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जेल में सत्येंद्र जैन को धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से नहीं मिल रहा खाना

Tihar Jail Satyendar Jain: आवेदन में दिल्ली जेल नियम 339 और 341 के आधार पर मांग की गई है कि सभी कैदियों को अपने धार्मिक विश्वासों का पालन करने की अनुमति है।

Satyendar Jain Jail: आप नेता सत्येंद्र जैन के वकीलों ने दिल्ली की एक अदालत में अपील दायर कर आरोप लगाया है कि तिहाड़ जेल(Tihar Jail) के अधिकारी सत्येंद जैन को उनकी धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से खाद्य वस्तुएं नहीं दे रहे हैं। यह अपील राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष न्यायाधीश के सामने सोमवार(21 नवंबर) को की गई।

कोर्ट में दाखिल अपील में कहा गया कि सत्येंद्र जैन(AAP leader Satyendar Jain) की जो धार्मिक मान्यताएं हैं, उन धार्मिक विश्वासों के अनुसार वे मंदिर जाने में असमर्थ हैं, इसलिए वह उपवास पर हैं और उन्हें पका हुआ भोजन, दाल, अनाज और दूध उत्पाद मिलने चाहिए जोकि जेल में नहीं मिल रहे हैं।

अपील में कहा गया, “जेल में सत्येंद्र जैन को शारीरिक कमजोरी का सामना करना पड़ रहा है। उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी, जिसके लिए उनका एलएनजेपी अस्पताल में इलाज किया गया। वकीलों ने बताया कि जैन के फेफड़े में संक्रमण हैं, जो कि कोविड के बाद के लक्षण हैं।’

सत्येंद्र जैन की तरफ से दायर की गई अपील में कहा गया है कि पिछले 12 दिनों से जेल प्रशासन ने उन्हें उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जरूरी खाद्य पदार्थ, फल-सब्जियां, मिश्रित बीज, सूखे मेवे और खजूर देना बंद कर दिया है। इसकी वजह से पिछले सप्ताह उनका 2 किलो वजन कम हो गया।

वहीं जैन के वकीलों ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद से उनके मुवक्किल का लगभग 28 किलो वजन कम हो गया है। जिसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ा है। जैन के वकीलों ने बताया कि जैन के पास एक सम्मानपूर्वक मानव जीवन जीने का अधिकार है, लेकिन जेल अधिकारियों द्वारा अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है।

अपील में वकीलों ने कहा, “एक कैदी सजा के बाद भी एक इंसान बने रहने से नहीं चूकता। आवेदक मौजूदा समय में एक अंडरट्रायल है और इस तरह उसे भूखा नहीं रहने दिया जा सकता है।” बता दें कि आवेदन में दिल्ली जेल नियम 339 और 341 के आधार पर मांग की गई है कि सभी कैदियों को अपने धार्मिक विश्वासों का पालन करने की अनुमति है और उन्हें उसी के अनुसार आहार दिया जाना है लेकिन सत्येंद्र जैन के मामले में ऐसा नहीं हो रहा है। इसके अलावा, नियमों में यह भी कहा गया है कि एक कैदी को चिकित्सा अधिकारियों द्वारा जैसे निर्देश मिले हों, उसके अनुसार उचित आहार लेने की अनुमति है।

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