POLITICS

इशारे को समझें

  1. Hindi News
  2. राज्य
  3. नई दिल्ली
  4. इशारे को समझें

दिल्ली प्रदेश कार्यकारिणी के गठन को लेकर बीते एक साल से नेता और कार्यकर्ता आस लगाए बैठे हैं।

दिल्ली प्रदेश कार्यकारिणी के गठन को लेकर बीते एक साल से नेता और कार्यकर्ता आस लगाए बैठे हैं। पर कार्यकारिणी की घोषणा को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बीते दिनों प्रदेश अध्यक्ष का एक साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद लगा था कि आगामी दिनों में कार्यकारिणी की घोषणा हो सकती है और कुछ नए चेहरों को मौका मिल सकता है। पर घोषणा नहीं होने से नेता और कार्यकर्ता मायूस होने लगे हैं। बीते दिनों प्रदेश कार्यालय में भूतपूर्व मुख्यमंत्री के जन्मदिवस के मौके पर पुष्पांजलि सभा आयोजित की गई। इस दौरान भी इशारों-इशारों में अध्यक्ष जी को नेताओं ने इस ओर ध्यान देने का कहा। देखना दिलचस्प होगा कि अध्यक्ष जी आखिर कब समझेंगे इशारा।

चालान का डर

बिना मास्क लगाए घूम रहे दिल्लावासी आजकल खाकी वर्दी देखकर डर जा रहे हैं। इतना डर उनको कोरोना से नहीं लग रहा जितना पुलिसवालों के हाथ में चालान की रसीद देखकर लग रहा है। दिल्ली पुलिस का ध्यान इन दिनों कोरोना के चालान काटने में ज्यादा है। पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिया है कि डीडीएमए और केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों के उल्लंघन पर किसी भी सूरत में कोई भी व्यक्ति चाहे वह मास्क न पहना हो, सामाजिक दूरी का पालन नहीं करते हो और सार्वजनिक जगहों पर थूकते पाए जाएं तो उन्हें भी हाथ में दो हजार का चालान थमा दिया जाए। नतीजा यह है कि अब पुलिस को देखते हैं लोग मास्क नाक से ऊपर करने लगते हैं और अपने साथियों को दूर हटा कर चलने की नसीहत देने लगे हैं।

गायब हुआ शोर

कोरोना के बढ़ते मामलों को दिल्ली सरकार ने कोरोना की चौथी लहर बता दिया है। विपक्षी दल इस तर्क पर अब आम आदमी पार्टी को घेर रहे हैं। दलों के नेताओं ने साफ किया है कि जब कोरोना के मामले कम हो रहे थे तो लगातार ‘आप’ सरकार ‘दिल्ली मॉडल- दिल्ली मॉडल’ का शोर मचाकर इसका क्रेडिट लेने की कोशिश कर रही थी। लेकिन मामले बढ़ने के बाद से ही यह क्रेडिट फोर्स गायब हो गई है। अब एक बार फिर ‘आप’ केंद्र की घेराबंदी कर मामलों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।

घट गई दुर्घटना

‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ वाली कहावत बीते दिनों बुद्धीजीवियों का गढ़ समझे जाने वाले सेंट स्टीफेंस कॉलेज पर सटीक बैठती है। जब सारी शैक्षणिक गतिविधियां कोविड-19 के प्रोटोकॉल के दायरे में हो रही थी, वैसे में कॉलेज के प्राचार्य ने छात्रों को टूर पर जाने की मंजूरी दे दी। इतना ही नहीं टूर से लौटने वाले के बाद कॉलेज प्रशासन ने एहतिहात के तौर पर ही कोरोना जांच करा लेना भी जरूरी नहीं समझा। खासकर तब जब देश कोरोना की अगली लहर की चपेट में था।

जब कॉलेज की प्रबंध समिति के एक सदस्य ने कॉलेज प्रशासन से जवाब तलब किया तो जवाब आया कि इस टूर में छात्रों की अभिभावकों की सहमति ली गई थी। लेकिन प्राचार्य को कौन बताए कि कोविड-19 के प्रोटोकाल और कोरोना जांच की जरूरी औपचारिकता पूरी करना परिवार की नहीं शैक्षणिक संस्थान की जिम्मेदारी है। किसी ने ठीक ही कहा-यदि टूर से लौटते ही टीम का कोरोना जांच करा लिया गया होता तो बाकी छात्रों को कोरोना से बचाया जा सकता था।

नंबर आएगा क्या!

सालों से निगम मुख्यालय चक्कर काट रहे और पार्षदों की पंक्ति में पीछे बैठने वाले एक पार्षद इन दिनों महापौर की दौड़ में सबसे आगे हंै। कारण अगले साल निगम का चुनाव होना है और निगम में महापौर की तलाश की जा रही है। ऐसे में बेदिल ने जब उनसे पूछा कि क्या आपका नाम भी महापौर की दौड़ में शामिल है, उन्होंने झट से जवाब दिया की आखिर निगम मुख्यालय के चक्कर काट-काट कर थकने के बाद और पीछे की पंक्ति में बैठने के बाद कभी तो आगे भी बैठने का भी मौका तो मिलेगा। फिर महापौर की तलाश में पार्टी पार्षदों को ढूंढ रही है तो अपने में क्या दिक्कत है।

सूचना में देरी

गौतमबुद्ध नगर में कोरोना संक्रमण के फैलाव में तेजी के बाद भले ही प्रशासनिक विभाग पूरी मुस्तैदी और सतर्कता बरतने का दावा कर रहे हैं लेकिन संक्रमण के मामलों की संख्या बताने वाली अधिकारिक जानकारी बिल्कुल लचर रवैया अपनाए हुए है। यहां रोजाना कितने नए संक्रमित मिले यह जानकारी जिला प्रशासन की तरफ से दी जाती है। जिला सूचना विभाग की तरफ से वाट्सऐप के जरिए रोजाना तीन बजे तक कोरोना का ब्योरा ग्रुप में भेज दिया जाता है।

जब तक मरीज कम आए सूचना भी तेजी से मिलती रही, जैसे-जैसे मरीज बढ़ रहे हैं वैसे-वैसे सूचना की रफ्तार भी जैसे कम हो रही है। तीन बजे तक मिलने वाली रिपोर्ट कभी चार तो कभी पांच बजे जारी की जा रही है। कुछ दिन तो सूचना रात में 11 बजे तक दी गई। सूचना में इतनी देरी क्यों हो रही है इसका कोई जवाब भी नहीं मिल रहा। हालांकि लोगों का कहना है कि जिस दिन ज्यादा संक्रमित मरीज मिलते हैं, उस दिन की रिपोर्ट आधी रात के आसपास जारी किए जाने का कारण क्या है?


-बेदिल

Read More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
%d bloggers like this: