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कोरोना काल में बढ़ गए बिजनेस करने वालों और दिहाड़ी मजदूरों की आत्महत्या के मामले

कोरोना महामारी के चलते हजारों लोगों की आजीविका पर खतरा उत्पन्न हो गया। इसके कारण भारत में गरीबी में भी बेतहाशा वृद्धि हुई। एनसीआरबी के आत्महत्या के आंकड़ों में भी यह साफ दिख रहा है।

कोरोना महामारी (Corona Pandemic) के कारण लोगों के सामने न सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें आईं, बल्कि इसने कई अन्य परेशानियां भी पैदा की। इसके चलते हजारों लोगों का रोजगार छिन गया और अनेकों लोगों के सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया। आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। साल 2020 के दौरान बिजनेस करने वाले लोगों (Business Persons) और दिहाड़ी मजदूरों (Daily Wage Earners) में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति बढ़ गई।

2019 की तुलना में अधिक Business Persons ने किया सुसाइड

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2020 के दौरान बिजनेस करने वाले 11,716 लोगों ने आत्महत्या की। इससे पहले 2019 में 9,052 बिजनेसमैन ने आत्महत्या की थी। अन्य श्रेणियों के सेल्फ इंप्लॉयड लोगों (Other Self Employed Persons) को भी मिलाकर देखें तो यह आंकड़ा और बढ़कर 17,332 पर पहुंच जाता है। इसी तरह एक साल में आत्महत्या करने वाले दिहाड़ी मजदूरों की संख्या 32,563 से बढ़कर 37,666 पर पहुंच गई।

एक साल में 10 प्रतिशत बढ़ गए आत्महत्या के मामले

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में देश भर में कुल 1,53,052 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें 1,08,532 पुरुष, 44,498 महिलाएं और 22 ट्रांसजेडर शामिल रहे। इससे एक साल पहले 2019 में 1,39,123 लोगों ने सुसाइड किया था। इस तरह महामारी से प्रभावित साल में देश में आत्महत्या के मामले 10.01 प्रतिशत बढ़ गए।

किसानों के सुसाइड के मामले हुए कम

हालांकि इस दौरान किसानों की आत्महत्या में कमी आई है। साल 2019 में 5,957 किसानों ने आत्महत्या की थी। 2020 में इनकी संख्या कम होकर 5,579 पर आ गई। साल 2020 के दौरान 14,825 प्रोफेशनल, 12,526 विद्यार्थी, 15,652 बेरोजगार, 5,098 कृषि मजदूर, 1,457 रिटायर्ड और 20,543 अन्य लोग आत्महत्या की प्रवृत्ति के शिकार हुए।

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बेतहाशा बढ़ी बेरोजगारी और गरीबी

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की एक रिपोर्ट की मानें तो महामारी की दूसरी लहर के चलते करीब एक करोड़ लोगों का रोजगार छिन गया। कोविड-19 के कारण 97 प्रतिशत परिवारों की आय कम हो गई। इसी तरह अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी (Ajim Premji University) के एक अध्ययन में पता चला कि महामारी की पहली लहर के चलते गरीबी रेखा से नीचे के लोगों की संख्या 23 करोड़ बढ़ गई। 2020 के दौरान कोरोना के चलते ग्रामीण भारत में गरीबी में 15 प्रतिशत की वृद्धि आई। इसी तरह शहरी क्षेत्रों में इस दौरान गरीबी 20 प्रतिशत बढ़ गई।

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