POLITICS

इराक के बगदाद में जन्मे थे मदन मोहन, निधन के 29 साल बाद ‘वीर जारा’ से पूरा हुआ था अधूरा सपना

इराक के बगदाद में जन्मे थे मदन मोहन, निधन के 29 साल बाद 'वीर जारा' से पूरा हुआ था अधूरा सपना

मदन मोहन फोटो

खास बातें

  • फिल्मी रही मदन मोहन की जिंदगी
  • सेना में अधिकारी थे मदन मोहन
  • वीरा जारा फिल्म से पूरा हुआ था आखिरी सपना

एक तरफ जंग के मैदान में दुश्मन पर गरजती बंदूक और दूसरी तरफ संगीत की दुनिया का सुरमयी सफर, दोनों में कोई समानता नहीं है, पर संगीतकार मदन मोहन की जिंदगी का यही सच है. मदन मोहन ने देश की सेवा की खातिर सरहद का रुख किया और लौटे तो अपने साज और आवाज से फिल्मी दुनिया को सराबोर कर दिया. संगीत की दुनिया में आने से पहले मदन मोहन सेना के लेफ्टिनेंट के पद पर काम कर चुके थे. वैसे तो मदन मोहन संगीतकार थे, पर इस मुकाम तक पहुंचने से पहले का उनका सफर फिल्मी ही रहा.

संगीत का फिल्मी सफर

मदन मोहन का जन्म बगदाद में हुआ था, जहां उनके पिता चुन्नीलाल कोहली इराकी पुलिस के महालेखाकार थे. कुछ समय बाद वतन वापसी हुई तो पिता उन्हें दादा-दादी के पास छोड़ कर बिजनेस की खातिर अलग-अलग शहरों में घूमते रहे. अंग्रेजों से रायबहादुर की उपाधि हासिल कर चुके चुन्नीलाल नहीं चाहते थे कि बेटा गीत संगीत में समय बर्बाद करे. पर सुरों की दुनिया ने तो इस संगीतकार को अपने साजों में उलझा ही लिया था.

सेना में अधिकारी थे मदन मोहन 

सेना में अधिकारी रहे मदन मोहन संगीत की तलाश में फिल्मी दुनिया तक आ गए. आपकी नजरों ने समझा, झुमका गिरा रे, लग जा गले, कर चले हम फिदा आदि, ये ऐसे नगमे हैं जो कभी भुलाए नहीं जा सकते. इन्हीं शब्दों को अपने संगीत में पिरोया था संगीतकार मदन मोहन ने, और ये अमर तराने हिंदी सिनेमा के नाम कर दिए.

संगीतकार का ‘वो’ आखिरी सपना 

यूं तो मदन मोहन ने कई अनमोल नगमे बॉलीवुड के नाम कर दिए, लेकिन एक हसरत ताउम्र कायम रही. उनकी बस एक ही तमन्ना थी कि उनकी रची धुन पर कोई गाना हेमा मालिनी और अमिताभ बच्चन पर फिल्माया जाए. इन दोनों के लिए वे कुछ अलग-अलग गीत कंपोज कर चुके थे. हालांकि उन्हें ऐसा कोई गीत रचने का मौका नहीं मिला, जिसमें दोनों साथ हों. आखिरकार उनकी ये तमन्ना निधन के 29 साल बाद पूरी हुई. 14 जुलाई 1975 को मदन मोहन इस दुनिया से रुखसत हो गए. इसी दिन उनके सपनों को तामीर करने की तैयारी हुई.

फिल्म ‘वीर जारा’ से पूरी हुई तमन्ना 

मदन मोहन बेटे संजीव कोहली को ये अहसास हुआ कि पिताजी की कुछ धुनें आज भी उनके चाहने वालों तक नहीं पहुंच पाई हैं. इसके बाद संजीव को जब मौका मिला, तब उन्होंने ये धुनें बॉलीवुड निर्देशक यश चोपड़ा को सुनाई. यशजी को संगीत इतना पसंद आया कि उन्होंने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘वीर जारा’ के गानों के लिए उन धुनों को चुन लिया, जिसका क्रेडिट मदन मोहन को ही दिया गया. जब फिल्म पर्दे पर उतरी तब संजीव को ये अहसास हुआ कि उनके पिता का अधूरा सपना सिल्वर स्क्रीन पर पूरा होकर जगमगा रहा था. अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी पर फिल्माए गए गाने ‘लो आ गई लोहड़ी वे’ का म्यूजिक मदन मोहन ने दिया था. 

Back to top button
%d bloggers like this: