अमेरिका में एग फ्रीजिंग को लेकर कई विज्ञापन पॉपुलर हो रहे हैं। हाल ही में एक विज्ञापन सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। इसमें दोस्तों के साथ एग फ्रीजिंग के लिए डिस्काउंट दिए गए।

3 दोस्तों पर 30% और 2 दोस्तों पर 25% डिस्काउंट देने की बात की गई। यही नहीं अमेरिका के एक IVF सेंटर के विज्ञापन की टैग लाइन ही है ‘स्मार्ट वुमन फ्रीज’।

और अब केवल एग या स्पर्म की नहीं एम्ब्रेयो भी फ्रीज करवाने का ट्रेंड बढ़ा है…

कपल्स भी आते हैं एम्ब्रोयो फ्रीज करवाने

ग्रेटर नोएडा के ‘द ब्लिस आईवीएफ एंड गायनी केयर’ की IVF एक्सपर्ट डॉ. सोनाली गुप्ता ने बताया कि एग और स्पर्म फ्रीजिंग के अलावा एम्ब्रोयो यानी भ्रूण को भी फ्रीज किया जाता है।

एम्ब्रोयो फ्रीज शादीशुदा जोड़े ही कराते हैं। कई कपल अपनी शादी और करियर को एंजॉय करने के लिए जल्दी पेरेंट्स बनना नहीं चाहते। ऐसे में वे एम्ब्रोयो को फ्रीज करा लेते हैं। हस्बैंड के स्पर्म से वाइफ के एग को फर्टिलाइज किया जाता है। एम्ब्रोयो को भी लिक्विड नाइट्रोजन में स्टोर किया जाता है। महिलाओं को 10 से 14 दिन तक इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि उनके एग मैच्योर हो जाएं। आमतौर पर 10-15 हेल्दी एग मिल जाते हैं।

एम्ब्रोयो फ्रीजिंग का सक्सेस रेट बेहतर

डॉ. श्वेता गोस्वामी ने बताया कि फ्रीज एम्ब्रोयो से हेल्दी बेबी ही जन्म लेता है। हमारे क्लिनिक में 10 में से 8 महिलाएं एम्ब्रोयो फ्रीज से मां बनती हैं और उनके बच्चे स्वस्थ पैदा हुए। 80% कपल एम्ब्रोयो फ्रीजिंग को चुनते हैं और अब तब के रिजल्ट काफी अच्छे रहे हैं। इसलिए इस प्रोसेस से अब डरने जैसी कोई बात नहीं है।

लेकिन विज्ञान के सामने अभी कुछ चुनौतियां और आगे की रिसर्च बाकी है कि कैसे इससे जुड़ी आशंकाओं को दूर किया जाए…

बच्चे बन सकते हैं हाई ब्लड प्रेशर के मरीज

फर्टिसिटी फर्टिलिटी क्लीनिक के एक सर्वे में फ्रोजन एग 95% जीवित रहते हैं। इनका फर्टिलिटी रेट 85.3% और प्रेग्नेंसी रेट 68.75% पाया गया।

2013 में अमेरिका की मैरीलैंड मेडिकल सेंटर यूनिर्विटी के प्रोफेसर की रिसर्च में पाया गया कि इस तकनीक से होने वाले बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर या दिल से जुड़ी बीमारी होने की संभावना ज्यादा रहती है।

वहीं, फ्रोजन एम्ब्रोयो से प्रेग्नेंसी हो तो बच्चे में मैक्रोसोमिया देखा जा सकता है यानी बच्चे का साइज सामान्य साइज से ज्यादा होता है। 4000 से 4500 ग्राम से ज्यादा वजन हो तो बच्चे को मैक्रोसोमिया का शिकार माना जाता है।

फैमिली हिस्ट्री जानने से लेकर हेल्थ चेकअप तक जरूरी बातें

जब कोई एग या स्पर्म फ्रीज कराने की बात शुरू करता है तो सबसे पहले उनकी उम्र, फैमिली हेल्थ हिस्ट्री, सिंगल है या शादीशुदा, बच्चे हैं या नहीं। यह तमाम जानकारी ली जाती है।

इसके बाद महिलाओं का अल्ट्रासाउंड, पुरुषों का सीमन एनेलाइजिस, ब्लड टेस्ट, हीमोग्लोबिन, डायबीटिज, HIV, हेपेटाइटिस और थैलेसिमिया का टेस्ट किए जाते हैं।

बीपी-डायबिटीज में एग-स्पर्म फ्रीजिंग नहीं, कैंसर के लिए छूट

डॉ. सोनाली गुप्ता के मुताबिक अगर पहले से किसी को डायबीटिज, ब्लड प्रेशर, थाइरॉयड या कोई जेनेटिक बीमारी हो तो उनका स्पर्म और एग हेल्दी नहीं होते। इससे बच्चा भी हेल्दी नहीं होगा। इसीलिए फ्रीजिंग से पहले टेस्ट किए जाते हैं।

लेकिन अगर किसी को कैंसर या कोई बड़ी बीमारी हो तो इमरजेंसी में एग या स्पर्म फ्रीज किए जा सकते हैं।

