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देश का पहला एनकाउंटर: जानें किसके बंदूक से निकली गोली, किसके सीने में जा लगी

देश का पहला एनकाउंटर मुम्बई पुलिस ने अंडरवर्ल्ड डॉन मान्या सुर्वे का किया था। मान्या सुर्वे का एनकाउंटर 1982 में तब हुआ था जब वो 37 साल का था।

2017 में जब यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तो पुलिस ने क्राइम कंट्रोल के लिए एनकाउंटर का सहारा लेना शुरू कर दिया। इससे पहले देश में मुम्बई से अंडरवर्ल्ड के खात्मे के लिए एनकाउंटर को प्रमुख रणनीति के तौर पर उपयोग में लाया गया था।

अब तो रोज पुलिस एनकाउंटर की खबरें पढ़ने-देखने को मिल जाती थी, लेकिन क्या आप जानते हैं आजादी के बाद देश का पहला एनकाउंटर कौन सा था और किसने, किसके सीने में गोली मारी थी… आइए आज हम आपको बताते हैं उस डॉन के बारे में जिसका एनकाउंटर इस देश का पहला एनकाउंटर था।

देश का पहला एनकाउंटर का श्रेय मुम्बई पुलिस के हिस्से है। यह एनकाउंटर हुआ था अंडरवर्ल्ड डॉन मान्या सुर्वे का। मान्या सुर्वे का एनकाउंटर 1982 में जब हुआ था, तब उसकी उम्र थी 37 साल। इस पर अभिनेता जॉन अब्राहम एक फिल्म (शूटआउट एट वडाला) भी बना चुके हैं।

कौन था मान्या सुर्वे

मान्या सुर्वे का असली नाम मनोहर अर्जुन सुर्वे था। मुम्बई में पैदा होने वाला मनोहर अर्जुन सुर्वे ने यहीं से पढ़ाई की और मुम्बई से ही वो अपराध की दुनिया में भी प्रवेश किया। मनोहर अर्जुन सुर्वे को दोस्त मान्या सुर्वे कहते थे और यही नाम पुलिस की डायरी से लेकर अपराध की दुनिया में दर्ज हो गया।

कहा जाता है कि मान्या को अपराध की दुनिया में उसका सौतेला भाई भार्गव दादा लेकर आया था। दोनों ने 1969 में किसी का मर्डर किया था और पकड़ा गया। आजीवन कारावास सजा हुई, मान्या को मुम्बई के बजाय पुणे के यरवदा जेल भेज दिया गया। जेल में रहकर मान्या सुधरा नहीं और वहीं प्रतिद्वंदी डॉन सुहास भटकर के लोगों को पीटने लगा। जेल में मान्या का आंतक जब बढ़ने लगा तो उसे रत्नागिरी जेल भेज दिया गया।

रत्नागिरी जेल जाने के बाद मान्या सुर्वे नाराज हो गया और वहां भूख हड़ताल पर बैठ गया। जिसकी वजह से वो बीमार हो गया और उसे इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। इसी अस्पताल से मान्या ने पुलिस को चकमा दिया और फरार हो गया।

इसके बाद मान्या मुम्बई आया और अपने दोस्तों के साथ मिलकर खुद का गैंग बना लिया। मान्या एक के बाद एक वारदात को अंजाम देते गया। मान्या का दाऊद के भाई के मर्डर में भी हाथ था। मान्या को लेकर जब मुम्बई पुलिस की आलोचना होने लगी तो उसने इस गैंग पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया।

किसने किया एनकाउंटर

मान्या सुर्वे का केस मुम्बई पुलिस के एनकाउंटर स्क्वॉड को सौंप दिया गया। जहां इस केस की कमान मिली राजा तांबट और इशाक बागवान नाम के पुलिस अधिकारी को। मान्या लगातार इनके हाथ से बचता रहा, फिर 11 जनवरी 1982 को जब मान्या अपनी गर्लफ्रेंड को लेने वडाला आया तो पुलिस के हाथ चढ़ गया। पुलिस के बचने के लिए मान्या ने गोली चलाई और जवाबी कार्रवाई में मारा गया। इस तरह से पुलिस की डायरी और देश के इतिहास में ये एनकाउंटर पहला एनकाउंटर कहलाया।

आजादी के बाद आज जैसी एनकाउंटर रणनीति नहीं थी। पुलिस एनकाउंटर से दूर ही रहती थी। उसका जोर अपराधियों को जीवित गिरफ्तार करने पर ज्यादा रहता था। इसके बाद जैसे-जैसे देश में क्राइम बढ़ा, पुलिस की परेशानियां भी बढ़ने लगी। अंडरवर्ल्ड की दुनिया के बाद से क्राइम पर कंट्रोल के लिए एनकाउंटर की जरूरत पुलिस को महसूस होने लगी थी।

क्या है एनकाउंटर का नियम

सीआरपीसी की धारा 46 के अनुसार अगर कोई अपराधी खुद को पुलिस से बचाने की कोशिश करता है या पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश करता है या पुलिस पर हमला करता है, तो इन हालात में पुलिस आत्मरक्षा के तहत उस अपराधी पर जवाबी हमला कर सकती है।

हालांकि एनकाउंटर का साफ नियम है कि इसका प्रयोग तभी किया जा सकता है, जब बदमाश पुलिस पर हमला करके भागने की कोशिश कर रहा हो। नियम के अनुसार पहले चेतावनी दी जाती है, फिर हवाई फायर, उसके बाद पैर पर गोली मारी जाती है, लेकिन जब बदमाशों की ओर से अंधाधुंध फायरिंग हो रही होती है, पुलिस अपने बचाव में गोली चला रही होती है तो ये कहा नहीं जा सकता है कि गोली कहां लगेगी?

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