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चुनाव में कोरोना का खल: चुनाव आयोग ने बंगाल में बुलाई ऑल पार्टी की बैठक, रैलियों पर रोक लगाने का हो सकता है।

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नई दिल्ली 3 घंटे पहले

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फोटो पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की है। यहां 7 मार्च को भाजपा की तरफ से बड़ी चुनावी रैली का आयोजन किया गया था। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल थे। लाखों की संख्या में लोग रैली में शामिल हुए थे। इस बीच को विभाजित नियमों का जमकर उल्लंघन हुआ था।

कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए चुनाव आयोग ने शुक्रवार को ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई है। इसमें पश्चिम बंगाल के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को शामिल होने के लिए कहा गया है। इस बैठक में चुनावी रैलियों पर रोक लगाना जैसे कई महत्वपूर्ण निर्णय हो सकते हैं। एक दिन पहले ही लेफ्ट हिस्सों ने ऐलान किया था कि अब वह आगामी तीन चरणों के चुनाव के लिए कोई भी बड़ी रैली नहीं करेंगे। चुनाव प्रचार का काम ऑनलाइन और डोर टू डोर कैंपन के माध्यम से होगा। कोर्ट ने दिया है को विभाजित नियमों का पालन करने का आदेश Hindi मानक पश्चात सुप्रीम कोर्ट के पास कुछ ही दिनों पूर्व व व ने चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए चुनावी राज्यों में को विभाजित -19 नियमों का पालन करने का आदेश दिया था। इस तरह के आयोग संविधान के अनुच्छेद -324 के तहत प्रचार-प्रसार के तरीकों को लेकर राजनीतिक दलों को आदेश दे सकता है। बाकी बचे हुए चरणों का चुनाव एकसाथ प्रदान करने या फिर आगे टालने पर भी कोई फैसला नहीं हो सकता है।

सरकार और चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में लोगों की जान जोखिम में डाल दी है। लगभग डेढ़ महीने से जारी चुनावी कार्यक्रम जानलेवा साबित होने लगा है। ये हम नहीं, आंकड़े बोल रहे हैं। हमने इन पांच राज्यों के 1 अप्रैल से 14 अप्रैल तक के आंकड़े देखे। इससे पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में 420%, असम में 532%, तमिलनाडु में 159%, केरल में 103% और पुध्दुचेरी में 165% कोरोना केस बढ़ गए हैं। औसत के तौर पर देखें तो इन पांच राज्यों में मौतों में भी 45% का इजाफा हो गया है।

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