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तर्क की पराकाष्ठा पर आकलन

जीवन में जब भी कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने का समय आता है, बहुत जरूरी होता है कि हम तर्क से उसका आकलन करें, न कि भावनाओं में बह कर।

स्वरांगी साने

जीवन में जब भी कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने का समय आता है, बहुत जरूरी होता है कि हम तर्क से उसका आकलन करें, न कि भावनाओं में बह कर। अपने विचारों पर डटे रहना अच्छा माना जाता है, लेकिन कई बार आपको कुछ लचीला भी बनना चाहिए, ताकि आप दूसरों की गलतियों से सीख ले सकें। कई बार हम भावनाओं को इतनी अधिक प्राथमिकता दे देते हैं कि भले-बुरे की समझ खो बैठते हैं। भावनाओं में कमजोर मत पड़िए, बल्कि खुद को सशक्त कीजिए। अपने आप से सवाल पूछिए और चिंतन-मनन की प्रक्रिया अपनाइए। पीड़ाओं के जंजाल से खुद को निकालिए। आप जो भी बहुत कुछ कहना चाह रहे हैं, उसे कह कर खुद को मुक्त कीजिए। जब आप सच जान लेंगे तो कोई आपको मूर्ख नहीं बना पाएगा। अपनी निर्णायक क्षमता को पहचानिए।

लोगों से मिलते हुए अपने जेहन में हमेशा रखिए कि किसी व्यक्ति से आप क्या सीख सकते हैं! अपनी परिकल्पनाओं को क्रियान्वित करते हुए अपने शब्दों, विचारों और क्रियाओं पर ध्यान दीजिए। आप दूसरों तक अपने विचार किस तरह प्रेषित कर रहे हैं, यह भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। उन विचारों को दृढ़ता से रखिए। जब कोई निर्णय लेने का समय आए तो सारे तथ्यों को पहले खंगालिए। दूसरों की मदद के लिए हाथ बढ़ाइए। मगर दूसरों की मदद करते समय विचारपूर्वक कार्य कीजिए, भावनाओं को कुछ समय के लिए तिलांजलि दे दीजिए।

उन लोगों की मदद लीजिए, जो आपको तर्कपूर्ण विचार करने में मदद कर सकते हैं। गौर से देखिएगा, न केवल एक वर्ष में बावन सप्ताह होते हैं, बल्कि ताश के पत्ते भी बावन होते हैं और पियानो की कुंजियां भी बावन होती हैं। आप अपने जीवन को ताश के पत्तों के ढेर की तरह ढहा देना चाहते हैं या उन्हें सुरीला बनाना चाहते हैं, निर्णय आपका है। अंग्रेजी वर्णमाला में भी बावन अक्षर होते हैं। क्या यह गलत है? बिल्कुल केवल छब्बीस वर्ण होते हैं, लेकिन अगर छोटे और बड़े दोनों वर्णों को मिला दें तो बावन ही हुए! यह केवल तर्क करने का उदाहरण था। हर चीज को तार्किकता की दृष्टि पर टटोलिए। जीवन में कुछ भी बेमतलब नहीं होता। अगर आपसे कुछ पूछा जा रहा है और आपको वह बेमतलब लग रहा है तो जरूरी नहीं कि वास्तव में वह बेमतलब ही हो।

लगातार सीखते रहिए। अपना विस्तार कीजिए। विकास का एकमात्र मार्ग नया सीखते जाना है। ईसाई धर्म से जुड़े कई ग्रंथों का एक बड़ा संग्रह मिस्र के शहर में बना नाग हम्मादी पुस्तकालय है। यहां दार्शनिक और धार्मिक किताबों के बावन समुच्चय हैं। वर्ष 1945 में इसकी खोज में पता चला कि इन किताबों में ईसाई धर्म से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जो बाइबल में भी नहीं हैं। तो अपने तर्क को तराशते रहिए। आपको हर विषय के कई नए पहलू पता चलते रहेंगे। अपने आप पर विश्वास कीजिए। विश्वास कीजिए कि आप ऐसे लोगों और वस्तुओं-स्थितियों को परख सकते हैं, जो आपकी राह को सुकर नहीं करते और उन्हें कैसे अपने मार्ग से परे किया जा सकता है।

जगह बनाइए, ताकि आप उन उपहारों को ले सकें, जो प्रकृति आपको देना चाहती है। यही सही समय है कि आप कुछ नई शुरुआत कर सकें। बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि ले, उक्ति को हमेशा याद रखिए। इसका यह मतलब नहीं कि पुराने संबंधों को तिलांजलि दें, बल्कि इसका अर्थ है कि जो बीत गया, वह बीत गया, उसे बदला नहीं जा सकता, लेकिन नई शुरुआत के लिए तैयार रहिए, नई आजादी, नई खोज, नए कौतूहल, नई उत्सुकता को अपने जीवन में स्थान दीजिए। खुद को हर बंधन से मुक्त कीजिए। अपने माद्दे को पहचानिए और वह तुरंत कर गुजरिए, जो आप करना चाहते हैं। नए अवसर लंबी प्रतीक्षा नहीं करते। अपनी रचनात्मकता और खिलंदड़ेपन को जिंदा रखिए। अपने दिल की सुनिए और अनजाने का स्वागत कीजिए।

अगर आप किसी चीज को छोड़ना ही नहीं चाहेंगे, तो नए को अपनाएंगे कैसे? घर के पुराने सामान से शुरू कीजिए। जो आपके काम की नहीं, उन वस्तुओं को दूसरे किसी जरूरतमंद को दे दीजिए। जरूरतमंद मतलब गरीब ही नहीं, बल्कि कोई भी ऐसा, जिसके वह वस्तु काम आ सकती है। देने की भूमिका में तो आइए, देखिए आपको वह स्वतंत्रता मिल जाएगी, जिसकी आपको तलाश थी। थोड़ा सुकून में जी लीजिए, प्रक्रिया का आनंद लीजिए और अनजाने के प्रति अपने डर, चिंता और आशंका को छोड़ दीजिए। साहसिक यात्रा की तरह इस नए प्रवास का आनंद लीजिए, जो आपका अपने साथ है। संभावनाओं के द्वार खोलिए और नए अवसरों का स्वागत कीजिए, जो होगा, अच्छा ही होगा यह विश्वास रखिए। हम वैसे भी नहीं जानते कि हम कहां जाएंगे या आगे क्या होने वाला है, तो थोड़ा भरोसा रखिए और खुले मन से हर नई चीज को स्वीकार कीजिए।

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