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अब शुभ कार्य शुरू करने का सबसे अच्छा समय: सरकार की घोषणा में कुंभ शुरू, लेकिन ज्योतिषीय गणनाओं में 12 साल बाद आज राशि राशि में बृहस्पति के प्रवेश से फलीभूत होगा कुंभ

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    हरिद्वार 13 मिनट पहले लेखक: रितेश शुक्ला

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    जूना अखाड़ा में नागा साधु बनने का अनुष्ठान।

    सरकारी घोषणा में हरिद्वार में कुंभ की शुरुआत 1 अप्रैल से हो चुकी है … लेकिन ज्योतिषीय गणनाओं के हिसाब से कुंभ की शुरुआत मंगलवार को होगी। 6 अप्रैल से होगा। कहने को तो कुंभ के लिए संतों का जमावड़ा मकर संक्रांति से ही शुरू हो जाता है और शिवरात्रि को पहला बड़ा स्नान भी माना जाता है। मगर ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक कुंभ की शुरुआत तब होती है जब बृहस्पति, कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं। 12 साल में एक बार बनने वाला यह संयोग 6 अप्रैल को ही बनेगा। मान्यता है कि इसी दिन से कुंभ फलीभूत होगा।

    महाराज बताते हैं कि कुंभ के शुरू होने के लिए जरूरी है कि गुरु ग्रह कुंभ राशि में और सूर्य मेष या सिंह राशि में प्रवेश करें। कुंभ के आरंभ होने की तिथि पर संत समाज के अलग-अलग प्रतिनिधियों का कहना है कि मकर संक्रांति से साधु-संतंभ के शुरू होने की प्रतीक्षा करते हैं।

    इस इंतजार का बड़ा पड़ाव शिवरात्रि को माना जाता है। मगर कुंभ की शुरुआत तभी होती है जब योजनाओं का दुर्लभ संयोग बनता है। बृहस्पति कोतु राशि से निकलकर इस राशि में प्रवेश करने में 11 साल, 11 महीने और 27 दिन लगते हैं। अत: 12 साल बाद आता है क्या हंब की खासियत है

    ज्योतिषीय गणनाओं में कुंभ राशि का स्वामी शनिदेव को माना जाता है। शनि को कर्म और लाभ का प्रतीक माना जाता है जबकि बृहस्पति को भाग्य और मोक्ष का। सनातन धर्म में व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति तब हो सकती है जब भाग्य, कर्म और लाभ में संतुलन हो। कुंभ का समय वह होता है जब बृहस्पति ग्रह, कुंभ राशि में प्रवेश करता है।

    यानी राशि का स्वामी शनि और बृहस्पति दोनों का प्रभाव होता है। अत: मान्यता है कि कुंभ के दौरान मोक्ष प्राप्ति की संभावना सबसे अधिक होती है। इस समय बृहस्पति के प्रभाव के कारण व्यक्ति की पाप करने की क्षमता क्षीण होती है और वह सत्कर्म की ओर प्रेरित होता है। अत: इसे शुभकार्य शुरू करने का सबसे अच्छा समय माना गया है।

    हरिद्वार, प्रयाग और अजैन में कुंभ का आयोजन ग्रह परिवर्तन से तय होता है

    जब गुरुम्ब राशि में आते हैं और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं तो उच्च के होते हैं तब पूर्ण कुंभ होता है। 13 अप्रैल को सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर रहे हैं। प्रयाग: जब गुरु मंत्र राशि और सूर्य मेष राशि में होते हैं तब तक कुंभ होता है। उज्जैन के कुंभ के लिए सूर्य का मेष और नासिक के लिए सूर्य का सिंह राशि में होना आवश्यक है। ये दोनों को सिंहस्थ कहते हैं।

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