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दिल्ली हिंसा:पिंजरा तोड़ के तीनों कार्यकर्ताओं की तुरंत रिहाई के आदेश, दिल्ली HC ने पूछा

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नई दिल्ली4 घंटे पहले

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देवांगना कालिता (बाएं), नताशा नरवाल (बीच में), आसिफ इकबाल (दाएं) - Dainik Bhaskar

देवांगना कालिता (बाएं), नताशा नरवाल (बीच में), आसिफ इकबाल (दाएं)

दिल्ली हाई कोर्ट की बेंच ने गुरुवार को दिल्ली हिंसा के आरोपी पिजरा तोड़ के कार्यकर्ता नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ इकबाल को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। इससे पहले 15 जून को जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और अनूप जयराम भंभानी की बेंच ने उन्हें 50 हजार के मुचकले पर छोड़ने का आदेश जारी किया था, लेकिन तीनों की रिहाई नहीं हो सकी थी।

रिहाई में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाते हुए तीनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद कोर्ट ने तुरंत रिहाई का आदेश जारी किया। आदेश की कॉपी मेल के जरिए तिहाड़ जेल के प्रशासन को भेजी जाएगी। दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। इस पर शुक्रवार को सुनवाई होगी।

बेल के 36 घंटे बाद भी नहीं मिली जमानत

तीनों कार्यकर्ताओं के वकील ने आरोप लगाया था कि बेल मिलने के 36 घंटे बाद तक उन्हें रिहा नहीं किया गया है। इसके बाद गुरुवार को कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई। कार्यकर्ताओं के वकील ने कहा कि रिहाई न मिलने से उनके अधिकारों का हनन हुआ है।

सुनवाई के दौरान पुलिस के वकील ने कहा कि तीनों का वेरिफिकेशन करने की वजह से रिहाई में देरी हुई है। पुलिस ने कोर्ट से कहा कि हम तीनों का पता वेरिफाई कर रहे हैं, जो अलग-अलग राज्यों में हैं। हमारे पास ऐसी ताकतें नहीं हैं, कि झारखंड और असम में दिए गए पते को इतनी जल्दी वेरिफाई कर सकें। इसलिए इसमें समय लग रहा है। इस पर अदालत ने दिल्ली पुलिस पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि पिछले एक साल से तीनों आपकी कस्टडी में थे, इसके बाद भी वेरिफिकेशन करने में देरी की जा रही है।

पुलिस ने पता वेरिफाई करने वक्त मांगा

पिछली सुनवाई के दौरान पुलिस ने पिजरा तोड़ के तीनों कार्यकर्ताओं का पता वेरिफाई करने के लिए 3 दिन का समय मांगा था। दिनभर चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसले के लिए गुरुवार का वक्त तय किया था।

दिल्ली पुलिस हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पहले ही सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुकी है। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में तीनों को जमानत देने का विरोध किया है। तीनों पर अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट (UAPA) के तहत केस दर्ज किया गया था।

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