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चिंताजनक: हिमालय में ब्लैक कार्बन की मात्रा बढ़ी, फिर से आपदा का संकट; स्नो लाइन घट रही है, जीव-जंतुओं और वनस्पतियों पर असर पड़ेगा

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    • हिमालय में ब्लैक कार्बन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे फिर से आपदा होती है; हिम रेखा कम हो रही है, पशुओं और वनस्पतियों

    पर सीधा प्रभाव पड़ेगा

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    देहरादून 19 मिनट पहले लेखक: मनमीत

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    ऋषि गंगा के दक्षिणी ग्लेशियर में परिवर्तन )

    • उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने पर वाडिया भू-विज्ञान संस्थान का शोध

    उत्तराखंड के जंगलों में शुरू भीषण आग उत्तरकाशी, सतपुली, श्रीनगर, मसूरी और नैनीताल के करीब पहुंच गई है। इससे शहरों में अफरातफरी का माहौल है। पौड़ी में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के दोनों तरफ आग के विकराल होने से आवाजाही बंद कर दी गई है। इधर, वैज्ञानिकों को डर है कि इस आग से हिमालय की पहले से नासाज सेहत और खराब हो सकती है। उनके अनुसार, बीटी सर्दियों में औसत से कम हिमपात और अब आग के कारण हो रहे वायु प्रदूषण से ग्लेशियर ब्लैक कार्बन के चपेट में आ रहे हैं। उनके पिघलने की अवस्था पहले से तेज हो गई है। इससे फिर से आपदा आ सकती है। वाडिया भू-विज्ञान संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, ‘हिमालय के ग्लेशियरों में ब्लैक कार्बन है। इसकी मात्रा सामान्य से ढाई गुना बढ़कर 1899 नैनोग्राम जा पहुंची है। ‘ दरअसल, ब्लैक कार्बन से तापमान में वृद्धि होती है। यह प्रकाश को अवशोषित करने में अत्यधिक प्रभावी है। इससे आर्कटिक और हिमालय जैसे ग्लेशियर क्षेत्रों में बर्फ पिघलने लगता है। उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसेक) ने निष्कर्ष निकाला है कि 37 सालों में शिच्छादित क्षेत्र में 26 वर्ग किलोमीटर की कमी आई है। इस क्षेत्र में पहले स्थाई स्नो लाइन 5,200 मीटर थी। अब यह 5,700 मीटर तक घट-बढ़ रही है। यही कारण है कि नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के ऋषिंज कैचमेंट का कुल 243 वर्ग किमी क्षेत्र बर्फ से ढका था, लेकिन 2020 में यह 217 वर्ग किमी ही रह गया। यूसेक के निदेशक और वरिष्ठ भू-गर्भीय वैज्ञानिक प्रो। डॉ। एमपीएस बिष्ट ने बताया कि ऋषि गंगा कैचमेंट एरिया के दक्षिणी ढलान के ग्लेशियर में बदलाव देखा गया है। ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। नंद देवी बायोस्फीयर रिजर्व के ग्लेशियर यदि इसी तरह से पिघलते रहे तो आने वाले समय में इस क्षेत्र के जीव जंतुओं और वनस्पतियों पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा।

    रिहायशी इलाकों में आग लगने का खतरा

    जंगलों में आग लग गई अब रिहायशी इलाकों में पहुंचने लगी है। पौड़ी जिले के धुमाकोट में प्राथमिक विद्यालय का पुराना भवन, फर्नीचर, रिकॉर्ड आग से खाक हो गया है। टिहरी जिले में भी आग ने बडा नुकसान हुआ है। इससे 128 हेक्टेयर वन भूमि खाक हो गई है। आग पर काबू पाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और वायुसेना के दो हेलिकॉप्टर सोमवार को पहुंचे। ये टिहरी झील से पानी लेकर आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रदेश में कुल 1,300 हेक्टेयर वन भूमि आग की चपेट में है।

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