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छह महीने पुरानी कंपनी को मोदी सरकार ने बेच दी पवन हंस

कांग्रेस ने सवाल करते हुए कहा कि ओएनजीसी में विलय की संभावना तलाशने के बजाए सरकार ने छह महीने पुरानी कंपनी को पवन हंस की जिम्मेदारी सौंपे जाने का निर्णय क्यों लिया है।

कांग्रेस ने सरकार की ओर से हेलीकॉप्टर प्रदाता कंपनी पवन हंस (PHL) में अपनी 51 फीसद हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दिए जाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने बताया कि कंपनी की 51 फीसद हिस्सेदारी भारत सरकार के पास है और 50 फीसद ओएनजीसी के पास है। कांग्रेस का सवाल है कि ओएनजीसी में कंपनी को विलय करने की संभावना तलाशने के बजाए उसे एक छह महीने पुरानी कंपनी को सौंपे जाने के निर्णय को मंजूरी क्यों दी गई। बता दें कि केंद्र ने बताया था कि उसने पीएचएल में अपनी 51 फीसद हिस्सेदारी 211 करोड़ रुपये में स्टार-9 मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड को प्रबंधकीय नियंत्रण के हस्तांतरण के साथ बेचने की मंजूरी दे दी है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “पवन हंस, देश की ही नहीं साउथ एशिया की सबसे बड़ी कंपनी है। सरकार ने इस कंपनी में से अपना सबसे बड़ा 51 फीसद हिस्सा बेचने का निर्णय कर लिया है। सिर्फ 211 करोड़ रुपये में मोदी सरकार स्टार-9 मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड को यह हिस्सा बेच रही है। इस कंपनी का इनकोर्पोरेशन 19 अक्टूबर, 2021 को हुआ है। छह महीने पुरानी कंपनी को देश की करीब 40 पुरानी पवन हंस बेचने का निर्णय कर लिया।” उन्होंने कहा छह महीने पुरानी इस कंपनी के बारे में जानकारी मिनीस्टरी ऑफ कोर्पोरेट अफेयर्स की वेबसाइट से मिली है।

कांग्रेस के प्रवक्ता गौरव भल्ला ने आगे कहा, “अब आपको स्टार-9 मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड की हकीकत बताता हूं। स्टार-9 मोबिलिटी के तीन एसोसिएट हैं- बिग चार्टर प्राइवेट लिमिटेड, महाराजा एविएशन प्राइवेट लिमिटेड, अलमास ग्लोबल ऑपर्चुनिटी फंड एस.पी.सी। सबसे पहले तो अलमास ग्लोबल ऑपर्चुनिटी फंड क्लेमेन आईलैंड में है। पीएम मोदी 2014 से पहते कहते थे कि क्लेमेन आईलैंड में जो ब्लैकमनी है वो देश में लेकर आएंगे और सबके खाते में 15 लाख रुपये जमा होंगे। अब जो कंपनी क्लेमेन आईलैंड में है उसको देश की सबसे बड़ी हेलीकॉप्टर कंपनी पकड़ा दी। उसका कोई अता-पता नहीं।”

कांग्रेस नेता ने आगे कहा, “अब बिग चार्टर प्राइवेट लिमिटेड की बात करते हैं, इस कंपनी का दिल्ली हाई कोर्ट में हेलीकॉप्टर संबंधित केस चल रहा है। ये मैं नहीं उस केस की डिटेल्स से पता चलेगा, जो मैं दूंगा। तीन साझेदार थे स्टार-9 मोबिलिटी के, जो छह महीने पहले बनी है। एक साझेदार क्लेमेन आईलैंड में है और जो भारत में हैं उसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में हेलीकॉप्टर से संबंधित केस चल रहा है।”

बाबा रामदेव को भी घेरा

तीसरी कंपनी महाराजा एविएशन प्राइवेट लिमिटेड, जिसके बारे में इंटरनेट पर कोई डिटेल नहीं है, लेकिन उसके फेसबुक से डिटेल मिली, इसमें ये कहता है हमारे पास तीन हेलीकॉप्टर हैं जबकि फेसबुक पर बस 5-7 ही फोटो हैं। इनमें से एक फोटो बाबा रामदेव की है। वे कंपनी के चहेते कस्टमर हैं या क्या मैं नहीं जनता, लेकिन ये वही बाबा हैं जो 2014 से पहले 35 रुपये प्रतिलीटर पेट्रोल बिकवाने की बात कह रहे थे। इनका कंपनी से क्या रिश्ता है मुझे नहीं पता। पर 5-7 फोटो में तीन बाबा रामदेव की हैं, एक उनके करीबी आचार्य बालकृष्ण की है और एक फोटो हेमा मालिनी की है। इस कंपनी का बाबा रामदेव से क्या संबंध है? मैं नहीं जानता।”

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