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आप कहो तो हम दिल्ली के रास्ते खुलवा देंगे

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी पर राकेश टिकैत ने कहा कि हाईवे किसानों ने नहीं बल्कि पुलिस ने अपनी बैरिकेडिंग से जाम कर रखे हैं। टिकैत ने तंज के अंदाज़ में कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट चाहे तो वो लोग दिल्ली के रास्ते खुलवा देंगे।

दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन की मांग को लेकर किसानों की तरफ से दायर की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख़ टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे किसानों ने लंबे समय से शहर का गला घोंट दिया है और अब शहर में जाकर उपद्रव करना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हाईवे किसानों ने नहीं बल्कि पुलिस ने अपनी बैरिकेडिंग से जाम कर रखे हैं। टिकैत ने तंज के अंदाज़ में कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट चाहे तो वो लोग दिल्ली के रास्ते खुलवा देंगे।

राकेश टिकैत ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट को रास्ते खुलवाने चाहिए, जो पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखे हैं। रास्ते बंद कर रखे हैं सरकार ने। हमारा रास्ता भी क्लियर करवा दो.. हम भी आगे को बढ़ें, जनता भी आगे को बढ़े। पुलिस रोके है रास्ते तो, रास्ते किसान नहीं रोकता। 10 महीने से सरकार ने सड़क बनाकर कंक्रीट की दीवार खड़ी कर दी।’

उन्होंने आगे कहा, ‘बैरिकेडिंग को किसानों ने लगाया? अगर हम बैरिकेडिंग तोड़ें तो कहोगे तोड़ दी। हम अपने आप रास्ते खुलवा लेंगे। आप अगर कहते हो कि दिल्ली के रास्ते बंद हैं तो हम खुलवा लेंगे। अगर आप कहते हो तो बताओ हम खुलवा लें रास्ते…कुछ जनता आ जाए जिनके रास्ते रुक रहे हैं और कुछ हम हो जाएंगे और फिर चलें दिल्ली की तरफ को।’

राकेश टिकैत ने इसी बीच दोहराया कि किसान आंदोलन अभी चलेगा। उनका कहना था कि आंदोलन अब क्रांति बनेगा। वो बोले, ‘देश को बेचने पर निकल गई है सरकार, ये आंदोलन अभी चलेगा। आंदोलन अब खेत से क्रांति की तरफ जाएगा।’

गौरतलब है कि पिछले करीब एक साल से दिल्ली एनसीआर में नेशनल हाईवे को प्रदर्शन के चलते अवरुद्ध करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने किसान महापंचायत को जमकर फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अगुवाई वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि प्रदर्शन के कारण दिल्ली आने जाने वाले यातायात में रुकावट आई है। इस कारण व्यवसाय बंद हो गए हैं। क्या आपने प्रदर्शन के आस पास के निवासियों से कभी पूछा कि वो इस बात से खुश या नहीं? वहीं किसान महापंचायत के वकील ने कोर्ट में यह कहा कि बैरिकेड्स किसानों ने नहीं, पुलिस ने लगाए हैं।  

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