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दो मीडिया चैनलों पर भड़के केरल गवर्नर बोले

गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान ने दोनों मीडिया संस्थानों पर आरोप लगाते हुए उन्हें बाहर जाने के लिए कहा, कहा यह दोनों चैनल यहां रहेंगे तो मैं चला जाऊंगा।

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने 7 नवंबर को कोच्चि में अपनी एक  प्रेस मीट से दो मलयालम चैनलों को निकाल जाने का आदेश दिया और कहा कि मैं आपसे बात नहीं करना चाहता हूँ।

जानकारी के मुताबिक  राज्यपाल ने कैराली न्यूज और मीडिया वन चैनलों के पत्रकारों को पत्रकार वार्ता के दौरान अपनी  जगह छोड़ने के लिए कहा और चिल्लाते हुए कहा कि  वह इन दो चैनलों से बात नहीं करेंगे।  

राज्यपाल ने क्या कहा ? 

आरिफ़ मोहम्म्द खान इन दिनों केरल की सरकार से आरोप-प्रत्यारोप के बीच लगातार चर्चा में बने हुए हैं। अपनी प्रेस वार्ता से दो पत्रकारों को निकल जाने का आदेश देने के बाद उन्होने कहा

मैंने मीडिया को बहुत महत्वपूर्ण माना है। मैंने हमेशा मीडिया को जवाब दिया है लेकिन अब मैं खुद को उन लोगों के लिए मनाने में सक्षम नहीं हूं जो मीडिया के रूप में हैं लेकिन वे मीडिया नहीं हैं, वे मीडिया के रूप में मुखौटा कर रहे हैं लेकिन मूल रूप से राजनीतिक व्यक्ति हैं। उन्होने आगे कहा कि यह लोग एक पार्टी के सदस्य हैं इसलिए यदि इन चैनलों में से कोई भी प्रेस मीटिंग में भाग ले रहा है तो कृपया चले जाओ। अगर यहां  कैराली और मीडिया वन के संवाददाता हैं तो मैं चला जाऊंगा। मैं इन लोगों से बात नहीं करूंगा। 

राजभवन ने इन दोनों चैनलों सहित चार मलयालम चैनलों को 24 अक्टूबर को राज्यपाल की एक प्रेस बैठक में भाग लेने से रोक दिया था। 

माकपा और कांग्रेस ने बताया फासीवादी तरीका 

इस घटना के बाद सत्तारूढ़ माकपा और विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने आरिफ मोहम्मद खान की आलोचना की है और कार्रवाई को “फासीवादी” करार दिया है। 

विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीसन ने कहा कि प्रेस के एक वर्ग को छोड़कर, खान लोगों तक जानकारी तक पहुंचने से रोक रहे थे। उन्होंने एक बयान में कहा, मीडिया को बाहर करना फासीवादी शासन की एक शैली है। यह न केवल लोकतंत्र के लिए खतरा है बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता का भी उल्लंघन है। सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने भी राज्यपाल को “तानाशाह” करार देते हुए कुछ मीडिया समूहों को प्रतिबंधित करने की आलोचना की है।

कैराली न्यूज सत्तारूढ़ माकपा का चैनल है। इसके अलावा चैनल मीडिया वन को सुरक्षा मंजूरी के मुद्दों पर केंद्र सरकार से प्रतिबंध का सामना करना पड़ा था।

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