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अक्षय तृतीया इस बार अत्यधिक शुभ

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ज्‍योतिषीय दृष्टि से चार अबूझ व स्वयंसिद्ध मुहूर्त हैं जिनमें किया गया कोई भी कार्य चिर स्थायी एवं शुभ माना जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अक्षय तृतीया, दशहरा तथा दिवाली। अक्षय का अर्थ है जिसका क्षय न हो।

Religionसांकेतिक फोटो।

मदन गुप्ता सपाटू

ज्‍योतिषीय दृष्टि से चार अबूझ व स्वयंसिद्ध मुहूर्त हैं जिनमें किया गया कोई भी कार्य चिर स्थायी एवं शुभ माना जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अक्षय तृतीया, दशहरा तथा दिवाली। अक्षय का अर्थ है जिसका क्षय न हो। यह तिथि भगवान परशुराम जी का जन्मदिन होने के कारण परशुराम तिथि और चिरंजीवी तिथि भी कहलाती है। त्रेता युगा का आरंभ भी इसी तिथि से माना गया हैं, अत: इसे युगादितिथि भी कहा गया है। इस दिन किए गए कार्यों का अक्षय फल मिलता है। यह एक सर्वसिद्ध मुहूर्त माना जाता है जिस दिन पंचाग देखे बगैर कोई भी मांगलिक शुभ कार्य किया जा सकता है। नए व्यवसाय या नई संस्था की नींव रखी जा सकती है।

महामारी के कारण घर में पूजा करें और मां लक्ष्मी का ध्यान करें। महामारी के इस समय में इस दिन किसी मदद चाहने वाले व्यक्ति को दान करना पुण्य फलदायी रहेगा। सनातन धर्म शाश्वत है और बहुत लचीला है अत: देश ,काल परिस्थितियों एवं समय की आवश्यकतानुसार बदला जाता रहा है। वर्तमान संदर्भ में ,कोराना काल के सभी नियमों का पालन करते हुए, पाठ पूजा घर में ही करें। अक्षय तृतीया पर दान का भी बहुत महत्व है और आज परंपरागत दान की वस्तुएं बदल गई हैं। आप जरूरतमंदों को दवाइयां, वैक्सीन, आॅक्सीजन, पीपीई किट, मास्क, सैनेटाइजर, कोरोना पीड़ित परिवारों को फूड पैकेट, शमशान में लकड़ियां आदि भी दे सकते हैं।

सुख समृद्धि के उपाय

यदि अक्षय तृतीया पर पर बैंक में नया खाता खोला जाए या पुराने खाते में धन जमा कराया जाए तो धन में निरंतर वृद्धि होती है। इस दिन किया गया कोई भी नया निवेश कई गुना बढ़ जाता है। आप नई बीमा पालिसी, म्युचुअल फंड, सोने आदि में पहले दिन धन लगा सकते हैं। इसके अलावा बैंक या घर के लॉकर में लाल या पीले कपड़े में 12 साबुत बादाम बांध कर रख दिए जाएं तो भी आभूषणों में वृद्धि होती रहती है और उसमें कभी कमी नहीं आती।

क्यों खरीदते हैं सोना ?

ऐसी मान्यता है कि इस दिन अगर हम भौतिक संसाधन जुटाएं तो वे हमारे जीवन में हमेशा बने रहते हैं। ऐसे में अक्षय तृतीया के दिन नया काम शुरू करने, भौतिक संसाधनों जैसे बर्तन, सोना, चांदी जैसी अन्य कीमती वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना गया है। साथ ही ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सोना पीढ़ियों के साथ बढ़ता चला जाता है। अक्षय तृतीया के दिन सूरज की किरणों में काफी तेज होता है। सूर्य का संबंध सोने के कारण इस दिन सोना खरीदना शक्ति का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस दिन अगर आप सोना नहीं खरीद पाते हैं तो दान-पुण्य करके जीवन में आने वालीं परेशानियां दूर कर सकते हैं।

