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कॉलेजियम पर सुप्रीम कोर्ट बनाम सरकार:रॉ एंड एम्पायर की रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर रिजिजू बोले

नई दिल्ली5 घंटे पहले

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम समलैंगिक वकील सौरभ कृपाल को दिल्ली उच्च न्यायालय में नियुक्त करना चाहता है, लेकिन केंद्र ने कृपाल के नाम पर आपत्ति दर्ज कराई है।

जजों की नियुक्ति को लेकर कॉलेजियम पर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच बढ़ती जा रही है। कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को देश की खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर कहा- यह देश की सुरक्षा के लिए खतरा है।

रिजिजू ने कहा-इंग्लिश ब्यूरो (आईबी) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) की संवेदनशील रिपोर्ट के कुछ हिस्से सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा सार्वजनिक डोमेन में डाल दिए गए हैं। खुफिया एजेंसी के अधिकारी देश के लिए गुप्त तरीके से काम करते हैं और अगर उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाती है तो वे भविष्य में इसे लिखने पर दो बार सोचेंगे। यह गंभीर चिंता का विषय है।

रॉ-अधिकारी की रिपोर्ट्स को लेकर विवाद क्यों?
दरअसल, यह मामला समलैंगिक वकील सौरभ कृपाल से आरती है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम कृपाल को दिल्ली हाई कोर्ट में नौकरी देना चाहता है, लेकिन सेंटर ने कृपाल के नाम पर आपत्तिजनक किया था। सेंटर ने इसके लिए खुफिया एजेंसी रॉ-रिपोर्टर की रिपोर्ट का हवाला दिया था। इसमें समलैंगिक वकील सौरभ कृपाल के एलियन किरदार को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

लेकिन कॉलेजियम ने इन दस्तावेजों की आपत्तियों को खारिज कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते पहली बार जजों के बारे में दी गई राय की आपत्तियों और रॉ-ब्रिगेड की रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दिया था। तब रिजिजू ने कहा था कि यह एक गंभीर चिंता का विषय है, जिस पर मैं उचित समय पर प्रतिक्रिया देता हूं।

खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में क्या था?
इंटेलिजेंस एजेंसी रॉ ने समलैंगिक वकील सौरभ कृपाल के एलियन पार्टनर को लेकर सवाल उठाया था। सौरभ कृपाल के कलाकार निकोलस जरमेन वाकमैन स्विस नागरिक हैं। वह स्विस दूतावास में काम करते हैं। केंद्र सरकार इसी बात को लेकर सौरभ कृपाल की नियुक्ति पर आपत्ति जता रही है।

कृपाल अपने कलाकार ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट निकोलस जरमेन वाकमैन के साथ, जो स्विटज़रलैंड में रहते हैं।

कृपाल अपने कलाकार ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट निकोलस जरमेन वाकमैन के साथ, जो स्विटज़रलैंड में रहते हैं।

इंटेलिजेंस एजेंसी के जवाब में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कहा था कि रॉ ने जो कुछ भी बताया, उससे बिल्कुल नहीं लगता कि कृपाल से पहुंचती सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पहले से यह मान लेना कि उनके पार्टनर भारत के प्रति दुश्मनी का भाव रखेंगे, गलत है।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम और सरकार के विवाद से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…

1. LGBT जज के नाम पर सेंटर को आपत्तिजनक, सौरभ कृपाल के नाम पर फिर विचार करने को कहा

सेंटर ने सीनियर एडवोकेट सौरभ कृपाल को दिल्ली उच्च न्यायालय के जज के रूप में बताने के लिए आपत्ति जताते हैं। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से उनके नाम पर फिर विचार करने के लिए कहा है। इसके अलावा, केंद्र ने SC के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए भेजे गए कई नाम भी SC कॉलेजियम को वापस भेज दिए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

2. पहली बार समलैंगिक को हाई कोर्ट जज बनाने का विकल्प, समलैंगिकता पर कोर्ट और सरकार का क्या रहा है रूख

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने वरिष्ठ वकील सौरभ कृपाल को दिल्ली उच्च न्यायालय का जज बनाने के लिए नामांकन किया है। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की 11 नवंबर की बैठक में इसे शामिल किया गया है। हालांकि अभी ये साफ नहीं है कि कृपाल की नियुक्ति कब तक हो जाएगी। पूरी रिपोर्ट पढ़ें…

3. जज अपॉइंटमेंट पर केंद्र का ऐतराज; SC का जवाब, कहा- सरकार की आलोचनात्मक टिप्पणी प्रोत्साहन रोकने का नहीं

जजों की नियुक्ति को लेकर केंद्र और न्यायपालिका में टकराव के बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपनी वेबसाइट पर 3 पत्र जारी कर वकील सौरभ कृपाल, सोमशेखर सुंदरेशन और आर जॉन सत्यन की अपने पर केंद्र और रॉ-आईबी की आपत्तिजनक मात्रा का खंडन किया है। साथ ही केंद्र की आपत्तियों का जवाब भी दिया। पूरी खबर पढ़ें…

4. रिजिजू ने शेयर किया पूर्व-जज का वीडियो:कहा- कुछ लोग खुद को संविधान से ऊपर मानते हैं

सरकार बनाम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम विवाद में केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश के बयानों को साझा किया है। जज आर एस सोढ़ी ने एक यू-ट्यूब चैनल को दिए गए साक्षात्कार में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान को हाइजैक कर लिया है। सर्वोच्च न्यायालय में जनता का चयन हुआ प्रतिनिधित्व हो तो जनता को ही न्याय मिलता है। पढ़ें पूरी खबर…

5. जजों को कोई चुनाव नहीं लड़ने वाला, इसका मतलब ये नहीं कि जनता देख नहीं रही, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पर बोले कानून मंत्री

कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को दिल्ली बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में कहा- जजों को एक बार पद पर आने के बाद किसी चुनाव या सार्वजनिक रूप से जांच का सामना नहीं करना पड़ा। उन्हें आम जनता नहीं चुनती है। यही कारण है कि जनता आपको बदल भी नहीं सकती, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि जनता आपको देख नहीं रही है। पढ़ें पूरी खबर…

6. सरकार बोली- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में हमारे प्रतिनिधि शामिल हों, कानून मंत्री के CJI को चिट्ठी

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सलाह दी है कि कॉलेजियम में उसके प्रतिनिधि भी शामिल हों। कानून मंत्री किरण रिजिजू ने सीजेआई को चिट्ठी लिखकर कहा है कि जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में सरकारी प्रतिनिधि शामिल होने से सिस्टम में बड़ी भूमिका निभाएंगे और जनता के प्रति रवैया भी तय करेंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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