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टुलकिट केस: गिरफ्तारी के 1 महीने बाद दिशा राव ने साझा की मन की बात, कहा

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    • टूलकिट के मामले में एक महीने बाद गिरफ्तारी के बाद जलवायु कार्यकर्ता दिश रवि ने सोशल मीडिया पर चार पेज स्टेटमेंट

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    बुरु 20 दिन पहले

    23 फरवरी को अदालत ने दिशा को राव को रेुलर बेल दे दी थी।

    किसान आंदोलन के समर्थन से जुड़े तुल्कित मामले में चर्चा में रही क्लाइमेट एक्टविस्ट दिशा रवि ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा। उन्होंने अपने अनुभव साझा किए। दिशा ने लिखा है कि मेरी आजादी का उल्लंघन किया गया है। टीआरपी चाहने वाले टीवी न्यूज चैनलों ने मुझे मुजरिम ही करार दे दिया।

    टुलकिट मामले में गिरफ्तारी , फरवरी में पुलिस और न्यायिक हिरासत में बिताए समय को याद करते हुए दिशा ने लिखा है कि मैंने खुद को ये विश्वास करने पर मजबूर किया कि इस सबसे गुजरने का एक ही तरीका है कि मैं सोच लूं कि मेरे साथ ये नहीं हो रहा है। पुलिस ने 13 फरवरी 2021 को मेरे दरवाजे पर खटखटाया नहीं। उन्होंने मुझे पटियाला हाउस कोर्ट में पेश नहीं किया।

    मैं इसे इंटरनेट शून्य में दे रहा हूं ताकि एक कथा प्रस्तुत की जा सके जो मेरी अपनी है।

    PS यह मेरे व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है और किसी भी जलवायु आंदोलन, समूह, या संगठन की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। pic.twitter.com/djrieCZcn8

    – दिशा 𓆉 (@disharavii) १३ मार्च २०२१ तिहाड़ जेल में बिताई समय याद कर दिशा निर्देश रवि ने कहा कि 5 दिन खत्म होने पर (19 फरवरी 2021) मुझे 3 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। तिहाड़ में मुझे हर दिन के हर घंटे के हर मिनट के हर सेकंड का पता था। अपने सेल में बंद होने के साथ मैं सोच रहा था कि इस पर्यावरण के बारे में सोचना कब से अपराध हो गया है। 23 फरवरी को अदालत ने दिशा को राव को रेुलर बेल दे दी थी।

    तुल्कित मामले में एक्टिविस्ट शुभम चौधरी ने कोर्ट से जजमेंट पूछा है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में चौधरी को 12 मार्च तक के लिए कारणों जमानत दी थी, ताकि वह दिल्ली में कोर्ट से राहत ले सकें। इसके अलावा कोर्ट इंजीनियर से नेता बने शांतनु मुलुक और वकील निकिता जैकब की भावनाओं के लिए भी मुकदमा चलेगा। ये दोनों को 15 मार्च तक के लिए गिरफ्तारी से बचने की सुरक्षा दी गई थी।

    रवि , मुलुक और जैकब पर किसानों के विरोध से संबंधित मामले में आरोप लगाने और देशद्रोह के आरोप लगे हैं। पुलिस ने कहा है कि तुल्कित के जरिए भारत को बदनाम करने की कोशिश की गई और यह हिंसा का कारण बनी। अपनी जमानत याचिका में मुलुक ने दावा किया है कि उन्होंने केवल आंदोलन के बारे में जानकारी देते हुए यह दस्तावेज बनाया था। इसके बाद में उनकी जानकारी के बिना दूसरों ने एडिट किया।

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