ग्रहों का संयोग

इस बार अक्षय तृतीया पर ग्रहों का ऐसा संयोग बना है जो इस दिन को और शुभ और प्रभावशाली बना रहा है। सूर्य इस दिन मेष राशि से वृष राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के राशि परिवर्तन से इस दिन वृष राशि में सूर्य बुध के संयोग से बुधादित्य योग बनेगा। इस दिन शुक्र स्वराशि वृष में रहेंगे। इस पर शुभ संयोग यह भी बना है इस दिन चंद्रमा उच्च राशि होंगे। अक्षय तृतीया पर चंद्रमा का शुक्र के साथ शुक्रवार को वृष राशि में गोचर करना, धन, समृद्धि और निवेश के लिए बहुत ही शुभ फलदायी है।

अक्षय तृतीया पर चंद्रमा संध्या काल में मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। मिथुन राशि में इस समय मंगल का संचार हो रहा है। ऐसे में चंद्रमा के मिथुन राशि में आने से यहां धन योग का निर्माण होगा। ग्रहों की इस शुभ स्थिति में अबकी बार अक्षय तृतीया पर स्थायी संपत्ति जैसे जमीन, मकान की खरीदारी करना शुभ फलदायी होगा। इस दिन आप नए कारोबार और काम का आरंभ कर सकते हैं। जो लोग धन का निवेश या पुण्य का निवेश करना चाहते हैं उनके लिए भी दिन उत्तम है। पुण्य का निवेश से मतलब है कि जो लोग पुण्य फल पाना चाहते हैं जिससे अनेक जन्मों में उन्हें धन ऐश्वर्य मिले उनके लिए भी इस दिन दान करना अनंत गुणा फलदायी होगा।

अक्षय तृतीया पर दान पुण्य

इस बार ग्रहों के संयोग को देखते हुए अक्षय तृतीया के अवसर पर जल से भरा हुआ घड़ा, शक्कर, गुड़, बर्फी, सफेद वस्त्र, नमक, शरबत, चावल, चांदी का दान करना बेहद शुभ फलदायी रहेगा। अक्षय तृतीया के दिन धार्मिक पुस्तकों और फलों का दान भी पुण्य की वृद्धि करने वाला होगा।

क्या-क्या करें ?

यह अबूझ मुहूर्त सगाई एवं विवाह के लिए सर्वोत्तम है। इसके अतिरिक्त दीर्घकालीन निवेश जैसे प्लाट, मकान, स्थायी प्रापर्टी, बीमा पालिसी, शेयर, म्युचल फंड, आभूषण, सोना,चांदी, वाहन क्रय, नौकरी के लिए आवेदन, नया व्यवसाय आरंभ, मकान की नींव आदि, भवन क्रय के लिए एग्रीमेंट, विदेश यात्रा, नया व्यापार आरंभ आदि के लिए चिरंजीवी दिन है।


शुक्र ग्रह, सुख सुविधा एवं ऐश्वर्य का प्रतीक है। इस दिन गृहपयोगी सामान भी खरीदा जा सकता है। विलासिता, शृंगार, भवन के नवीनीकरण से संबंधित वस्तुएं घर में लाना शुभ माना गया है। वाहन का क्रय बिना कोई मुहूर्त देखे अक्षय तृतीया पर किया जा सकता है।

कैसे करें पूजा ?

दिवाली की तरह इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा का विशेष महत्व है। आर्थिक सुख समृद्धि एवं धन की आवश्यकता आज मजदूर से लेकर मंत्री तक सब को है। यदि आप इस दिन लक्ष्मी जी का पूजन करना चाहें तो इस अवधि में बहुत ही साधारण विधि से कर सकते हैं। महिलाएं परिवार की सुख समृद्धि व धनागमन हेतु व्रत रख सकती हैं। इस दिन लक्ष्मी जी की आराधना का सर्वाधिक महत्व है। प्रात: स्नान करके पुरुष सफेद तथा महिलाएं लाल वस्त्र पहन कर, लक्ष्मी जी के चित्र या मूर्ति के आगे बैठ कर इन मंत्रों में से किसी एक या सभी की एक एक माला कर सकते हैं। कमल गटटे या स्फटिक की ही माला का प्रयोग करें।

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