35 साल से पहले एग फ्रीज कराना मदरहुड के लिए अच्छा

2016 में ब्रिटेन की ‘ह्यूमन फर्टिलाइजेशन एंड एंम्ब्रोयोलॉजी अथॉरिटी’ ने अपनी रिसर्च में पाया कि जो महिलाएं अगर 35 साल से पहले 5 एग फ्रीज कराती हैं तो उनके 18% मां बनने की संभावना होती है।

वहीं, अगर महिला की उम्र 35 साल से ऊपर है और इसके बाद वह एग को फ्रीज कराने का सोचती हैं तो यह संभावना 7% तक सीमित हो जाती है।

मिलिट्री अस्पतालों में सैनिकों के लिए स्पर्म फ्रीजिंग मुफ्त

दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि पिछले कुछ साल में सैनिकों में स्पर्म फ्रीजिंग का ट्रेंड बढ़ा है। ऐसे सैनिकों की संख्या 3 गुना बढ़ी है। मिलिट्री अस्पतालों में जवानों को स्पर्म फ्रीजिंग की सुविधा मुफ्त है। दरअसल बॉर्डर की सुरक्षा में तैनात जवानों की जिंदगी खतरों से भरी रहती है। सैनिकों को छुट्‌टी भी कम मिलती है।

राजस्थान में शेखावटी क्षेत्र के सैनिकों में यह चलन ज्यादा देखने को मिला। जयपुर के एक फर्टिलिटी सेंटर के संचालक ने बताया कि शेखावाटी क्षेत्र सीकर, चुरू, झुंझुनू जिलों में तीन साल पहले जहां 5-10 सैनिक फ्रीजिंग करवाते थे। अब यह आंकड़ा 30 के पार पहुंच गया है।

स्पर्म और एग फ्रीजिंग करने पर एक यूनीक हेल्थ आईडेंटिफिकेशन नंबर दिया जाता है। यह नंबर बताता है कि सैंपल किस व्यक्ति का है।

स्पर्म और एग फ्रीजिंग करने पर एक यूनीक हेल्थ आईडेंटिफिकेशन नंबर दिया जाता है। यह नंबर बताता है कि सैंपल किस व्यक्ति का है।

हमारे यहां भले ही यह ट्रेंड नया है, लेकिन विदेशी कंपनियां अपने कर्मचारियों को एग और स्पर्म फ्रीजिंग को अलग-अलग तरीके से बढ़ावा दे रही हैं….

विदेशी कंपनियां महिला कर्मचारियों को देती है सुविधा

विदेशों में कुछ कंपनियां महिला कर्मचारियों को एग फ्रीज कराने की सुविधा देती हैं। यह सुविधा इसलिए दी गई ताकि कर्मचारी फैमिली शुरू करने के चक्कर में अपने काम से न भटकें और खूब मेहनत भी करें। अभी तक यह सुविधा उन महिलाओं को दी जा रही है जो ऊंची पोस्ट पर हैं।

ऐपल और फेसबुक ने एग फ्रीजिंग के लिए 20 हजार डॉलर का फंड दिया

2014 में ऐपल और फेसबुक ने अपनी महिला कर्मचारियों के लिए एग फ्रीजिंग के लिए 20,000 डॉलर का फंड दिया। वहीं, स्नैपचैट और स्पॉटिफाई ने 80 हजार डॉलर का फंड सेरोगेसी के लिए रखा ताकि महिला करियर और काम की तरफ ध्यान दे सकें।

यही नहीं जिस तरह महिलाओं को मैटरनिटी लीव दी जाती है, उसी तरह जापान और जर्मनी में सरकार ने IVF ट्रीटमेंट के लिए पेड लीव शुरू की। भारत में एसेंचर इंडिया और वी-वर्क कंपनी ने महिलाओं को यह सुविधा मुहैया कराई है।

विदेशों में 3 साल में करीब 40% से 50% बढ़ा एग फ्रीजिंग का चलन

अमेरिका में हुई एक रिसर्च के मुताबिक कोविड के दौरान 39% महिलाओं ने अपने एग फ्रीज कराए। वहीं, ब्रिटेन में 50% महिलाओं ने ऐसा किया। 2021 की रिसर्च में पाया गया कि जिन महिलाओं ने एग फ्रीज कराए, वे अनमैरिड थीं और उनकी उम्र 36 से 40 साल के बीच थी। एग फ्रीजिंग के पीछे की वजह करियर और उच्च शिक्षा बताई गई।

IVF फेल होने से डिप्रेशन की शिकार होती हैं महिलाएं

‘जर्नल फर्टिलिटी एंड स्टेरिलिटी’ में एक स्टडी छपी। इसमें ये बताया गया जिन महिलाओं को असफल IVF से गुजरना पड़ा उनमें एंग्जाइटी और डिप्रेशन देखा गया। इस प्रोसेस के फेल होने पर 60% महिलाएं एंग्जाइटी का शिकार हुईं जबकि 44% को डिप्रेशन ने घेरा।

कुछ सवाल, शक और शंकाओं के बावजूद यह तकनीक उन युवाओं का सपना साकार कर रही है जो सोचते हैं कि जब भी बच्चा हो लेकिन मेरा ही खून हो। इसलिए सभी स्मार्ट युवाओं को जो इस तर्ज पर पेरेंटहुड प्लान करना चाहते हैं, उनको गुड लक।

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