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पिछले डेढ़ वर्षों से बच्चों का बचपन घर की चारदिवारी के अंदर है।

जनसत्ता

Updated: August 12, 2021 4:49 AM

सांकेतिक फोटो।

पिछले डेढ़ वर्षों से बच्चों का बचपन घर की चारदिवारी के अंदर है। सभी स्कूल कोरोना काल में बंद कर दिए गए हैं। बच्चों की पढ़ाई आॅनलाइन माध्यम से चल रही है, इसलिए उन्हें मोबाइल उपलब्ध कराना अभिभावकों की मजबूरी बन चुकी है। निर्धन अभिभावक भी बच्चों के भविष्य के लिए किसी तरह इंतजाम करके बच्चों को मोबाइल खरीद कर दे रहे हैं, ताकि उनका भविष्य बन सके। लेकिन यह मोबाइल आज बच्चों का भविष्य बनाने के बजाय बिगाड़ अधिक रहा है।

बच्चे मोबाइल का उपयोग पढ़ाई में कम और आॅनलाइन गेम या अन्य नकारात्मक गतिविधियों में अधिक कर रहे है। पबजी और फ्री फायर जैसे मोबाइल गेम बच्चों में लोकप्रिय हो चुके है। अब हालत यह है कि मोबाइल के बिना बच्चे एक दिन भी नही रह सकते हैं। मोबाइल की लत ने बच्चों में नकारात्मक भावनाएं और अकेले रहने की आदत पैदा कर दी है। कभी-कभी आॅनलाइन गेम के चक्कर में बच्चे अभिभावकों के बैंक खाते को खाली कर दे रहे हैं। अप्रिय घटनाएं भी घटित हो रही हैं। दूसरी ओर, शतरंज जैसे खेलों के प्रति लोगों या बच्चों में कोई रुचि नहीं दिखती। जबकि शतरंज के खेल से एकाग्रता, दूरदर्शिता और सोचने की शक्ति विकसित होती है। मोबाइल गेम के स्थान पर बच्चों को शतरंज और दूसरे प्रत्यक्ष खेल खेलने के लिए प्रेरित करना चाहिए। यह उनके भविष्य संवारने में सहायक सिद्ध होगा।


’हिमांशु शेखर, केसपा, गया, बिहार

जोखिम का पानी

बरसात के मौसम में पीने के पानी की बड़ी सावधानी जरूरी है। विभिन्न प्रकार की बीमारियों और उनके संक्रमण से लड़ने में साफ पानी की अहमियत है। यूनिसेफ भी कई शहरों के करोड़ों लोगों को साफ पानी उपलब्ध न होने की बात कह चुका है। ऐसे में पेयजल को लेकर सावधानी बरती जानी चाहिए। आज लोग पीने का पानी जैसा मिलता है, वैसा ही उपयोग में ले लेते हैं। गांव के लोग विशेषकर ऐसा ही करते हैं। फिल्टर के अभाव में अशुद्ध, खराब और गंदा पानी हैजा, डायरिया जैसी कई बीमारियों को जन्म देता है।

यूनिसेफ की रिपोर्ट पर विश्वास करें तो शहरी क्षेत्र में पीने का पानी सुरक्षित नहीं है। ऐसी स्थिति में गांव की हालत समझी जा सकती है। देश में ऐसे गांवों की संख्या बहुत ज्यादा है, जहां लोग बमुश्किल पीने का पानी जुटा पाते हैं?। सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और लोगों के स्वास्थ्य के मद्देनजर शुद्ध जल की व्यवस्था करनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों की सुध लेनी होगी, जहां लोग जल संकट के लिए संघर्षरत हैं। जानलेवा बीमारियों के चलते साफ पानी संक्रमण को रोकने में सहायक है। ऐसे में सरकार को प्राथमिकता के साथ शुद्ध जल की उपलब्धि करवाना चाहिए चाहे शहर हो या गांव। इससे लोगों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सकेगा।


’अमृतलाल मारू ‘रवि’, धार, मप्र

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