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नए भारत की सशक्त आधारशिला

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नई शिक्षा नीति से गुणवत्ता, पहुंच, जवाबदेही, सामर्थ्य और समानता का आधार स्थापित हुआ है।

जनसत्ता

Updated: July 30, 2021 6:57 AM

सांकेतिक फोटो।

रमेश पोखरियाल निशंक

इसका पूरा श्रेय उन सभी हितधारकों को जाता है, जिन्होंने अपनी चिंताओं, अपेक्षाओं, सुझावों से न सिर्फ हमें अवगत कराया, बल्कि आगे बढ़ने का मार्ग भी प्रशस्त किया। विदेशों से मिले सुझावों ने इस नीति को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सफलतापूर्वक मुकाबला करने और आगे बढ़ने की राह दिखाई।

आज से एक साल पहले भारत सरकार ने केंद्रीय शिक्षा नीति की घोषणा की, तो न केवल भारत, बल्कि विदेश में भी इसका ऐतिहासिक, परिवर्तनकारी, नवाचारयुक्त नीति के रूप में स्वागत किया गया। हार्वर्ड, कैंब्रिज, मिशिगन समेत विश्व की सौ से अधिक शीर्ष संस्थाओं ने नीति की दूरदर्शिता, लचीलेपन, व्यावहारिकता, वैज्ञानिकता, शोधपरकता की सराहना की। तब कैंब्रिज के कुलपति ने उत्सुकतावश पूछा था कि इस शिक्षा नीति में क्या नया है। तब उन्हें बताया था कि इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि इस नीति के निर्माण में मुक्त नवाचार के अंतर्गत विश्व के सबसे बड़े परामर्श से रिकार्ड सुझाव लिए गए। सुनिश्चित किया गया कि देश के सभी क्षेत्रों से हितधारकों के सुझाव लिए जाएं। हमारा प्रयास था कि नई शिक्षा नीति हम सबकी आकांक्षाओं और अपेक्षाओं पर खरी उतरे। हम इस बात से भलीभांति अवगत थे कि इस नीति से हमें नव-भारत निर्माण की आधारशिला रखनी है। यह सुनिश्चित करने का प्रयास हुआ कि इस नीति के माध्यम से देश के अंतिम छोर पर बच्चों के हितों की रक्षा की जा सके।

किसी भी संगठन, प्रतिष्ठान या सरकार के लिए हितधारकों के साथ सार्थक परामर्श उस वक्त अधिक प्रासंगिक हो जाता है जब किसी नीति का निर्माण हो रहा हो। एक ऐसी नीति, जिस पर संपूर्ण विश्व की अठारह प्रतिशत से अधिक जनसंख्या का भविष्य निर्भर हो। विश्व पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन इस बात से कर सकते हैं कि हम विश्व के सबसे अधिक युवा जनसंख्या वाले देशों में शुमार हैं। पैंसठ प्रतिशत से ज्यादा युवा पैंतीस साल से कम आयु के हैं। आने वाले समय में ये युवा न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व के विकास की इबारत लिखेंगे। नीति निर्माण के समय से ही हम इस बात पर एकमत थे कि व्यवस्थित, तार्किक और व्यावहारिक नीति, उसका बेहतर नियोजन, आरंभिक बिंदु से लेकर निगरानी और मूल्यांकन के माध्यम से उद्देश्यों की पहचान करना है, चाहे सफल क्रियान्वयन का विषय हो- यह सब सार्थक हितधारक जुड़ाव से संपन्न होगा।

इस संवाद से जहां क्षमता सुधार में सफलता मिली, वहीं उनका परामर्श हमारे लिए एक उपयोगी ‘चेक-शीट’ बन कर उभरा। वैसे भी जनतंत्र में हितधारकों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करना जिम्मेदारी से सरकार चलाने का अभिन्न अंग है। नई शिक्षा नीति एक ऐसे समय में आई, जब विश्व कोविड महामारी की चुनौती झेल रहा था। इसके चलते भारत समेत दुनिया भर में स्कूल बंद हो गए। वैश्विक स्तर पर 1.2 अरब से अधिक बच्चे कक्षा से बाहर रहे। इसका परिणाम यह निकला कि ई-लर्निंग के विशिष्ट उदय के साथ, शिक्षा में नाटकीय रूप से बदलाव आया है, जिससे डिजिटल मंच शिक्षण के महत्त्वपूर्ण आधार बन गए। यह अत्यंत संतोष का विषय रहा कि हमने चुनौतियों को अवसरों में बदलने का संकल्प लिया और तैंतीस करोड़ विद्यार्थियों की शिक्षा को निर्बाध रूप से चलाने में सफलता पाई।

नई शिक्षा नीति से हम विद्यार्थियों, अध्यापकों, शोधार्थियों, शिक्षित नेतृत्व की सोच में व्यापक बदलाव लाना चाहते हैं। बुनियादी ढांचे के दृष्टिकोण से, हर जिले में उच्च शिक्षा संस्थानों के माध्यम से जिला स्तर पर आत्मनिर्भरता और ‘क्लस्टरिंग’ दृष्टिकोण, डिजिटल शिक्षा के साथ मिल कर अंतर को भर देगा। विज्ञान, गणित, कला क्लबों की स्थापना अधिक जिज्ञासा पैदा करने और एक व्यक्ति को आजीवन सीखने वाले में बदलने का तरीका है। नेशनल रिसर्च फाउंडेशन, रिसर्च आउटपुट को एक नए स्तर पर ले जाएगा। संस्थानों के शासन में पूर्व छात्रों की भूमिका शिक्षा प्रणाली को समग्र रूप से प्रभावित करेगी।


