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कोरोना 41 से 60 वर्ष की उम्र वालों को बना रहा शिकार

कोरोना संक्रमण ने चार दिनों में राजधानी दिल्ली में सबसे बड़ा हमला किया है।

कोरोना संक्रमण ने चार दिनों में राजधानी दिल्ली में सबसे बड़ा हमला किया है। कई महीनों से ठहरे संक्रमण से मौत का आंकड़ा यहां तेजी से बढ़ रहा है। इस आंकड़े का आकलन जब आयु के आधार पर किया गया तो सामने आया कि 41 से 60 वर्ष की आयु वाले सबसे अधिक लोग इन चार दिनों में अपनी जान गवां चुके हैं। ऐसे लोगों का आंकड़ा 37 रहा है। वहीं, सिर्फ चार दिन में 97 लोगों की जान संक्रमण की वजह से गई है।

यह आकलन नौ जनवरी से 12 जनवरी, 2022 तक किया गया है। एकाएक तेजी से फैले संक्रमण और मौत के मामलों के बाद सरकारी विभागों ने इस बार की लहर को आयु वर्ग सीमा में बांटा है। इसमें चार दिन में हुई मौतों को पांच श्रेणियों के बांटा गया। यहां 41 से 60 वर्ष की आयु सीमा के बाद इस बीमारी से सबसे ज्यादा मौत 61 से 80 आयु वर्ग के लोगों की हुई है। इसी प्रकार 80 से अधिक उम्र के आठ, 18 से 40 आयु वर्ग के 18 और 18 से कम आयु के सात लोगों की मौत चार दिन में हुई है। इन दिनों मौत का आंकड़ा बढ़ा है। बुधवार को एक ही दिन में 40 लोगों की जान कोरोना संक्रमण से है।

जनवरी की शुुरुआत से ही दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामलों में यह बढ़ोतरी देखी जा रही है। हालांकि, सरकार खुद मान चुकी है कि यह कोरोना संक्रमण की सबसे बड़ी लहर है। मगर, आने वाले दिनों में संक्रमण के मामलों में कमी आएगी और मौत के मामले भी नियंत्रित हो सकेंगे। सरकार का दावा है कि इस बार संक्रमण की लहर से बचने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।

इस समय दिल्ली के अस्पतालों में करीब 2,363 मरीज भर्ती हैं। इनमें 99 मरीज ऐसे हैं जिनको संक्रमण होने का संदेह है। भर्ती मरीजों में से 618 आइसीयू और 739 मरीज आक्सीजन के सहारे हैं। नए मामले आने के बाद दिल्ली सरकार को निषिद्ध क्षेत्रों की संख्या भी बढ़ानी पड़ रही है।

यह आंकड़ा बुधवार को बढ़कर 20,878 तक पहुंच गया है।

जान गंवाने वाले 97 को थीं अन्य बीमारियां

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने गुरुवार को बताया कि कोरोना संक्रमण से होने वाली मौत के मामलों के विश्लेषण के लिए एक समिति बनाई गई है। समिति ने पाया कि मृतकों में ज्यादातर वे लोग थे जिन्हें कोरोना के साथ अन्य बीमारियां भी थीं। उन्होंने कहा कि ज्यादा मौत उन मरीजों की भी हुई जिन्होंने टीके की खुराक नहीं ली थी। कोरोना से गुरुवार को भी 31 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा।

जैन ने बताया कि समिति ने देखा कि मौत की ज्यादातर सहायक वजहें क्या रहीं। पता चला कि नौ जनवरी से 12 जनवरी के बीच मौत के मुंह में समाने वाले 97 कोरोना मरीजों को अन्य बीमारियां भी थीं। यही नहीं, समिति के मुताबिक इन 97 मरीजों में से 70 मरीजों ने टीके की खुराक भी नहीं ली थी। दिल्ली में इस साल के पहले महीने के पहले 12 दिनों में 133 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इसके पहले पिछले छह महीनों में कुल 130 लोगों की कोरोना से मौत हुई। इनमें से नौ मरीजों की दिसंबर में, सात की नवंबर में, चार की अक्तूबर में व पांच मरीजों की मौत सितंबर में और 29 लोगों की मौत अगस्त में हुई। जुलाई में संक्रमण से दिल्ली में 76 लोगों ने दम तोड़ दिया था।

मंत्री ने कहा कि कोरोना से बचने के लिए टीके लगवाएं।

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