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आंदोलन के बीच रंगों का त्योहार: कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बॉर्डर पर ही मनाई होली; लोकनृत्य और गीत-बजाने के साथ रंग खेला जाता है

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नई दिल्ली 5 दिन पहले

यह फोटो सिंघु बॉर्डर की है। यहां शनिवार को किसानों ने कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर होलिका दहन किया।

कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने भी होली मनाई। गाजीपुर में दिल्ली-उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर पिछले 123 दिनों से प्रदर्शन कर रहे किसानों ने लोकनृत्य और गाना-बजाना कर त्योहार का लुत्फ उठाया। इस दौरान कुछ किसान गीत गाते नजर आए, तो कुछ ने डांस कर त्योहार को मनाया।

# वाट | दिल्ली-उत्तर प्रदेश की सीमा पर गाजीपुर में पिछले 123 दिनों से किसान प्रदर्शन कर रहे हैं और नाचते गाते हैं # होली एक किसान कहता है, “घर जा सकते हो। ) – ANI (@ANI) मार्च २ ९, २०२१

किसान 🙂 होते हैं। 26 जनवरी को लाल किले की हिंसा के बाद कमजोर पड़े आंदोलन को किसान संगठन फिर से तेज करने की कोशिशों में लगे हुए हैं। उनकी मांग है कि तीनों कानूनों को वापस लिया जाए।

किसान लंबे समय तक टिकने की तैयारी में जुटे कड़ाके की ठंड झेलने के बाद आंदोलनकारी किसान अब गर्मियों के मौसम को देखते हुए तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने टेंट में पंखे लगवाना शुरू कर दिए हैं। साथ ही टेंट की ऊंचाई बढ़ाकर उसके अंदर एक और टेंट लगा रहे हैं ताकि गर्मी से बच सकें। इसके साथ ही धरनास्थलों पर एसी लगी ट्रॉलियां भी नजर आ रही हैं। किसान नेता राकेश टिकैत कह रहे हैं कि आंदोलन कम से कम दिसंबर तक चलेगा।

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