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एकल परिवार की दुविधा से लेकर रहस्य, रोमांच के विविध रंग

ओटीटी प्लेटफार्म पर नित नई विषयवस्तु को केंद्र में रखकर लिखी गई पटकथा पर आधारित वेब शृंखलाओं के प्रसारण का क्रम जारी है।

राजीव सक्सेना

ओटीटी प्लेटफार्म पर नित नई विषयवस्तु को केंद्र में रखकर लिखी गई पटकथा पर आधारित वेब शृंखलाओं के प्रसारण का क्रम जारी है। खास वर्ग के दर्शकों की रुचि के मद्देनजर विविधता लिए कुछ नई वेब सीरीज देखने में आई हैं, जिनमें महानगरों में रहने वाले परिवारों से जुड़ी सामाजिक विषमताएं हैं, वहीं कुछ अजीब घटनाक्रम भी हैं।. इनमें कहीं प्यार और तकरार है तो रहस्य और रोमांच भी है। सोनी लिव्स पर पेट पुराण, डिस्कवरी प्लस पर एनी : द हनीमून मर्डर और वूट पर लंदन फाइल्स कुछ ऐसी ही शृंखलाएं हैं…

पेट पुराण

ह्रूज प्रोडक्शन के बैनर तले, रंजीत गूगले द्वारा निर्मित, दिनेश जोटिंग निर्देशित नई सीरीज पेट पुराण में पेट का अर्थ शरीर के एक हिस्से से नहीं लगाते हुए पालतू प्राणियों से लगाया गया है। यह एक परिवार की कहानी है, जो आधुनिक भी है और मान्यताओं में भी जकड़ा हुआ है। अदिति और अतुल कामकाजी पति-पत्नी हैं, जो शादी के बाद, जल्दी ही संतान के पक्ष में कतई नहीं हैं।

उन्हें नहीं लगता कि बच्चों के बिना एक परिवार की परिभाषा पूरी नहीं होती। लेकिन घर के बड़े-बूढ़ों, रिश्तेदारों, मित्रों के तमाम सुझाव-दबाव इस मामले में उनका पीछा नहीं छोड़ते। पालतू बिल्ली को गर्भवती देखना और उसका पूरा खयाल रखते हुए पति-पत्नी के बीच अपनी संतान को लेकर एक अनचाही चाहत के बीज पनपने लगते हैं।

एक सहज-सरल कहानी के मुख्य पात्रों अदिति और अतुल को, मराठी अभिनेत्री सई ताम्हणकर और अभिनेता ललित प्रभाकर ने खूबसूरती से निभाया है।आधुनिक से आधुनिकतम होती जा रही जीवनशैली में महानगरों के गगनचुम्बी इमारतों के दड़बेनुमा दो या तीन कमरे के फ्लेट में रहने वाले संयुक्त या एकल परिवारों की सीमित सुविधाओं के कारण जिन परिस्थितिजन्य फैसलों को स्वीकार करना होता है, इस वेब सीरीज में यह बात खुलकर रेखांकित हुई है। संयुक्त परिवारों में इजाफा और एकल परिवारों की दिनोंदिन बढ़ोतरी की वजह पति-पत्नी दोनों का कामकाजी होना ही है।

लंदन फाइल्स

रहस्य-रोमांच से जुड़े जासूसी कथानक हमेशा से पाठकों को रिझाते आए हैं। लम्बे अरसे बाद, अपराध कथाओं में जासूसी विधा पर, इधर कुछ खास पढ़ने को मिला है। वेब सीरीज में इस क्षेत्र में अभी काफी काम की जरूरत महसूस हो रही है। वूट पर, लन्दन फाइल्स एक ऐसी ही शुरुआत है, जिसके प्रस्तुतिकरण में कई जगह कसर बाकी रह गई सी महसूस हुई।

जी फाइव की शृंखला रंगबाज के निर्देशक सचिन पाठक इस बार लंदन फाइल्स लेकर आए तो, एक ढर्रे पर चल रही अपराध कथाओं में कुछ नएपन की उम्मीद बंधी। तमाम अन्य क्राइम स्टोरीज की तरह इसमें भी अंत तक अपराधी कौन का रहस्य बनाए रखने की कोशिश की गईं है। अर्जुन रामपाल सरीखे अच्छे अभिनेता के कंधे पर सवार शृंखला में, लंदन की पृष्ठभूमि में, पिरोकर लेखक प्रतीक पयोधि ने सशक्त पटकथा को आकार देकर कई सारे दिलचस्प मोड़ भी दिए हैं, लेकिन कुछ ही आगे बढ़ने पर लेखन और निर्देशन के तालमेल पर सवालिया निशान लगाने की नौबत आ जाती है।

मीडिया मुगल अमर राय की बेटी के गुमशुदा होने की पहेली सुलझाने और उसे खोज निकालने की जिम्मेदारी लंदन पुलिस के जासूस ओम सिंह को दी जाती है। कहानी में मोड़ तब आता है, जब एक देश में, बाहर से आकर बसने वालों का मुद्दा उठा लिया जाता है। अर्जुन रामपाल ने अपनी भूमिका में प्राण फूंकने के पूरे प्रयास किए हैं, काश कि फोकस मूल कहानी पर होता। अभिनेता पूरब कोहली के अलावा सागर आर्य और अभिनेत्री सपना पब्बी ने भी अपने रोल ठीक से निभाए हैं।

एनी : द हनीमून मर्डर

डिस्कवरी जैसी विदेशी चैनल्स ने भारत से जुड़े कितने ही मामलों को डाक्यूड्रामा शैली में पेश किया है। वृत्तचित्र में वास्तविक तथ्यों के साथ कुछ नाटकीय दृश्य फिल्मा कर जोड़ने से दर्शकों की उसे देखने में अक्सर रूचि बढ़ जाती है। इस तरह के प्रयोग कामयाब भी हुए हैं।

इस डाक्यूड्रामा सीरीज में भारतीय पहलवान सुशील कुमार के अपराध जगत में कथित प्रवेश दिखाया गया।

ऐसे ही एक अप्रवासी भारतीय मंजीत बसरा की हत्या पर भी उम्दा सीरीज बनाई गई। एनी : द हनीमून मर्डर इसी शैली की एक और शृंखला है, जो डिस्कवरी प्लस ओटीटी प्लेटफार्म के लिए बनाई गईं है। सन 2010 में दक्षिण अफ्रीका में हनीमून पर गए भारतीय जोड़े एनी देवानी और पत्नी में से एनी की हत्या का रहस्य चार साल तक सुलझाया नहीं जा सका।

इस घटना पर बनाई गईं मिनी डाक्यूड्रामा सीरीज में एनी देवानी के परिवार से लेकर जांच में शामिल पुलिस अधिकारियों तक के बयान और घटनाक्रम को उसके सुलझने तक के सभी महत्त्वपूर्ण हिस्सों को दिलचस्प तरीके से प्रस्तुत किया गया है। अभी तक भारतीय दूरदर्शन पर या कुछ विदेशी टीवी चैनल्स पर दिखाई जाती रहीं डाक्यूमेंट्री से अलग हटकर किए गए डिस्कवरी प्लस के ये नए प्रयोग रोचक भी हैं और अपराध की परत खुलते जाने के मामले में ज्ञानवर्धक भी साबित हुए हैं।

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