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अब मेडल घर पर टांग कर पेरिस के मेडल की तैयारी: नीरज चोपड़ा

अब मेडल घर पर टांग कर पेरिस के मेडल की तैयारी: नीरज चोपड़ा

नई दिल्ली:

भारत के लिए ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतने के सवा महीने बाद भी 23 साल के नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) के लिए सम्मान समारोहों का सिलसिला लगातार जारी है. हैरत इस बात को देखकर होती है कि तब से लेकर अबतक सैकड़ों इंटरव्यू और समारोहों के बावजूद उन्होंने ना अपनी सादगी खोई है और ना ही उनमें कोई तल्खी आई है. नीरज को अपने ट्रेनिंग ग्राउंड Inspire Institute of Sports (IIS), विजयनगर जाने का मौक़ा भी सवा महीने बाद मिल पाया. ये वो मौक़ा भी था जब उनके माता-पिता पहली बार एक चार्टर्ड फ़्लाइट में सवार होकर विजयनगर की हवाई यात्रा की और नीरज ने ट्वीट कर बताया कि ये उनके एक सपने के पूरे होने जैसा रहा.

A small dream of mine came true today as I was able to take my parents on their first flight.

आज जिंदगी का एक सपना पूरा हुआ जब अपने मां – पापा को पहली बार फ्लाइट पर बैठा पाया। सभी की दुआ और आशिर्वाद के लिए हमेशा आभारी रहूंगा pic.twitter.com/Kmn5iRhvUf

— Neeraj Chopra (@Neeraj_chopra1) September 11, 2021

क़रीब डेढ़ हज़ार किलोमीटर के इस हवाई सफ़र के दौरान नीरज ने अपनी मां की बगल वाली सीट चुनी और माता-पिता के बीच बैठकर कई तस्वीरें खिंचवाईं. अपने शुरुआती कोच जयवीर, अपने दोस्त, अपनी टीम और उसमें सवार चुनिंदा पत्रकारों से लगातार बातें करते रहे. क़रीब ढाई घंटे की इस फ़्लाइट में वो विमान के क्रू-मेंबर, एयर होस्टेस और पत्रकारों के साथ तस्वीरें ख़िंचवाते और सबके सवालों का बड़े धैर्य से जवाब देते रहे. यही नहीं विजयनगर में JSW Sports के सम्मान समारोह के दौरान वहां मौजूद 600-700 लोगों में से शायद ही कोई ऐसा रहा हो जिसने नीरज के साथ सेल्फ़ी ना ली हो. कई बार तो वो दौड़ते हुए सेल्फ़ी एक्सपर्ट की तरह फ़ैन्स के साथ उनके कैमरे में कैद होकर उनका दिल जीतते रहे.

बात सिर्फ़ नीरज के बेतहाशा टैलेंट के साथ विनम्रता या धेर्य की नहीं, नीरज की सोच उन्हें दुनिया के सभी एथलीटों से अलग करती है. IIS में फ़ंक्शन के दौरान बताते हैं कि वो अबतक मेडल को साथ लेकर ही सोते रहे हैं. लेकिन वो ये भी कहते हैं कि अब आगे बढ़ने का वक्त है.

वो ओलिंपिक्स में 8 गोल्ड मेडल विजेता जमैका के यूसेन बोल्ट, ओलिंपिक में 23 गोल्ड मेडल विजेता अमेरिकी तैराक माइकल फ़ेल्प्स और ओलिंपिक्स में ही 5 गोल्ड मेडल विजेता ऑस्ट्रेलियाई तैराक इयन थोर्प की मिसाल पेश करते हैं और कहते हैं, “मैं अब इस मेडल को घर में टांगकर पेरिस 2024 की तैयारी करने वाला हूं. यूसेन बोल्ट या फ़ेल्प्स इसलिए महान हैं क्योंकि उन्होंने कई बार अपने प्रदर्शन को दुहराया. मैं इस मेडल को हमेशा टागंकर नहीं घूम सकता. मैं पेरिस को नज़र में रखकर तैयारी करना चाहता हूं और वहां भी अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं.”

नीरज सहित जिंदल स्पोर्ट्स से जुड़े कई एथलीट, मसलन-  हॉकी गोलकीपर पीआर श्रीजेश, वेटलिफ़्मीटर मीराबाई चान्हू, बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु, बॉक्सर सतीश कुमार, जैवलिन थ्रोअर अनु रानी… मतलब वो सभी एथलीट जिन्होंने मेडल जीते या नहीं जीते सबको सराहा गया और इनामी रकम भी दी गई.

इस समारोह की एक और ख़ासियत ये भी रही कि यहां नीरज के चैंपियन बनने के सफ़र में जर्मन कोच क्लॉज़ बार्टोनिएट्ज़ समेत JSW के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सज्जन जिंदल और JSW स्पोर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर पार्थ जिंदल से लेकर JSW स्पोर्ट्स के सीईओ मुस्तफ़ा घोष, एशियाई खेलों की टेनिस पदक विजेता पूर्व नेशनल टेनिस चैंपियन मनीषा मल्होत्रा, टैलेंट स्काउट करने वाले रामाधार यादव, डॉ. डिनशॉ पार्डीवाला, स्पोर्ट्स साइंटिस्ट स्पेंसर मैके, फ़िज़ियोथेरपिस्ट धनंजय कौशिक, फिजियोथेरेपिस्ट ईशान मारवाह और मीडिया मैनेजर अमन शाह तक नवाज़े गए. मतलब साफ़ रहा कि किसी चैंपियन के बनने में एक लंबी चौड़ी टीम की अहम भूमिका होती है. इस टीम की एक भी कड़ी कमज़ोर पड़ी तो उसका असर मैदान पर दिख सकता है. 

नीरज IIS में तैयारी कर रहे कई बच्चों और युवा एथलीट में हौसला भर देते हैं. उनकी सादगी उन्हें दूसरे एथलीटों से अलग नहीं होने देती और उनके चैंपियन बनने की पूरी प्रक्रिया उन्हें दुनिया में सबसे जुदा भी कर देती है. JSW स्पोर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर पार्थ जिंदल बताते हैं कि कैसे उन्होंने IIS जैसे हाई परफॉरमेंस सेंटर्स को 2018 में तैयार करने से पहले वो JSW स्पोर्ट्स के सीईओ पूर्व टेनिस खिलाड़ी मुस्तफ़ा के साथ चीन, मैनचेस्टर, कोलैराडो जैसे दुनिया के कम से कम 9 ऐसे ही हाई परफ़ॉरमेंस सेंटर्स का दौरा कर 3 साल में ही चैंपियन बनाने की ज़मीन तैयार कर दी है.

नीरज ने अलख जगा दी है. जो शुरुआत अभिनव बिन्द्रा ने 2008 में बीजिंग में शूटिंग का गोल्ड जीतकर की थी, नीरज उस परंपरा को आगे ले जाते नज़र आते हैं. IIS और देश के दूसरे हिस्सों में टैलेंट से भरपूर खिलाड़ी अअपने बड़े सपनों को साकार करने करने का रास्ता देखने लगे हैं. आने वाले ओलिंपिक खेलों में अब भारतीय खिलाड़ी गोल्ड या दूसरे पदकों का दावा करते हैं तो दुनिया भर के जानकारों को उन्हें गंभीरता से सुनना ही पड़ेगा.

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