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एयरफोर्स का मिग -21: कॉम्बैट ट्रेनिंग के लिए टेक ऑफ कर रही है फाइटर प्लेन हादसे का शिकार, ग्रुप कैप्टन शहीद

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    • भारतीय वायुसेना का एक मिग 21 बाइसन विमान आज सुबह एक घातक दुर्घटना में शामिल हो गया, जबकि एक लड़ाकू प्रशिक्षण के लिए रवाना हुआ, वायुसेना ने समूह के कप्तान ए गुप्ता को दुर्घटना में खो दिया

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    () ग्वालियर 17 दिन पहले

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    एयरफोर्स का मिग -21 बायसन ने जैसे ही सेंट्रल इंडिया के एयरफोर्स बैस से उड़ान भरी वह दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हो गया। (फाइल)

    मध्यप्रदेश के ग्वालियर में बुधवार को वायुसेना का मिग -21 बायसन एयरक्रॉफ्टिंग हो गया है। घटना दोपहर करीब 12 बजे की है। इस हादसे में वायुसेना के एक ग्रुप कैप्टन आशीष गुप्ता शहीद हो गए। हादसा एयरफोर्स के मध्य भारत में, उस समय हुआ, जब मिग -21 एयरक्राफ्ट कॉम्बैट ट्रेनिंग के लिए टेक ऑफ कर रहा था।

    वायुसेना ने इस हादसे के पीछे की वजह पता करने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (जांच) बैज दी है। एयरफोर्स ने हादसे में शहीद कैप्टन की शहादत पर संवेदना व्यक्त की है। एयरफोर्स ने कहा कि इस दुख की घड़ी में हम उनके परिवार के साथ खड़े हैं।

    आग लगने की सूचना मिलने के बाद एयरबेस गया था फायर ब्रिगेड फायर ब्रिगेड के नोडल अधिकारी अतिबल सिंह ने दैनिक भास्कर को बताया, उन्हें लगभग 12 बजे एयरफोर्स से कॉल आया।] कॉल पर बोला गया था कि ग्वालियर स्थित सेंट्रल एयरबेस पर आगजनी की घटना हुई है। तेल फैलने और घास में आग लगने पर कॉल किया गया था। इसके तुरंत बाद घटनास्थल की ओर फायर ब्रिगेड को रवाना किया गया। गेट पर ही फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों के मोबाइल जमा कराए जा रहे थे। केवल अंदर से कॉल आया है कि आग पर नियंत्रक कर लिया गया है। इसके बाद फायर ब्रिगेड की टीम को लौटा दिया गया।

    पिछले महीने राजस्थान में हुआ था। बिना आज (5 अप्रैल को) सूरतगढ़ के संबंध में पहले 5 जनवरी एयरबेस पर भी मिग -21 बाइसन और हुआ था। हालांकि, इस हादसे में पायलट को सुरक्षित निकाल लिया गया था। इस साल मिग का पहला हादसा था। रूस और चीन के बाद भारत में सबसे बड़ा ऑपरेटर
    रूस और चीन के बाद भारत मिग -21 । तीसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर है। 1964 में इस विमान को पहले सुपरसोनिक फाइटर जेट के रूप में एयरफोर्स में शामिल किया गया था। विजेताओं रूस में बने थे और फिर भारत ने इस विमान को असेम्बल करने का अधिकार और तकनीक भी हासिल कर ली थी तब से अब तक मिग -21 ने 1971 के भारत-पाक युद्ध, 1999 के कारगिल युद्ध सहित कई मौकों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रूस ने तो 1985 में इस विमान का निर्माण बंद कर दिया, लेकिन भारत इसके अपग्रेडेड वैरिएंट का इस्तेमाल करता रहा है।


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