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अपराध की परतें

दिल्ली की अदालतों में प्रवेश द्वारों पर जांच के लिए कंप्यूटरीकृत उपकरण लगाए गए हैं, पर हमलावर वकील की पोशाक पहन कर सुरक्षा-व्यवस्था को चकमा देने में कामयाब हो गए थे। यों किसी अदालत में यह कोई पहली घटना नहीं है। रोहिणी अदालत में ही इससे पहले ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।

दिल्ली की रोहिणी अदालत में हुई गोलीबारी ने एक बार फिर सुरक्षा-व्यवस्था की खामियों और अपराधियों के बढ़ते मनोबल को रेखांकित किया है। एक इनामी बदमाश को पेशी पर पुलिस रोहिणी अदालत लेकर गई थी। जैसे ही उसकी पेशी हुई, उसके विरोधी गुट के बदमाशों ने भरी अदालत में ही उसे गोली मार दी। हालांकि पुलिस तत्काल सक्रिय हुई और उसने दो हमलावरों को मार गिराया। दोनों गुटों के बीच पुरानी रंजिश बताई जा रही है।

हालांकि दिल्ली की अदालतों में प्रवेश द्वारों पर जांच के लिए कंप्यूटरीकृत उपकरण लगाए गए हैं, पर हमलावर वकील की पोशाक पहन कर सुरक्षा-व्यवस्था को चकमा देने में कामयाब हो गए थे। यों किसी अदालत में यह कोई पहली घटना नहीं है। रोहिणी अदालत में ही इससे पहले ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। बदमाशों ने अदालत में हमला करने की साजिश इसलिए रची होगी कि उन्हें वह जगह ज्यादा मुफीद लगी होगी। जिस बदमाश को वे मारने आए थे, वह जेल में बंद था और अदालत में उसे पेशी पर लाया गया था। जेल में ऐसा करना उनके लिए संभव नहीं था। गनीमत है कि इस घटना में दूसरे लोग हताहत नहीं हुए, वरना जितनी गोलियां वहां बदमाशों ने चलाई, उसमें सामान्य लोगों की जान को भी खतरा हो सकता था।

दूसरे शहरों की अपेक्षा दिल्ली अधिक संवेदनशील शहर है। इसलिए यहां सुरक्षा-व्यवस्था को अधिक पुख्ता रखने पर जोर दिया जाता है। दिल्ली पुलिस अनेक मौकों पर दावा करती रही है कि वह राजधानी को अपराधमुक्त बनाएगी, मगर हकीकत यह है कि यहां और इससे सटे शहरों में बदमाशों के अनेक गिरोह सक्रिय हैं और वे कभी आपसी रंजिश में तो कभी पेशेवर रूप में हत्याओं को अंजाम देते रहते हैं। इनकी दबंगई का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इनमें पुलिस का खौफ नहीं दिखता। कुछ महीने पहले ही पुलिस की गाड़ी में ले जाए जा रहे एक बदमाश पर उसके प्रतिद्वंद्वी बदमाशों ने इसी तरह हमला किया था।

हालांकि उसमें भी हमलावर बदमाश मारे गए थे, पर दिल्ली पुलिस को चुनौती देते बदमाशों को लेकर सवाल तो उठे ही थे। हालांकि ताजा घटना में अदालत लेकर गए पुलिस दस्ते को इस बात की आशंका जरूर रही होगी कि कोई अनहोनी हो सकती है, इसलिए वे हथियारबंद होकर गए थे और हमलावरों को मार गिराने में सफल हुए थे। इस मामले में यह दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी कही जा सकती है। मगर उसके सामने यह चुनौतियां तो हैं ही कि ऐसे बदमाशों में वह कैसे खौफ पैदा कर और अपराध पर अंकुश लगा सके।

इस घटना पर दिल्ली पुलिस आयुक्त ने कहा है कि इसमें शामिल अपराधियों को किसी रूप में बख्शा नहीं जाएगा। पर देखना है कि दिल्ली में सक्रिय ऐसे अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस क्या कदम उठाती है। इन अपराधियों के पनपने और इनका मनोबल बढ़ने की वजहें छिपी नहीं हैं। ये जमीनों पर कब्जा कराने, सुपारी लेकर हत्या करने जैसी घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं। इन पर अंकुश न लगाए जा पाने का ही नतीजा है कि बलात्कार, छेड़खानी, रंगदारी करने वाले भी भय नहीं खाते।

दिल्ली में ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ती गई हैं। पुलिस की सफलता इस बात में मानी जाती है कि वह अपराधियों के मन में भय पैदा कर सके। अगर दिल्ली पुलिस इसमें नाकाम साबित हो रही है तो उसे अपराध रोकने संबंधी अपनी रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है।

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