अच्छी बात यह रही कि नीति के माध्यम से संपूर्ण शैक्षिक वातावरण बदलने के लिए पूरा देश प्रतिबद्ध दिखा। इसी संकल्प का परिणाम था कि हम नीति में समकालीन विषयों जैसे- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाइन थिंकिग, होलिस्टिक हेल्थ, आॅर्गेनिक लिविंग, इमोशनल हेल्थ, एनवायर्नमेंटल एजुकेशन, ग्लोबल सिटिजनशिप एजुकेशन, सर्वांगीण विकास आदि को शामिल कर पाए। ‘निपुण’- पढ़ने में प्रवीणता, समझ और संख्यात्मक ज्ञान विकसित करने के लिए राष्ट्रीय पहल के माध्यम से हम अपने बच्चों को मजबूत आधार देने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रगति कार्ड के माध्यम से हम व्यापक कौशल, संज्ञानात्मक स्नेह, सामाजिक-भावनात्मक और साइकोमीटर डोमेन पर दशा केंद्रित कर पाएंगे। पुरानी रटने की परिपाटी छोड़ कर अब की-बोर्ड परीक्षा मुख्य रूप से अर्जित दक्षता का परीक्षण करेगी। चाहे 10+2 संरचना का प्रतिस्थापन 5+3+3+4 से हो, स्कूली शिक्षा सुधार के साथ रट कर सीखने की परिपाटी दूर करने का विषय हो, गतिविधि-आधारित, प्रायोगिक शिक्षा, कंप्यूटेशनल सोच, बहु-विषयक और महत्त्वपूर्ण सोच-आधारित सीखने की बात हो, पारंपरिक भारतीय मूल्यों को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने की बात हो, इस नीति के माध्यम से हमारा लक्ष्य आत्मविश्वासी बच्चों का विकास करना है, जो अपनी जड़ों, संस्कृति और पारंपरिक प्रथाओं का भरपूर ज्ञान के माध्यम से अपना सर्वांगीण विकास सुनिश्चित कर सकेंगे।

पहली बार कौशल वृद्धि और क्षमता निर्माण के मामले में विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। जब आप एक बार कौशल सीख लेते हैं तो यह संपूर्ण जीवन में सहायक होता है। योग्यता मूल्यांकन शिक्षा को और अधिक सार्थक बना कर और मौजूदा सैद्धांतिक शिक्षा डिजाइन में परिवर्तन के कारण बीच में स्कूल छोड़ने का मुद्दा संबोधित हो सकेगा। दो साल के डिप्लोमा, एक लंबे डिग्री कोर्स और एक अकादमिक क्रेडिट बैंक तथा क्रेडिट स्कोर के साथ ‘मूक्स’ (बड़े पैमाने पर ओपन आॅनलाइन पाठ्यक्रम) के संबंध में नए उपाय किए गए हैं। निजी और सार्वजनिक संस्थानों के मूल्यांकन के लिए समान बेंचमार्क सुनिश्चित करके हम सबको समान अवसर देकर शैक्षिक संस्थानों से बेहतर परिणामों के लिए तत्पर हैं। चाहे शिक्षक भर्ती प्रक्रिया हो, कार्यकाल ट्रैक और प्रतिभाशाली लोगों को शिक्षा की ओर आकर्षित करने के लिए उपलब्ध प्रशासनिक पदों में परिवर्तन, मौलिक परिवर्तन हैं। ये सारे कदम गुणवत्तापरक और नवाचारयुक्त शिक्षा को बढ़ावा देने में मददगार साबित होंगे। विश्व पटल पर रैंकिंग के क्षेत्र में भी हमारा ग्राफ निरंतर बढ़ता रहे, इसलिए वैश्विक स्तर पर नेटवर्क स्थापित किए जा रहे हैं।

नई शिक्षा नीति से गुणवत्ता, पहुंच, जवाबदेही, सामर्थ्य और समानता का आधार स्थापित हुआ है। इसका पूरा श्रेय उन सभी हितधारकों को जाता है, जिन्होंने अपनी चिंताओं, अपेक्षाओं, सुझावों से न सिर्फ हमें अवगत कराया, बल्कि आगे बढ़ने का मार्ग भी प्रशस्त किया। विदेशों से मिले सुझावों ने इस नीति को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सफलतापूर्वक मुकाबला करने और आगे बढ़ने की राह दिखाई। कुल मिलाकर नीति समावेशी, भागीदारी और समग्र दृष्टिकोण से परिपूर्ण है, जो विशेषज्ञ राय, क्षेत्र के अनुभव, अनुभवजन्य अनुसंधान, हितधारक प्रतिक्रिया, साथ ही सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखे गए पाठों को ध्यान में रख कर सृजित की गई है। एनईपी के प्रत्येक पहलू के लिए कार्यान्वयन योजनाओं को विकसित करने के लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर संबंधित मंत्रालयों के सदस्यों के साथ विषयवार समितियों, राज्य शिक्षा विभाग, स्कूल बोर्ड, एनसीईआरटी, केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी सहित कई निकायों द्वारा बेहतर समन्वय से हम अपने लक्ष्यों की तरफ तेजी से अग्रसर हैं।

एनईपी देश के शिक्षा क्षेत्र को संपूर्ण विश्व के लिए पूरी तरह से खोल देगा। भारत में शीर्ष विदेशी विश्वविद्यालयों के परिसरों के खुलने से भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों के बीच अनुसंधान सहयोग और छात्र विनिमय कार्यक्रमों को बढ़ावा मिल सकेगा। एनईपी भारत को एक वैश्विक शिक्षा के आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित करेगा, साथ ही दुनिया को शांतिपूर्ण, सहिष्णु, रहने योग्य और अधिक मानवीय बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति नए भारत के निर्माण की दिशा में एक बड़ी छलांग है।


(लेखक पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री हैं)

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