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आषाढ़ gupt navratri किस दिन हो रही शुरू, जानिए यहां कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

आषाढ़ gupt navratri किस दिन हो रही शुरू, जानिए यहां कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Gupt navratri 30 जून से शुरू हो रही है. जिसका समापन 08 जुलाई को होगा.

खास बातें

  • कलश स्थापना प्रात: का शुभ मुहूर्त प्रातः 5 बजे का है.
  • व्रत समापन के बाद कलश को किसी पवित्र जगह पर ही विसर्जित करें.
  • ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है.

Navratri Vrat date : क्या आपको पता है साल में कुल चार बार नवरात्रि का व्रत पड़ता है जिसमें से लोगों को केवल शारदीय और चैत्र के बारे में पता है जबकि दो गुप्त नवरात्रि के विषय में बहुत कम लोगों को जानकारी होगी. आपको बता दें कि माघ और आषाढ़ के महीने में पड़ने वाले मां दुर्गा के नव दिवसीय व्रत को गुप्त नवरात्रि (Gupt navratri) के नाम से जाना जाता है. ऐसे में लेख में आपको आषाढ़ मास (Ashadh month) की गुप्त नवरात्रि के कलश स्थापना (kalash sthapana) के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में बताएंगे, जो इस महीने की 30 तारीख से शुरू होकर अगले माह की 08 जुलाई को संपन्न होगी.

कलश स्थापना शुभ मुहूर्त | Kalash Sthapana Shubh Muhurat-2022

मां दुर्गा के उपासक नवरात्रि के व्रत में कलश स्थापना जरुर करते हैं. इसलिए इसके शुभ मुहूर्त के बारे में पता होना चाहिए. घटस्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः काल 05 बजकर 26 मिनट से लेकर 06 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.

गुप्त नवरात्रि पूजा विधि | Puja Vidhi Of Gupt Navratri-2022

– नवरात्रि के व्रत में मां दुर्गा के नव रूपों की व्रती लोग पूजा अर्चना करते हैं. जिनके नाम हैं-काली, तारा, त्रिपूरा सुंदरी, भुवनेश्वरी, त्रिपुरा भैरवी, मां धुम्रवती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी.

– पूजा की शुरूआत पूजा स्थान को गंगा जल से छिड़कर पवित्र कर लेना होता है. इसके बाद लाल कपड़े का आसन बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा को स्थापित करना है. फिर लाल चुनरी ओढ़ाकर उनका सोलह सिंगार भक्त करते हैं.

– इसके बाद उन्हें भोग लगाकर मां दुर्गा का पाठ एवं आरती काजिए. इस दौरान सुबह शाम दोनों देवी मां को भोग और आरती करना होता है.

– गुप्त नवरात्रि में रोजाना ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है और घर का वातावरण सकारात्मक होता है. आपको बता दें कि नवरात्रि के समापन के बाद स्थापित कलश को किसी पवित्र जगह ही विसर्जित करना चाहिए.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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