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उपकुलपाल के अधिकारों पर सवाल: कांग्रेस बोली

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    नई दिल्ली 18 दिन पहले

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    केंद्र सरकार की ओर से सोमवार को संसद में लाए गए सरकार ने नेशनल कैपिटल टेरीटरी ऑफ दिल्ली (संशोधित बिल) 2021 यानी एनसीटी बिल पर बवाल मच गया है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने इसे गलत करार दिया है। वहीं, कांग्रेस ने बिल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

    कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने मंगलवार को सोशल मीडिया के जरिए कहा कि अगर बिल संसद में पास हुआ है, तो दिल्ली में लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा। दिल्ली की तारीख हुई सरकार उपराज्यपाल के दरबार में सिर्फ याचिकाकर्ता बनकर रह जाएगी। अब उपनिरीपाल गृह मंत्रालय के माध्यम से दिल्ली पर आक्रामक तरीके से राज करेंगे।

    इसलिए विरोध किया जा रहा है सूत्रों के अनुसार, केंद्र के इस नए बिल के पास होने के बारे में बाद दिल्ली में उपराज्यपाल के पास अधिक अधिकार होंगे। विधानसभा से इतर भी कई ऐसे मामले होंगे, जिनमें अब राज्य सरकार को उपराज्यपाल की अनुमति लेना जरूरी होगा। विधायिका से जुड़े फैसलों के लिए सरकार को उपराज्यपाल को 15 दिन पहले और प्रशासनिक फैसलों में 7 दिन पहले ही मंजूरी लेनी होगी। केजरीवाल ने भी साधा निशाना
    पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा, ‘ये बिल कहता है कि दिल्ली में सरकार का मतलब उपकुलपाल होगा, तो बोनस हुआ सरकार क्या करेगी? सभी फाइल्स उपराज्यपाल के पास होगीगी। ये सुप्रीम कोर्ट के 4 जुलाई 2018 के फैसले के खिलाफ है, जिसमें कहा गया था कि फाइल्स उपराज्यपाल को नहीं भेजी जाएगी। तारीख हुई सरकार सभी फैसले लेगी और उपराज्यपाल को फैसले की कॉपी ही भेजी जाएगी।

    बीजेपी ने किया पलटवार वहीं, भाजपा का कहना है कि केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सरकार के आधार पर सरकार चलाने के लिए तैयार नहीं है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने बिल पर कहा कि ये सर्वोच्च न्यायालय के फरवरी 2019 के निर्देश की अनुपालना है।

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