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चीन की नई चाल, लद्दाख के पास ऊंचाई वाले इलाकों में कर रहा युद्धाभ्यास: रिपोर्ट

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट अखबार ने रविवार को बताया कि पीएलए की वेस्टर्न थिएटर कमांड जो भारत के साथ सीमा नियंत्रण की जिम्मेदारी देखता है ने हिमालयी सीमा के पास रात्रि युद्धाभ्यास किया है।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की तरफ से एक बार फिर लद्दाख क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा दी गयी है। शिनजियांग सैन्य जिले के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रात के समय पीएलए की तरफ से युद्धाभ्यास किया जा रहा है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट अखबार ने रविवार को बताया कि पीएलए की वेस्टर्न थिएटर कमांड जो भारत के साथ सीमा नियंत्रण की जिम्मेदारी देखता है ने हिमालयी सीमा के पास रात्रि युद्धाभ्यास किया है।

सैन्य समाचार पत्र पीएलए डेली के अनुसार “लगभग 5,000 मीटर (16,400 फीट) की ऊंचाई पर रात्रि युद्ध अभ्यास सेना की तरफ से किया जा रहा है”। एक कंपनी कमांडर यांग यांग के हवाले से कहा गया है कि हमने अपने शेड्यूल में संशोधन किया है और सैनिकों से उच्च ऊंचाई वाले प्रशिक्षण के लिए उच्च मानकों को पूरा करने की जरूरत पर बल दिया गया है। यांग ने यह भी कहा कि सेना के जवान बर्फीलें ऊंचे इलाकों को पार कर रात के समय लाइव-फायर मशीन गन से अभ्यास कर रहे हैं।

बताते चलें कि भारत और चीन सीमाई इलाकों में तेजी से कूटनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर भी खड़ा करने में जुटे हैं। चीन ने तो किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए शिनजियांग से लेकर तिब्बत तक तीन नए एयरबेसों का निर्माण तक शुरू कर दिया है। इसके अलावा भारत को घेरने के लिए वह पांच और एयरबेस को मजबूत कर रहा है।

हाल ही में द ड्राइव/द वॉरजोन नाम की पत्रिका के रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत के साथ लगातार सीमा पर तनाव की स्थितियों के मद्देनजर चीन ने अपने जमीन आधारित एयर डिफेंस सिस्टम, हेलिपोर्ट और रेल लाइनों को मजबूत करना शुरू कर दिया है।

वॉरजोन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, होतान में चीनी सेना की तरफ से किए जा रहे बदलाव छोटे-मोटे न होकर बड़े स्तर के हैं। इधर अरुणाचल प्रदेश के पास चीनी सेना ने चेंगदू बांग्दा के नागरिक एयरपोर्ट को बदलने का काम भी शुरू कर दिया है। बताया गया है कि ये एयरपोर्ट, जिसका रन-वे पहले ही चीन में सबसे बड़ा है, उसे और बढ़ाने के साथ एयरपोर्ट के करीब वाले पहाड़ में अंडरग्राउंड फैसिलिटी भी तैयार की जा रही है। लंबे रनवे की जरूरत इसलिए भी बताई गई है, क्योंकि ये एयरपोर्ट 14 हजार फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर है और यहां फाइटर जेट के इंजन पूरी तरह काम नहीं करते।

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